Ek PIta Ka Faisla (Story On Girl Education)
हर शख्स के लिए शिक्षा का महत्त्व समझना हैं ज़रूरी हक़ नहीं ये केवल लड़कों का लड़कियाँ भी हैं हक़दार इसकी " आरती अगले महीनें अठारह की पूरी हो जाएगी , अरे मैं तो कहती हूँ अभी से उसके लिए लड़के देखना शुरू कर दो।" "माँ तुम भी कमाल करती हूँ , ज़माना कितना बदल गया हैं , और तुम अभी तक अपनी दकियानूसी बातें लेकर बैठी हुई हो , मैं अपनी बेटी की शादी अभी नहीं करूँगा , बल्कि पहले उसे पढ़ाऊँगा-लिखाऊँगा उसके बाद शादी के बारें में विचार करेंगे। " आरती की दादी कमला की बात का विरोध करते हुए जैसे ही आरती के पापा राजेश ने अपनी बात कही , " तेरा तो दिमाग ख़राब हो गया हैं राजेश , अरे जब मेरी शादी हुई थी तब मैं कुल बारह साल की थी , और मेरी छोड़ो तेरी शादी में भी तेरी बीवी मीरा अठारह की ही तो थी।" "हाँ माँ तुम जो भी कह रही हो वो सब सही हैं , लेकिन अब वक़्त पहले जैसा नहीं रहा , अब लड़कियाँ पढ़-लिखकर नौकरी करती हैं , ना की घर पर बैठी रहती हैं , आजकल की लड़कियाँ लड़कों के साथ कंधे से कन्धा म...