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अप्रैल, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Doctor Ek Masiha (Story On Orphans)

🙏🙏 इंसा नहीं तू हैं एक मसीहा गर तू ना होता तो ना होते हम 🙏🙏   अपनी माँ उमा के चेहरे पर पड़ती सूरज की किरणे देख नीतू को अहसास हुआ कि वो पूरी रात से उमा के सिरहाने  बैठी उसके माथे पर ठंडे पानी की पट्टियाँ ही चढ़ाती रही , लेकिन बुख़ार था कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। डॉक्टर से दवाई भी दिलवाई , लेकिन कोई फ़र्क ही नहीं पड़ा। घरो में खाना बनाने का काम करने वाली उमा पिछले एक हफ्ते से बीमार थी और उसकी यही हालत नीतू के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी। ऊपर से तीन छोटे भाई-बहनों का ध्यान रखना। जब से उमा ने बिस्तर पकड़ा हैं कमाई का कोई ठिकाना ही नहीं रहा और खर्चे हैं कि रुकते ही नहीं। दो साल पहले उमा के पति जगदीश की ज़हरीली शराब पीने की वजह से हुए मौत के बाद पूरे परिवार पर ऐसी मुसीबतें आयी कि थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं। "माँ कुछ खा लो फिर दवाई भी लेनी हैं।" नीतू के कहते ही , "पूरी रात हो गयी तुझे मेरे पास बैठे हुए , जा कुछ देर आराम कर ले।" उमा के स्वर में कमज़ोरी साफ झलक रही थी। "माँ तुम मेरी चिंता मत करो , मैं ठीक हूँ , सोच रही थी कि जिन-जिन घरों में तुम...

Bhaskar Bechara (A funny Story)

  यह तो मैं थी कोई ओर सी होती तो तुम्हें पता चल जाता   "सुनती हो जी , आज अपनी शादी को बीस साल हो गए , यक़ीन ही नहीं कर पा रहा हूँ , कि मैं पिछले बीस सालों से तुम्हारी डाँट खा रहा हूँ"। भास्कर के कहते ही , "ज़ुबान संभाल कर बात करो , यह तो मैं थी , कोई ओर सी होती तो तुम्हें पता चल जाता , अरे कितना सहन करती हूँ , तुम्हे पता भी हैं , सुबह से रसोई में लगी रहती हूँ , उसके बाद भी तुम्हारी माँ की चिकचिक ख़त्म ही नहीं होती"।  "भाग्यवान आज तो मीठा बोल लो , और कम से कम आज तो मेरी माँ को बख़्श दो , चलो बैठो दो बातें प्यार भरी करे , आज तो तुम्हारे मुँह से दो मीठे बोल सुन लूँ"। "देखो जी फ़ालतू बातों के लिए मेरे पास वक़्त नहीं हैं , यह लो थैला और बाजार से सब्जी , आटा और चावल ले आओ , और हाँ आज कामवाली भी नहीं आएगी , तो वापिस आकर  घर की साफ़-सफाई  भी करनी हैं।“ भास्कर उदास मन से बाजार के लिए निकल गया , और सोचने लगा कि कैसी अज़ब हैं ये लीला जब तक शादी ना करो घर वाले चैन नहीं लेने देते , शादी करो तो बीवी चैन नहीं लेने देती , शाम को घर लौट कर आओ तो बीवी की शिकायतो...