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Love In Train (Story In Love)

प्यार , बड़ा ही ख़ूबसूरत शब्द हैं ये , इसकी ख़ूबसूरती का अहसास केवल उसी को हो सकता हैं जो कि इस   अहसास से गुजरा हो , बाकी लोगों के लिए तो ये फ़ालतू की बकवास हैं , मेरे लिए भी ये बकवास ही थी , लेकिन रोहित से मिलने से पहले , रोहित मेरा पहला प्यार , और शायद उसका भी मैं पहला ही प्यार थी , उसने तो यही कहा था। मुंबई के एक जाने-माने कॉलेज से एम. बी , ए. की पढाई कर रही थी मैं और   दिवाली की छुट्टियों में दिल्ली अपने घर मुंबई-फ़िरोज़पुर जनता एक्सप्रेस से जा   रही थी , ट्रेन मुंबई सेंट्रल से सुबह 7. 25 पारा रवाना होती हैं , मैं बिल्कुल वक़्त पर स्टेशन पहुँच गयी , और ट्रेन के चलने से तक़रीबन दस मिनिट पहले ही उसमे जाकर बैठ गयी। जनता एक्सप्रेस मुंबई सेंट्रल से ही रवाना होती हैं , इसलिए शुरुआत में तो साफ़-सुथरी और फिर दिल्ली पहुँचते-पहुँचते गंदगी ही गंदगी नज़र आती हैं चारों ओर। अभी में अपना सामान सेट कर खिड़की के पास कानों में हैड-फोन लगा   बाहर का नज़ारा देखने के इरादे से बैठी ही थी की ,  ' हैलो , क्या मैं अपनी एक अटैची आपकी सीट के नीचे रख सकता हूँ। ' आवाज़ सुन जैसे ही मैं मुड़ी तो एक बह...