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जून, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ladki Hui Hai (Story On Family)

अनोखी-सी ना जाने किसने हैं ये रीत बनाई बेटी की पीर समझ आई बहु की ना आई   यह बात लगभग तीस साल पुरानी हैं , मध्य-प्रदेश के एक छोटे से गाँव में रहने वाले निहाल सिंह के घर में उस वक़्त मातम छा गया , जब नर्स ने लेबर-रूम से बाहर निकल निहाल सिंह की बड़ी बहु के बेटी पैदा होने की बात कही। "हे राम मेरी तो मति ही मारी गयी थी जो अपने बेटे की शादी इस मनहूस के संग की , मैं तो इंतज़ार कर रही थी कि मेरा पोता आएगा , जी भर कर लाड लड़ाऊँगी उसके संग , आखिरकार हमारे ख़ानदान का वारिस होगा वो , लेकिन मेरी तो क़िस्मत ही ख़राब हैं।" "धीरज से काम लो होनी को कौन टाल सकता हैं , इस बार लड़की हुई तो क्या अगला लड़का ही होगा।" निहाल सिंह ने उदास होते हुए कहा।   " वो सब तो ठीक हैं जी , इस पीढ़ी की पहली लड़की हुई हैं , अपशगुन तो हो ही गया ना “ "बस करो माँ , इंसानियत के नाते कम से कम एक बार तो अपनी बहु की ख़ैरियत पूछ लो" "अरे क्या ख़ैरियत पूछू उसकी , वो तो अच्छी ही होगी पूरे सात महीने  तक खूब काजू , बादाम खिलाए हैं उसे , इतनी ही चिन्ता हो रही हैं तो तू ही ख़ैर-ख़बर ले अपनी बीवी की...

Bahu Ki Samjhdaari (Story On Family)

बेवजह तुम अपनों से करो ना तकरार मुश्किल से मिलता हैं अपनों का प्यार    अभी धरमसिंह का देहान्त हुए एक महीना भी नहीं बीता हैं कि घर में ज़मीन के बँटवारे को लेकर झगड़े शुरु हो गए हैं , एक-दूसरे को अपनी जान से भी ज्यादा चाहने वाले धरमसिंह के बेटे कुशल और दर्शन अब एक-दूसरे के दुश्मन हो चुके हैं। इस झगड़े के चलते दोनों ने इतना भी नहीं सोचा कि उनकी माँ पर क्या बीतेगी , वैसे तो धरमसिंह ने वसीयत में अपनी पूरी ज़मीन ज़ायदाद का मालिक अपनी पत्नी गायत्री को घोषित किया हुआ हैं , लेकिन इस बात की दोनों भाईयों के लिए कोई अहमियत नहीं हैं , उन्हें तो बस अपने हिस्से से मतलब हैं। "अरे कुछ तो शर्म करो तुम दोनों , मुझे कुछ नहीं चाहिए , सबकुछ तुम दोनों ही ले लो बस ये जानवरों की तरह से लड़ना बंद करो।" "माँ तुम बीच में मत बोलो , यह सारी गलती पिताजी की हैं कि उन्होंने सबकुछ तुम्हारे नाम कर दिया , अब इस ज़मीन पर अपना हक़ जताने के लिए ना जाने कितना वक़्त और लगेगा।" कुशल के कहते ही , "क्या , क्या कहा तूने , तुझे मेरे मरने का इंतज़ार हैं कुशल ? " "माँ तुम गलत समझ रही हो।...