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जुलाई, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Bahu Ka Dard (Story On Family)

  इतवार की छुट्टी होने की वजह से आज मेरा पूरा परिवार घर पर ही है, एक तरफ पतिदेव अक्षत और ससुरजी की दुकान की छुट्टी है, तो दूसरी तरफ मेरे बेटे रिशु के स्कूल की, सासूजी और मैं तो घर पर ही रहते हैं। हाँ कभी-कभार इतवार को अनिका दीदी जरूर सपरिवार आ जाया करती हैं, और आज भी आने का प्रोग्राम है, अनिका दीदी, यानि की अक्षत की बहन। अब जब घर में इतनी धूमधाम हो तो ज़ाहिर-सी बात है काम भी ज्यादा ही होगा, और अगर काम ज्यादा है तो सच में मेरी वाट लगने वाली है, क्योंकि ना तो मेरी सासूजी मदद करवाने वाली है, न ही नन्दजी, और घर के मर्द मेरी किसी भी काम में मदद करवायेंगे ये तो मैं सोच भी नही सकती। "गुँजन, अरी गुँजन, देख तो कौन आया है।" "आई माँ......आप लोगों से मैं बाद में बात करती हूँ, फिलहाल मेरी सासूमाँ मुझे पुकार रहीं है......जी माँ" "देख तो, भैया आए हैं।" "अरे मामाजी आप, आज इतने दिनों बाद" मेरे पूछते ही, "हाँ बेटा, मेरठ किसी काम से आया था तो सोचा तुम सब लोगों से भी मिलता लूँ।" "ये तो तूने बहुत अच्छा किया, लेकिन अकेला क्यों आया है, सुधा और...

Koi Samajhata Kyo Nahi (Story On LGBTQ)

“ अनुराग , अनुराग” दरवाज़े पर खड़ा तन्मय लगातार आवाज़ें लगाए जा रहा था। “ क्या है , क्यों अपना गला फाड़ रहा है।” हाल ही में नींद से उठे अनुराग ने दरवाज़े के पास आ झल्लाते हुए जैसे ही पूछा। “ ये क्या , तू अभी तक तैयार नहीं हुआ , कॉलेज नहीं चलना है क्या ?” तन्मय ने सवालिया नज़रों से अनुराग की ओर देखते हुए पूछा। “ अभी से! तू टाइम से दो घंटे पहले ही कॉलेज जाकर क्या करेगा , वहाँ की साफ-सफ़ाई ?” अनुराग ने तन्मय का मज़ाक़ उड़ाते हुए जैसे ही कहा। “ दो घंटे पहले! तेरे घर की घड़ी बंद हो गयी है क्या ? तन्मय के कहते ही अनुराग अंदर की ओर भागा और जैसे ही उसने घर के अंदर टँगी दीवार घड़ी पर नज़र डाली तो पता चला की उसकी हाथ घड़ी तो बंद पड़ी है , और मोबाइल की साँसें भी ना ज़ाने कब रुक गयी , नतीजन अलार्म भी नहीं बजा। “ तन्मय तू चल मैं जल्द से जल्द आने की कोशिश करता हूँ।” ऐसा कह अनुराग रसोई की ओर भागा। “ मम्मी , आपने मुझे उठाया क्यों नहीं , आपकी वजह से मुझे आज देर हो गयी।” अनुराग ने देर हो जाने की लिए पूरी तरह से अपनी माँ प्रेरणा को को दोषी ठहरा दिया “ मेरी वजह से!” प्रेरणा ने घूरते हुए पूछा...