Doctor Ek Masiha (Story On Orphans)
🙏🙏 इंसा नहीं तू हैं एक मसीहा गर तू ना होता तो ना होते हम 🙏🙏 अपनी माँ उमा के चेहरे पर पड़ती सूरज की किरणे देख नीतू को अहसास हुआ कि वो पूरी रात से उमा के सिरहाने बैठी उसके माथे पर ठंडे पानी की पट्टियाँ ही चढ़ाती रही , लेकिन बुख़ार था कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। डॉक्टर से दवाई भी दिलवाई , लेकिन कोई फ़र्क ही नहीं पड़ा। घरो में खाना बनाने का काम करने वाली उमा पिछले एक हफ्ते से बीमार थी और उसकी यही हालत नीतू के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी। ऊपर से तीन छोटे भाई-बहनों का ध्यान रखना। जब से उमा ने बिस्तर पकड़ा हैं कमाई का कोई ठिकाना ही नहीं रहा और खर्चे हैं कि रुकते ही नहीं। दो साल पहले उमा के पति जगदीश की ज़हरीली शराब पीने की वजह से हुए मौत के बाद पूरे परिवार पर ऐसी मुसीबतें आयी कि थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं। "माँ कुछ खा लो फिर दवाई भी लेनी हैं।" नीतू के कहते ही , "पूरी रात हो गयी तुझे मेरे पास बैठे हुए , जा कुछ देर आराम कर ले।" उमा के स्वर में कमज़ोरी साफ झलक रही थी। "माँ तुम मेरी चिंता मत करो , मैं ठीक हूँ , सोच रही थी कि जिन-जिन घरों में तुम...