Chai Ki Tapri (Story On A Family)
“ हमारे जन्म से लेकर हमारी मृत्यु तक के सफ़र के दौरान हर कदम पर ज़िंदगी हमें कभी कुछ तो कभी कुछ सिखाती ही रहती है। जिसके लिए माध्यम कोई भी हो सकता है, कभी कोई हमारा अपना, तो कभी कोई पराया, या फिर वक्त जो कि अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी, बस जरूरत है तो उस सिखाए गए पाठ को समझने की, और जरूरी नहीं कि हम ज़िंदगी द्वारा सिखाए गए हर पाठ को समझे और सीखे खासकर उस वक्त जब हमें कोई बात बेहद ही सरल तरीके से समझाई जाती है, लेकिन अगर कोई बात हमें किसी हादसे के बाद या कोई कोई घटना घटित होने के बाद सीखने को मिले तो यकीनन हम उसे कभी नहीं भूलते, ऐसा सोचना मेरे हिसाब से गलत है, क्योंकि मेरा तजुर्बा ये कहता है कि कुछ इंसान ऐसे भी होते हैं जो बुरा वक्त गुजरते ही उससे मिली सीख को तुरंत भूल जाते हैं या फिर कुछ समय बाद, लेकिन ऐसा हर इंसान नहीं होता......आया कुछ समझ में शालिनी बिटिया या फिर सबकुछ सिर के ऊपर से निकल गया।“ शिव प्रसाद जी ने अपनी बहु को जीवन का सार समझाते हुए पूछा। “पापा जी...आप क्या मुझे बेवकूफ समझते हो, अरे मुझे सबकुछ समझ में आ गया, आप Life lesson के बारे में बात कर रहें हैं।“ पापा जी यान...