संदेश

अक्टूबर, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Mard Ki Vyatha

शाम को ऑफ़िस से पार्थ के लौटते ही , " पार्थ समझा लो अपनी माँ को मैं रोज-रोज उनकी चिक-चिक बर्दाश्त नहीं कर सकती।" "अब आज क्या हो गया ?" " अरे एक बात हो तो बताऊँ ना , कभी उन्हे मेरे आराम करने से एतराज़ हैं , तो कभी टी.वी. देखने से" "मानसी , पहले तुम घर के काम खत्म कर लिया करो , उसके बाद तुम्हारा मन करे जो करो , माँ कुछ नही कहेगी।" "आपको क्या लगता हैं , मैं काम अधूरे छोड़ कर आराम करती हूँ।" "मेरा वो मतलब नहीं था।" "आपका क्या मतलब हैं मैं अच्छी तरह से समझती हूँ , यही कहना चाहते हैं ना आप कि आपकी माँ सही हैं और मैं गलत" "मानसी , मैं ऑफ़िस से थका-हारा आया हूँ , कम से कम एक गिलास पानी के लिए तो पूछ लो।" और मानसी गुस्से से रसोई की ओर चली गई। " आ गया बेटा ऑफ़िस से ?" इतने में ही पार्थ की माँ रमा वहाँ आ गयी  " हाँ माँ" "क्या बात हैं , बहुत थका हुआ लग रहा है , ऑफ़िस में काम ज्यादा था क्या ?" " हाँ माँ , आजकल काम कुछ ज्यादा रहने लगा हैं।" "चाय पियेगा ...

Adhura Pyar (A Sad Love Story))

ख़बर नहीं थी कि इस शिद्दत से प्यार निभाओगे तुम कितना भी समझाऊँ अपने दिल को याद आओगे तुम   प्यार एक ऐसा खूबसूरत एहसास हैं , जिसे वो ही महसूस कर सकता हैं जिसने कभी प्यार किया हो , या फिर वो जो प्यार में हो , यह गरीबी-अमीरी , जात-पात किसी में भी भेद-भाव नहीं करता , बल्कि इसको तो कुछ सुनाई भी नहीं देता सिवाय दिल की आवाज़ के , लेकिन अफ़सोस खुद को साबित करने के लिए इस खूबसूरत एहसास को ना जाने कितने ही इम्तिहानों से गुज़रना पड़ता हैं , ऐसी ही एक प्रेम-कहानी मैं आपके साथ बाँटना चाहती हूँ। यह कहानी एक छोटे से शहर में रहने वाली लड़की अंजलि की हैं , अंजलि के माता-पिता बहुत ही गरीब थे , उसके पिता रिक्शा चला कर एवं माँ किसी बँगले पर काम कर घर का गुज़ारा चलाते थे , घर में अंजलि के सिवा उसकी चार बहनें और थी , दो बड़ी बहनों की शादी हो चुकी थी , अंजलि तीसरे नम्बर की थी , अंजलि और उससे छोटी दो बहनें अभी पढ़ रही थी। जिस समाज में अंजलि और उसका परिवार रहता था वहाँ लड़कियों को ज्यादा नहीं पढ़ाया जाता था , इसका एक कारण यह भी था कि उनके पास इतना पैसा नहीं होता था कि वो अपने बच्चों को पढ़ा सके। फिर भी अंजलि...