Do Roop (Story On Fraud)
ट्रिनन्न , " आशा देखना ज़रा दरवाज़े पर कौन हैं , बाहर इतनी तेज़ बारिश हो रही हैं , कौन हो सकता हैं इस वक़्त" शिवानी खुद से ही बात करती हुई आशा के पीछे-पीछे चल दी। "जी कहिये , किससे मिलना हैं |" शिवानी ने दरवाज़े पर खड़ी महिला का ऊपर से नीचे तक मुआयना करते हुए पूछा | " माफ़ कीजिए इस वक़्त बहुत तेज़ बारिश हो रही हैं , और मेरे पास छाता भी नहीं हैं , क्या मैं आपके घर के बाहर बने इस शेड़ के नीचे कुछ देर के लिए रूक सकती हूँ।" " जी ज़रूर" शिवानी के कहते ही , " धन्यवाद" " पता नहीं कौन हैं , जो इस बारिश में फँस गयी , ख़ैर कोई बात नहीं आशा ऐसा कर एक कप मसालेदार चाय बना दे उस महिला के लिए" " लेकिन भाभी , हम तो उसे जानते भी नहीं हैं।" " हाँ तो क्या हुआ मैं तो इंसानियत के नाते चाय देने के लिए कह रही हूँ |" " जी भाभी" और कुछ देर बाद जब आशा चाय लेकर बाहर गयी तो वो महिला नदारद थी।" " भाभी वो तो नहीं हैं।" " लेकिन इतनी तेज़ बारिश में कहाँ चली गयी , चल कोई बात नहीं अब ये चाय...