Bhai-Bahan Sa Pyaar (story On Children)
इन नन्हे-नन्हे बच्चों की बातें , कुछ ऐसा जाती हैं सिखा जो नहीं पाते हम सोच , कह जाती हैं उनकी जुबां मैं सुबह रसोई में नाश्ते की तैयारी कर ही रही थी कि अचानक से दरवाज़े की घंटी बजी , खोलकर देखा तो सामने एक महिला फटे व मैले कपड़े पहनें , तक़रीबन तीन या चार साल की बच्ची को लेकर खड़ी थी , देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे इन दोनों ने कई दिनों से कुछ खाया ही नहीं हैं। " हाँ बोलिए , क्या काम हैं" मैंने उस महिला से पूछा , " मेरा नाम ज्योति हैं , मुझे गॉर्ड साहब ने भेजा हैं , कहा कि आपको एक कामवाली बाई की ज़रुरत हैं।" उस महिला की बात सुन मैंने एक बार उसको ऊपर से नीचे तक ध्यान से देखा , और फिर , " तुम काम करोगी ?" " जी" "इस बिल्डिंग में और किसके यहाँ काम करती हो ?" " किसी के यहाँ भी नहीं" "मतलब …..!" " जी काम की तलाश में पहली बार निकली हूँ , नीचे गॉर्ड ने बताया कि आपको काम करवाना हैं , क्या-क्या काम करना होगा मेमसाब ?" " अभी रुको , कल आना फिर बात करेंगे।" मैंने उसे टालने के लिए क...