Bahu Ka Dard (Story On Family)
इतवार की छुट्टी होने की वजह से आज मेरा पूरा परिवार घर पर ही है, एक तरफ पतिदेव अक्षत और ससुरजी की दुकान की छुट्टी है, तो दूसरी तरफ मेरे बेटे रिशु के स्कूल की, सासूजी और मैं तो घर पर ही रहते हैं। हाँ कभी-कभार इतवार को अनिका दीदी जरूर सपरिवार आ जाया करती हैं, और आज भी आने का प्रोग्राम है, अनिका दीदी, यानि की अक्षत की बहन। अब जब घर में इतनी धूमधाम हो तो ज़ाहिर-सी बात है काम भी ज्यादा ही होगा, और अगर काम ज्यादा है तो सच में मेरी वाट लगने वाली है, क्योंकि ना तो मेरी सासूजी मदद करवाने वाली है, न ही नन्दजी, और घर के मर्द मेरी किसी भी काम में मदद करवायेंगे ये तो मैं सोच भी नही सकती। "गुँजन, अरी गुँजन, देख तो कौन आया है।" "आई माँ......आप लोगों से मैं बाद में बात करती हूँ, फिलहाल मेरी सासूमाँ मुझे पुकार रहीं है......जी माँ" "देख तो, भैया आए हैं।" "अरे मामाजी आप, आज इतने दिनों बाद" मेरे पूछते ही, "हाँ बेटा, मेरठ किसी काम से आया था तो सोचा तुम सब लोगों से भी मिलता लूँ।" "ये तो तूने बहुत अच्छा किया, लेकिन अकेला क्यों आया है, सुधा और...