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Nirali / निराली (Story On Women Empowerment)

कॉर्पोरेट में काम करने वाली निराली का दिन कब शुरू होकर कब खत्म हो जाता उसे खुद पता नहीं चलता, उसके दिन की शुरुआत सुबह जल्दी उठ घर की साफ-सफाई करने से होती, फिर तैयार हो पूजा-पाठ करना, उसके बाद रसोई बनाने लग जाती, लेकिन इसके साथ ही घरवालों की फरमाइशों का दौर शुरू हो जाता, “निराली, बहु मेरी इलायची वाली चाय तो बना देना जरा” ये आवाज निराली के ससुर मनोहर लाल की है, जो कि नियमित रूप से इसी समय, इन्ही शब्दों के साथ सुनाई देती है। “लाई पापा जी” निराली अभी अपना जवाब पूरा भी नहीं दे पाती उससे पहले ही, “भाभी, मेरा जूस” ये फरमाइश निराली की नन्द मानसी की ओर से प्रतिदिन आती।” “लाई” “निराली, मेरा नाश्ता” निराली के पति अश्विन के कहते ही, “लाती हूँ, पहले आप बच्चों को तैयार कर दीजिए, मुझे थोड़ी मदद हो जाएगी।” आज पहली बार निराली ने किसी से काम में मदद माँगने की जुर्रत की जिसका इल्जाम भी उसे भुगतना पड़ा। “पति को काम करने को कह रही है, थोड़ी भी शर्म है, अरे थोड़ा जल्दी उठकर भी तो काम करना शुरू कर सकती है।” वही बैठी निराली की सास सुषमा ने उसे जैसे ही लताड़ा, “मम्मी जी, जल्दी ही उठी थी, वो तो आज तबीयत थोड़...