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जून, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Pakshpaat (Story On Family)

   शालिनी की शादी को अभी छ: महीनें ही गुज़रे थे कि उसके देवर का रिश्ता भी पक्का हो गया ,  घर के सभी लोग बहुत खुश थे ,  अभी एक बहु आयी हैं कुछ महीनों में दूसरी बहु भी आ जाएगी ,  यह सोच-सोचकर शालिनी की सास रुक्मणि ख़ुशी से फूली नहीं समा रही थी। लेकिन वो खुश इस वजह से ज्यादा थी कि जो दूसरी बहु आने वाली हैं वो एक अमीर परिवार से हैं ,  और रुक्मणि की उम्मीद के मुताबिक़ वो अपने साथ दहेज़ भी खूब लाएगी। लेकिन रुक्मणि ने अपने मन में आए इस कुटिल विचार को किसी के भी सामने उजागर नहीं होने दिया।      " सुनिए जी ,  अब तो मैं ठाट से बैठकर हुकुम चलाऊँगी ,  दो-दो बहुएँ जो आ   जायेंगी घर में" रुक्मणि ने अपने पति अरुण से जब अपनी ख़ुशी बाँटी तो ,   " हाँ भई ,  किस्मत वाली हो ,  मुझे तो दुकान जाना ही पड़ेगा ,  और वहाँ काम भी करना पड़ेगा।"     " तो मत करिए काम ,  आप भी घर बैठकर अपनी बहुओं से सेवा करवाइए ,  और दुकान अपने बेटों के हवाले कर दीजिए।"    " हाँ विचार तो अच्छा हैं तुम्हारा ,  लेकिन घर बैठ गया ...

Ishq Mein khoon (Story On A Murder mystery)

  " मैं एक बार फिर से पूछ रहा हूँ ,  क्या किसी ने मिसेज़ दीक्षित के यहाँ किसी को आते हुए देखा। "   " नहीं इंस्पेक्टर साहब ,  अगर देखा होता तो आपसे क्यों छुपाते।"   " तुम्हारी तारीफ़ ?"   " साहब जी मैं   पिछले दो साल से मिसेज़ दीक्षित के घर के बाहर अपने फलों का ठेला लगा रहा   हूँ , कैलाश नाम हैं मेरा। "   " ऐसा कैसे हो सकता हैं ,  कि मिसेज़ दीक्षित के यहाँ कोई आया ही नहीं फिर भी उनका क़त्ल हो गया ,  मुझे तो लगता हैं तुम हमसे कुछ छुपा रहे हो" इंस्पेक्टर साहब ने जैसे ही कैलाश   की ओर मुख़ातिब होते हुए कहा।   " नहीं साहब ,  ऐसा मत बोलिए ,  माँ जी तो मेरी माँ जैसी थी ,  मुझे उनके जाने का बहुत दुःख हैं ,  और मैं तो उनका बुरा सोच ही नहीं सकता ,  उन्होंने मेरे बुरे वक़्त में बहुत सहायता की हैं।"   " सहायता ?  कैसी सहायता"   " साहब ,  पिछले साल मेरी बीवी कैंसर की वजह से अस्पताल में भर्ती हुई थी ,  पैसे की कमी की वजह से मेरे लिए उसका इलाज करवाना मुश्किल हो रहा था ,  जब...