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Beta - Bahu / बेटा - बहु (Story On Family)

  कुछ कदम चलने के बाद अचानक से सावी रुक गयी, और पीछे मुड़ ना जाने किसे ढूँढने लगी, “सावी क्या हुआ, किसे ढूँढ रही हो।“ मेरे पूछते ही वो पहले तो थोड़ा सकपकाई, फिर बोली, “नहीं, किसी को भी तो नहीं, तुम चलो, मैं भी आती हूँ।“ “रिदम का इंतजार कर रही हो?” “नहीं, नहीं तो” “क्यों झूठ बोल रही हो, मैं जानती हूँ, तुम्हें अभी भी उम्मीद है उसके आने की।“ मेरे  कहते ही, “अरे नहीं, वो तो बस यूँ ही, तुम चलो, मैं थोड़ा धीरे-धीरे चलूँगी, पैरों में दर्द होता है, उम्र हो गयी है ना इसलिए” सावी ने कहा और मुझसे बिना नजरें मिलाए चलने लगी। उम्र तो मेरी भी हो गयी है, फिर भी चाल में कुछ गति तो है, तुम तो जैसे सरक-सरक कर चल रही हो, अगर तुम कहो तो वापिस लौट चले, क्या मालूम इस बार रिदम......”  कहते-कहते मैं रुक गयी, क्योंकि अचानक से सावी मुझे खा जाने वाली नज़रों से घूरने लगी थी। सावी, मेरी बहन है, मेरी बड़ी बहन, मात्र एक साल का ही फ़र्क है हम दोनों में,   लेकिन कुछ लोग तो हमें जुड़वा ही समझते है, हर बात साँझा करते है हम एक दूसरे से, बेहद ही पारदर्शी है हमारा रिश्ता, शायद इसलिए मुझे उसकी तकलीफ...