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Naukrani (Story On Servant)

हमने तो कर विश्वास , सौंपा था तुझे जिगर का टुकड़ा फिर भी क्यों बेरहम तूने , दे दिया हमें दर्द इतना   सुबह उठ कर तैयार होना , नाश्ता बनाना , घर की साफ़-सफाई और छ: महीने की जूही के भी तो सारे काम करने पड़ते थे सोनिया को , इसके अलावा ऑफिस जाते वक़्त जूही को क्रेच में छोड़ना और घर आते वक़्त साथ लेकर आना , पूरा दिन कैसे भागमभाग में गुज़र जाता पता ही नहीं चलता था , मनीष भी तो समय नहीं निकाल पाता था , सुबह जल्दी ऑफिस के लिए निकलना और शाम को आते हुए अक्सर नौ-साढ़े नौ बज जाया करते थे , शरीर में इतनी ताक़त भी नहीं बचती थी कि दो पल बैठकर जूही के साथ खेल ले , सोनिया भी उससे ज्यादा कुछ नहीं कहती थी , अगर कोई मज़बूरी हो तभी मदद माँगती थी , लेकिन ऐसा कब तक चलता इसलिए सोनिया ने सोचा क्यों ना एक नौकरानी रख ले जो कि घर के सारे काम भी करेंगी और दिन में जूही की देखभाल भी , यही बात सोच उसने अख़बार में इश्तहार दे दिया।      कुछ दिनों बाद... " सोनिया , देखो तुमसे कोई मिलने आया हैं" ऑफिस के लिए निकलते वक़्त मनीष ने आवाज़ लगाकर कहा , " क्या काम हैं ?" गोद में जूही को लिए सोनिया ने सामन...