Kaatil Kaun / कातिल कौन (Story On Murder Mystery)
" मैं सच कह रहा हूँ इन्स्पेक्टर साहब मुझे कुछ नहीं पता, मैं बेकसूर हूँ, प्लीज आप मुझे मत मारिए।" पुलिस स्टेशन में एक अपराधी की भाँति पीटते हुए श्याम शंकर ने गुहार लगाई। "जब तेरी मालकिन की हत्या हुई उस वक्त घर पर तू ही था, और तू कह रहा है कि तुझे कुछ नहीं पता, ऐसा कैसे हो सकता है, हो ना हो मुझे तो लगता है तू ही कातिल है या फिर तू कातिल से मिला हुआ है।" ऐसा कहते हुए इन्स्पेक्टर साहब ने श्याम शंकर की पीठ पर एक और डंडा मार दिया। "आह...साहब माना कि उस घटना के समय मैं घर पर ही था, लेकिन इससे ये तो साबित नहीं हो जाता ना कि गुनाहगार मैं ही हूँ।" श्याम शंकर ने डंडा पड़ने के बाद कराहते हुए कहा। "बात तो तेरी सही है छोरे, लेकिन तुझे ये कैसे पता नहीं चला कि मारने वाला कौन था, अरे इतनी बेरहमी से मारा है तेरी मालकिन मिसेज डेविड को, थोड़ा तो चीखी-चिल्लाई होगी वो बेचारी" इन्स्पेक्टर साहब ने अपना डंडा घुमाते हुए जैसे ही पूछा श्याम शंकर की आँखों में कुछ ऐसी चमक आ गयी जैसे कि उसे कुछ याद आ गया हो। "याद आया साहब, एक बार मुझे मैडम के चीखने की आवाज आई थी।...