Manzoor Hain (A Love Story)
' वीर हम कब तक ऐसे छुप-छुपकर मिलते रहेंगे , तुम अपने घरवालों से हमारे बारे में बात क्यों नहीं करते। ' ' कोई फ़ायदा नहीं होगा बात करने का रिया , वो लोग कहेंगे पहले कुछ कमाना शुरू करो फिर शादी के बारे में सोचना , इसलिए कह रहा हूँ थोड़ा सब्र करो , मैंने दो-चार कम्पनियों में अप्लाई कर रखा हैं कहीं तो बात बन ही जायेगी।" " आई विश , तुम्हारी जल्द ही कहीं नौकरी लग जाए , जानते हो इसी वजह से मैं अपने मम्मी-पापा को भी तुम्हारे बारे में नहीं बता पा रही हूँ।" " जानता हूँ रिया , तुम फ़िक्र मत करो मेरी कोशिश ज़ारी हैं , सब अच्छा ही होगा।" वीर के कहते ही , ' पता नहीं अच्छा होगा या बुरा ' ' तुम ये नेगेटिव बाते क्यों कर रही हो , कुछ हुआ हैं क्या ?' ' हाँ कल रात पापा-मम्मी बात कर रहे थे , मम्मी कह रही थी की हमें अब रिया के लिए लड़के देखने शुरू कर देने चाहिए , और मम्मी की इस बात से पापा भी सहमत थे। ' कहते-कहते रिया उदास हो गयी। ' तुम उदास मत हो रिया , ये कोई एक-दो दिन का काम नहीं हैं , अगर तुम्हारे पापा-मम्मी ने लड़के देखना...