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दिसंबर, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Ek PIta Ka Faisla (Story On Girl Education)

  हर शख्स के लिए   शिक्षा का महत्त्व समझना हैं ज़रूरी हक़ नहीं ये केवल लड़कों का लड़कियाँ भी हैं हक़दार   इसकी " आरती अगले महीनें अठारह की पूरी हो जाएगी ,  अरे मैं तो कहती हूँ अभी से उसके लिए लड़के देखना शुरू कर दो।"   "माँ तुम भी कमाल करती हूँ ,  ज़माना कितना बदल गया हैं ,  और तुम अभी तक अपनी दकियानूसी बातें लेकर बैठी हुई हो ,  मैं अपनी बेटी की शादी अभी नहीं करूँगा ,  बल्कि पहले उसे पढ़ाऊँगा-लिखाऊँगा उसके बाद शादी के बारें में विचार करेंगे। "  आरती की दादी कमला की बात का विरोध करते हुए जैसे ही आरती के पापा राजेश ने अपनी बात कही ,  " तेरा तो दिमाग ख़राब हो गया हैं राजेश ,  अरे जब मेरी शादी हुई थी तब मैं कुल बारह साल की थी ,  और मेरी छोड़ो तेरी शादी में भी तेरी बीवी मीरा अठारह की ही तो थी।"   "हाँ माँ तुम जो भी कह रही हो वो सब सही हैं ,  लेकिन अब वक़्त पहले जैसा नहीं रहा ,  अब लड़कियाँ पढ़-लिखकर   नौकरी करती हैं ,  ना की   घर पर बैठी रहती हैं ,  आजकल की लड़कियाँ लड़कों के साथ कंधे से कन्धा म...

Kaisi Vidambana Hain Ye (Story On Gang-Rape)

कैसी विडम्बना हैं ये ,  क्यों सुरक्षित नहीं हैं नारी हमारे देश की कब सीखेंगे ये दरिंदे करना सम्मान ,  देश की बहु-बेटियों का    पिछले दो तीन दिनों से मेरे घर के सामने वालें घर में रहने वाली निकिता जी नज़र नहीं आ रहीं थी ,  यूँ तो हम दोनों के बीच   ऐसी कोई ख़ास बोलचाल नहीं थी ,  बस सुबह-शाम गुड़ मॉर्निंग व गुड़ इवनिंग ज़रूर हो जाया करती थी ,  इसके अलावा एक-दो बार एक दूसरे के परिवार के बारें में ज़रूर हमारी बातचीत हुई ,  इससे ज्यादा हमारा कोई रिश्ता नहीं था ,  शायद इसी वजह से निकिता जी के कुछ दिनों तक नहीं दिखाई देने से मुझे कोई फर्क ही नहीं पड़ा ,  सोचा गयी होगी कहीं किसी काम से ,  वैसे भी मुझे इतनी फुर्सत ही कहाँ थी कि लोगों के घरों में क्या हो रहा हैं इस बात की जानकारी रखूँ ,  पूरा दिन ऑफिस में और बाकी वक़्त पति और अपने दो-दो बच्चों को संभालने में बीत जाता था।    लेकिन कुछ दिनों बाद एक दिन जब मैं सुबह अखबार उठाने बाहर गयी तो क्या देखती हूँ कि निकिता जी के घर के बाहर अखबारों का ढ़ेर पड़ा हैं ,  इस ओर मेरी नज़र पहल...