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Gunjan (Story On Domestic Violence)

मैं मासूम तरस रहीं हूँ अपनों के प्यार को अपने तो मिलें मुझे लेकिन प्यार ना मिला " गुंजन ,  अरे ओ गुंजन कहाँ चली गई" शालिनी गुंजन को ढूँढ़ते हुए इधर से उधर घूम रही थी। " जी माँ ,  आपने बुलाया ?"  " हाँ बुलाया ,  रसोई में झूठे बर्तनों का ढ़ेर पड़ा हैं ,  वो कौन साफ़ करेगा ,  और बाथरूम में धुलने के कपड़े भी हैं ,  वो भी धो देना।"   "लेकिन माँ मैं अभी पढ़   रहीं हूँ ,  थोड़ी देर में सारे काम निबटा दूँगी।"   "बेशर्म जुबान चलाती हैं मुझसे ,  कोई ज़रुरत नहीं हैं पढ़ने की ,  वैसे भी कौनसा तुझे पढ़-लिखकर नौकरी करनी हैं ,  चल और काम कर ,  उसके बाद दोपहर के खाने की तैयारी भी करनी हैं ,  और हाँ आज खाने में मटर-पनीर बनाना ,  मेरे रिशु को बहुत पसंद हैं ,  स्कूल से आते ही उसे बहुत जोरो की भूख लगी होगी ,  इसलिए उसके आने से पहले बना देना।"   "जी माँ" और गुंजन शालिनी के कहे अनुसार काम करने चल दी। बीस   साल पहले शालिनी और निशांत की शादी हुई थी ,  लेकिन बहुत कोशिशों के बावज़ूद भी शालिनी मा...

Andaaz-E-Ishq (A Heart Touching love story)

ना जाने ऐसी क्या हुई खता हमसे ,  मिली हैं जो ये सज़ा हमें   कभी सोचा ना था हो जायेंगे यूँ खफा बीच राहों में कदम हमारें   “देख इन बारिश की बूदों को ज़मीं पे गिरता हुआ ,  आता हैं ख्याल ज़ेहन में मेरे ,  भीग तुझ संग उठाऊँ लुत्फ़   इस मौसम का”   “वाह-वाह क्या बात हैं आरिफ मियां आप तो शायर हो गये ”  “बेगम ,  यूँ तो हम शायर नहीं ,  पर ना जाने क्यों होते ही दीदार आपके शायरी खुद-ब-खुद आ जाती हैं ज़ेहन में”   “वैसे आरिफ मियां आपका ये तारीफ करने का अंदाज़ वाकई में हैं गज़ब का ,  आपके इसी अंदाज़ ने तो हमें आपका कायल बना दिया था। ”  “सही कहा ज़ोया बेगम ,  हमारे तारीफ करने के हुनर ने आपको हमारा कायल बना दिया और आपकी खूबसूरती ने हमें आपका कायल बना दिया ,  चलिए इसी बात पर कहीं बाहर घूमने चलते हैं।”   “बाहर ,  वो भी इस मौसम में ?”  “हाँ ,  बेगम इस मौसम में ,  अरे भई बारिश में भीगते हुए घूमने का मज़ा ही कुछ ओर हैं।”   “लेकिन आरिफ मियां”   “बस ज़ोया बेगम अब ये लेकिन-वेकिन बोलना छोडिय...