Teri Yaadon Ka Sahara (A sad Love Story)
सोचता था कि इश्क़ हैं तू सिर्फ मेरा इल्म ही नहीं हुआ कि खुदा भी हैं कतार में एकाएक ही तेज़ हवा के झोंके से जैसे ही टेबल पर रखी तस्वीर ज़मीन पर गिरी ऋषि चौंक गया , अभी वो कुछ समझ पाता इससे पहले ही उसकी बाई संतोष ने वो तस्वीर वापिस से टेबल पर रख दी , " क्या हुआ तस्वीर टूटी तो नहीं ना ?" ऋषि की आवाज़ में चिन्ता झलक रही थी। " नहीं भैया ठीक हैं , खाना लगा दूँ आपका ?" " नहीं रहने दो , अभी भूख नहीं हैं , तुम जाओ अगर ज़रुरत होगी तो मैं खुद ले लूँगा।" और ऋषि आँखे मूँदकर वहीं कुर्सी पर बैठा रहा , संतोष भी बिना किसी काम वहाँ रुक कर क्या करती , वो भी शाम को दुबारा आने का बोल वापिस अपने घर चली। यूँ गुमसुम और उदास ऋषि हमेशा से ऐसा नहीं था , वो तो बहुत ही नटखट और हमेशा दूसरों को परेशान करने वाला था , कभी-कभी तो हालात ऐसे हो जाते थे कि उसकी माँ को उसे कमरे तक में बंद करना पड़ता , लेकिन उसके ऊपर कोई असर ही नहीं होता , बढ़ती उम्र के साथ ऋषि की नटखटता कम त...