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Ek Pariwaar Ki Maut / एक परिवार की मौत ( Article On Social System )

     बेहद ही भयावह, एवं अविस्मरणीय दृश्य था वो, उस हादसे की तस्वीर मेरे ज़ेहन में आज भी ताज़ा है, सच कहूँ तो भूलना चाहूँ, तो भी नहीं भूल सकती।         पाँच साल पहले की बात है, दिसंबर महीने का दूसरा हफ्ता चल रहा था, सर्दी अपनी चरमसीमा पर थी, उन दिनों में नोएडा में रहती थी, क्योंकि तकरीबन छ: साल पहले ही वहाँ, मेरी एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी लगी थी। यूँ तो मैं अक्सर शाम 7 बजे तक ऑफिस से निकलकर पौने आठ-आठ बजे तक घर पहुँच जाती थी, लेकिन उस दिन ऑफिस में स्टाफ की कमी, एवं काम ज्यादा होने की वजह से घर लौटने में रात के 10 बज गए, वैसे तो मेरे पति पुनीत ने मुझसे पूछा था कि वो मुझे ऑफिस में लेने आ जाए, लेकिन मैंने ही मना कर दिया, और अकेली ही ऑफिस से निकल ऑटो-रिक्शा ढूँढने लगी।      अभी मैं ऑटो-रिक्शा ढूँढते हुए ऑफिस से कुछ दूर ही निकली थी कि पीछे से कार का हॉर्न सुनाई दिया, “ मैं तो सड़क के किनारे-किनारे चल रही हूँ, तो फिर ये हॉर्न किसके लिए बजा रहा है ?” खुद से ही सवाल करते हुए मैंने जैसे ही पीछे मुड़कर देखा तो एक कार सड़क पर कभी इधर-तो ...

Itna Lalch Kyo / इतना लालच क्यों ? ( Story On Family)

           पिछले हफ़्ते की बात है , मैं दिल्ली स्थित अपने घर के पीछे बने एक पार्क में सुबह की सैर कर रही थी , कि अचानक से मेरी नज़र पार्क में बनी एक बेंच पर बैठी दुबली-पतली , लंबे कद वाली , साँवले रंग की एक महिला पर पड़ी , " ये कौन है ?" मैंने उसे पहचानने की कोशिश करते हुए स्वयं से ही पूछा............"अरे ये तो कविता है।"   अगले ही पल मैंने चहकते हुए स्वंय को ही जवाब दिया। और बिना वक्त गवायें उस ओर चल पड़ी जहाँ कविता बैठी हुई थी , कविता मेरी कॉलेज फ्रेंड है , हमने दिल्ली के एक जाने-माने कॉलेज से एक साथ अन्डर ग्रेजुएशन की थी                " कविता" के पास पहुँचकर , जैसे ही मैने उसे आवाज लगायी।                " सृष्टि !" वो चेहरे पर आश्चर्य क्व भाव लिए खड़ी हो गयी।                 " हम्म , मैं सृष्टि , तुम यहाँ कैसे ?" मैंने पूछा।                 " अब मैं यहीं रहती हूँ दिल्ली में , वो देखो सामन...

Premi Sang Katl / प्रेमी संग कत्ल ( Story On Murder)

       दिल्ली N.C.R. स्थित गुरुग्राम के, सेक्टर 23 में बने एक अपार्टमेंट की, 15 वीं मंजिल के एक फ्लैट में, “ भैया, भैया, दरवाजा खोलो, भैया, भाभी....” 22 वर्षीय पल्लवी पिछले 15 मिनिट से कभी अपने भाई-भाभी के कमरे का दरवाजा खटखटाती, तो कभी उनके फोन पर रिंग देती, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही थी।        “अरे क्या हुआ, क्यों गला फाड़-फाड़कर चिल्ला रही है।” इतने में पल्लवी की मम्मी 55 वर्षीय तारा ने मुख्य द्वार से घर में प्रवेश करते हुए पूछा।        “मम्मी भैया-भाभी दरवाजा नहीं खोल रहे हैं।”        “पल्लवी, सुबह के 11 बज रहे हैं, घर के अधिकतर काम हो चुके हैं, मैं मंदिर से वापिस आ गयी, और ये दोनों अभी तक सोकर ही नहीं उठे ?’’ तारा ने आश्चर्यचकित भाव से पूछा        “नहीं मम्मी” पल्लवी के स्वर में चिंता झलक रही थी।         “तेरे.... तेरे पापा कहाँ है, उन्हे बताया?” तारा ने काँपती हुई आवाज में घर में ...