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मार्च, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Child And Screen / चाइल्ड एण्ड स्क्रीन ( Story On Screen Time)

             "दादी, अपना मोबाईल दो ना मुझे।" 5 वर्षीय रेहान ने घर की बालकनी में बैठी अपनी दादी 55 वर्षीय सुधा से कहा ।              "क्यों दूँ मैं तुझे अपना मोबाईल?" सुधा ने रेहान की ओर आँखें दिखाते हुए पूछा।              "दादी प्लीज, मुझे गेम खेलना है।" रेहान ने जिद करने के अंदाज में कहा।             "ऐसी बात है तो जा अपनी माँ के फोन पर खेलना, जब वो स्कूल से वापिस आ जाए, मैं नहीं दूँगी अपना फोन" रेहान की माँ रचना पास ही एक प्राइमेरी स्कूल में टीचर है।                "दादी प्लीज"                "नहीं"                 और इसी प्रकार फोन को लेकर अगले काफी देर तक दादी-पोते में बहस होती रही, लेकिन दोनों ही अपनी-अपनी बात से टस से मस नहीं हुए, फिर अंत में सुधा को ही अपनी जिद छोड़नी पड़ी, और अपना मोबाईल रेहान के सुपुर्दग करना पड़ा,...

O.T.P. / ओ. टी. पी. (Story On Cyber Crime)

       मुंबई के कांदिवली इलाके में स्थित एक अपार्टमेंट की पाँचवी मंजिल के एक फ्लैट में रहने वाली मिसेज दीवान के घर पर उनकी ही बिल्डिंग में रहने वाली महिलाओं की किट्टी पार्टी चल रही है, सभी महिलायें सजधज कर आयी हैं, क्योंकि ये ही तो वो स्थान है जहाँ महिलाओं द्वारा अपनी साड़ी, सूट एवं जेवरों का प्रदर्शन किया जा सकता है, और इसी प्रदर्शन का दौर उस पार्टी में अभी शुरू हुआ ही था कि “ अरे वाह मिसेज दीवान, क्या बात है, आपका ये सेट तो जँच रहा है आप पर ” पार्टी में आयी मिसेज खन्ना ने पार्टी की मेजबानी कर रही मिसेज दीवान से कहा।       “बिल्कुल, जँचेगा तो सही ना, मेरा बेटा जो लेकर आया है।” मिसेज दीवान ने गले में पड़े सेट को सहलाते हुए घमंड से कहा।     “बड़ी किस्मत वाली है आप मिसेज दीवान, जो ऐसा होनहार बेटा है आपका” इसी दौरान पार्टी में आयी एक अन्य महिला मिसेज रावत बोली।      “सच कहा आपने मिसेज रावत......वैसे कीमत क्या होगी इस सेट की मिसेज दीवान” इतने में मिसेज खन्ना ने पूछा।       “इसका अंदाजा ...

Rimjhim Ke Papa Ki Shaadi / रिमझिम के पापा की शादी ( Story On Family)

     “ रिमझिम, नाश्ता तैयार है, आ जाओ डाइनिंग टेबल पर” लगभग 38 वर्षीय गौरव के आवाज लगाते ही,     “आ गयी पापा” एक 10 वर्षीय गोरा रंग, पतली-दुबली, कँधे तक कटे बाल वाली लड़की मुस्कुराते हुए गौरव के सामने आ खड़ी हुई।       “अरे वाह आज तो तुम एक ही आवाज में आ गयी।”     “बिल्कुल, क्योंकि आज मेरी पसंद का नाश्ता जो बना है, आलू के पराँठे”     “कभी-कभार नापसंद नाश्ता करने में भी कोई हर्ज नहीं है, रिमझिम बेटा”     “वो सब बातें बाद में पापा, फिलहाल आप मुझे नाश्ता करने दो, नहीं तो स्कूल जाने में देर हो जाएगी।”     ये गुफ़्तगू इंदौर स्थित एक जानी-मानी कॉलोनी के एक घर के डाइनिंग एरिया में उस घर में रहने वाले पिता गौरव, और बेटी रिमझिम के बीच हो रही थी। गौरव, और रिमझिम बस ये दोनों ही रहते थे उस घर में, क्योंकि रिमझिम की माँ राशिका का देहांत तो उसे जन्म देने कि दौरान लेबर-रूम में ही हो गया था, नियति ने कुछ ऐसा खेल खेला कि ना माँ अपनी बेटी का चेहरा देख पायी, और ना ही बेटी माँ के गले लग पा...