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Planning Murder Ki (Story On Extra-Marital Affairs)

दिल्ली से तक़रीबन 40 किलोमीटर की दूरी पर बसे गुरुग्राम के एक सुनसान इलाके में राहुल और शिवानी अपनी प्यार भरी बातों में मशगूल थे , " राहुल हम कब तक यूँ छुप-छुपकर मिलते रहेंगे , तुम कुछ करते क्यों नहीं" शिवानी ने राहुल के कंधे पर अपना सिर रख उसके हाथ को अपने हाथ में लेते हुए जैसे ही कहा ,  ' मैं क्या कर सकता हूँ , जो कुछ करना हैं तुम्हे करना हैं , क्योंकि हमारे एक होने में सबसे बड़ी अड़चन तुम्हारा पति कुशल ही तो हैं।"   " तुम्हारी बीवी रक्षा अड़चन नहीं हैं क्या ?"  " नहीं , वो बेचारी तो बहुत भोली हैं , मेरी हर बात का विश्वास कर लेती हैं , उसे तो मैं हर वक़्त बेवकूफ बनाता रहता हूँ और वो बनती रहती हैं।" राहुल ने कुटिल हँसी हँसते हुए कहा और इस हँसी में शिवानी ने भी उसका बख़ूबी साथ निभाया।   " राहुल तुम तो अपनी बीवी की तरफ़ से निश्चिंत हो लेकिन मैं अपने पति का क्या करूँ , कैसे हटाऊँ उसे अपने रास्ते से , वो तो मेरी हर बात पर नज़र रखता हैं , ये तो मैं ही जानती हूँ की तुमसे कैसे मिलने आती हूँ उससे छुपकर"   " शिवानी तुम उसका मर्डर कर दो , सारी मुसीबत...

Bure Karam (Story On Elder Abuse)

" साहिल बेटा देखना तो ज़रा मेरा मोबाइल , पता नहीं क्यों बार-बार स्विच-ऑफ हो जाता हैं।" गायत्री एकाएक ही अपने पोते साहिल के सामने उस समय   आकर खड़ी हो गयी जब वो अपने लैपटॉप पर कोई ज़रूरी काम कर रहा थ।   " दादी , इस वक़्त मेरे पास   बिल्कुल भी टाइम नहीं हैं , बाद में देख लूँगा।"   " हाँ , कोई बात नहीं बेटा , तू अपना काम कर , ऐसा करती हूँ नम्रता को दिखाती हूँ , शायद वो ठीक कर दे।"   " हाँ दिखा लो मम्मी को" ऐसा कह साहिल अपने लैपटॉप पर काम करने लगा।   " नम्रता बहु , बेटा देखना तो ज़रा मेरा फोन , ये बार......"   " मम्मी जी प्लीज , ये फ़ालतू की चीज़ें देखने का टाइम नहीं हैं मेरे पास , घर के सारे काम खत्म करके मुझे ऑफिस के लिए भी निकलना हैं।"   " सॉरी , सॉरी बहु , तुम अपना काम करो , मैं बाद में दिखा लूँगी अपना फोन" ऐसा कह गायत्री   अपने कमरें की ओर जाने लगी।   " क्या हुआ मम्मी , कुछ परेशान नज़र आ रही हो।"   " अशोक , नहीं बेटा मैं ठीक हूँ , नाश्ता कर लिया तूने ?"  " हाँ मम्मी , बस ऑफिस के लिए निकल ही रहा हूँ ...