Baarish Ki Boondein ( Story On One Sided Love)
बारिश की बूँदें धरा पे गिरते ही माटी की सोंधी-सोंधी महक मेरे मन को प्रफुल्लित कर रही थी , जी चाह रहा था कि ये बारिश यूँ ही होती रहे और मैं इन गिरती हुई बूँदों को यूँ ही निहारती रहूँ। वैसे तो ये बारिश का मौसम मुझे तीन साल पहले तक बिल्कुल भी पसंद नहीं था , बारिश से होने वाली सड़को पर गंदगी , कीचड़ बस यही सबकुछ था जिससे की मुझे बारिश बिल्कुल भी पसंद नहीं थी , फिर जब मेरी ज़िन्दगी में कार्तिक आया तो ये बारिश , ये सुहावना मौसम , सब अच्छा लगने लगा। कार्तिक , मेरा पहला प्यार , अब क्या कहूँ उसके बारें में , पहली ही नज़र में प्यार हो गया था मुझे उससे , मेरी उससे पहली मुलाक़ात मेरी फ्रेंड दामिनी की शादी में हुई थी , दूल्हे का दोस्त था वो , जब बारात दरवाज़े पर थी उस वक़्त मैंने उसे पहली बार बारातियों के साथ नाचते हुए देखा , बस उसी पल दिल दे बैठी थी मैं उसे , और मैं ही क्या कोई ओर भी होता तो उससे यकीनन इश्क़ कर बैठता , और शायद कर भी बैठा हो , लम्बा कद तक़रीबन पाँच फुट दस इंच , श्यामल वर्ण , तीख...