Kaash Koi Samjh Paata / काश कोई समझ पाता (Story On Women)
“राशि, नाश्ता तैयार है?” डाइनिंग चेयर पर बैठते हुए सामान्य कद-काठी, एवं साँवले रंग वाले 35 वर्षीय पुलकित ने आवाज लगा अपनी पत्नी से पूछा। “हाँ लाती हूँ।” और फिर कुछ ही देर में सामान्य कद, साँवला रंग, और सामान्य नैन-नक्श वाली 34 वर्षीय राशि ने सैंडविच, और जूस पुलकित के सामने हाज़िर कर दिया। “ओह गॉड, आज फिर से सैंडविच, राशि यार कभी तो कुछ और बना लिया करो, बोर हो गया हूँ रोज-रोज ये ब्रेड खा कर।” पुलकित ने नाश्ते की प्लेट आगे धकेल कुर्सी से उठते हुए कहा। “पुलकित यूँ खाने का अपमान मत करो, जो भी है खा लो, मैं कोशिश करूँगी कुछ ओर बनाने की।” राशि ने जैसे ही अनुरोध करते हुए कहा। “तुम और तुम्हारी कोशिशें, दुखी हो गया हूँ सुन-सुनकर, मुझे तो समझ नहीं आता, ऑफिस जाने से पहले, और आने के बाद तुम्हारे पास काम क्या होता है, जो तुम दो वक्त का खाना भी ढ़ंग से नहीं बना पाती।” “यही सवाल तो मैं भी पूछती हूँ इससे बार-बार, अरे सुबह जल्दी उठकर कुछ अच्...