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Nadani (Story On Immaturity)

नादानी की हैं बच्चों ने पर ख़तावार हैं हम   अब ये ख़ता ना हो किसी से ध्यान रखना तुम " रानों ,  ओ रानों ,  ना जाने   कहाँ चली गई सुबह-सुबह ,  काकी तुमने देखा हैं कहीं रानों को ?" " अरी क्यों मज़ाक कर रहीं हैं मुझ अंधी के साथ ,  कुछ तो शर्म कर" "काकी मेरा वो मतलब नहीं था ,  मैं तो पूछ रही थी कि रानों आपके पास आयी थी क्या ?" " नहीं ,  अगर आती तो तेरे पूछने से पहले ही बता देती ,  मुझे तो लगता हैं खेत में चली गयी होगी अपने बापू के पास ,  वहीं जाकर देख ले" "अरे कहाँ काकी ,  रानों के बापू तो खुद घर पर बैठे हैं ,  रात को थोड़ा बुखार हो गया था।" "हाय राम ,  इतनी बड़ी बात और तू मुझे अब बता रही हैं ,  सही बात हैं अपने-पराए में फ़र्क तो होता ही हैं।" "बस करो काकी ,  कुछ नहीं हुआ हैं ,  अब बिल्कुल ठीक हैं वों ,  एक तो मैं रानों के लिए परेशान हो रही हूँ और तुम आलतू-फ़ालतू बातें किए जा रही हो।" ऐसा कहते ही गौरा दनदनाते हुए वहाँ से चली गई। " सुनिए जी ,  मुझे तो   कहीं भी नहीं मिल रही हैं रानों ,...

Mehak Rishton Ki (Story On Family)

रिश्तों में आ जाए दरार कितनी भी ,  रहने लगें   ख़फ़ा-ख़फ़ा   से फिर भी   आते हैं काम ये ही एक दूसरे के हक़ीक़त हैं ये ज़िन्दगी की        बच्चों की समर वेकेशन शुरू हुए तकरीबन एक हफ्ता हो चुका था ,  आफिस से छुट्टी नहीं मिल पाने की वजह से मै उनके साथ वक्त ही नहीं गुजार पा रही थी ,  वैसे   तो मेरे सास-ससुर भी साथ ही रहते हैं ,  इसलिए मुझे बच्चों की ज्यादा फिक्र नहीं करनी पड़ती ,  लेकिन पिछले चार महीनें   से उनके मेरी नन्द के पास अमेरिका जाने की वजह से पूरी तरह से बच्चों   की जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ चुकी थी ,  एक बार तो ख़्याल आया कि क्यों ना माँ के पास भेज दूँ ,  कुछ दिन बच्चें नाना-नानी के साथ रहेंगे तो उन्हें भी अच्छा लगेगा ,  और बच्चे भी खुश हो जाऐंगे। " ऐसा करतीं हूँ कल ही बच्चों को छोड़ आती हूँ ,  शनिवार हैं सो सबसे मिलना भी हो जाएगा ,  और दो दिन रुककर बच्चों को छोड़कर इतवार शाम तक वापिस आ जाऊँगी ,   वैसे भी दिल्ली से गाजियाबाद की दूरी ही कितनी हैं।" आने-जाने की सारी प्लानिंग...