Planning Murder Ki (Story On Extra-Marital Affairs)
दिल्ली से तक़रीबन 40 किलोमीटर की दूरी पर बसे गुरुग्राम के एक सुनसान इलाके में राहुल और शिवानी अपनी प्यार भरी बातों में मशगूल थे , " राहुल हम कब तक यूँ छुप-छुपकर मिलते रहेंगे , तुम कुछ करते क्यों नहीं" शिवानी ने राहुल के कंधे पर अपना सिर रख उसके हाथ को अपने हाथ में लेते हुए जैसे ही कहा , ' मैं क्या कर सकता हूँ , जो कुछ करना हैं तुम्हे करना हैं , क्योंकि हमारे एक होने में सबसे बड़ी अड़चन तुम्हारा पति कुशल ही तो हैं।" " तुम्हारी बीवी रक्षा अड़चन नहीं हैं क्या ?" " नहीं , वो बेचारी तो बहुत भोली हैं , मेरी हर बात का विश्वास कर लेती हैं , उसे तो मैं हर वक़्त बेवकूफ बनाता रहता हूँ और वो बनती रहती हैं।" राहुल ने कुटिल हँसी हँसते हुए कहा और इस हँसी में शिवानी ने भी उसका बख़ूबी साथ निभाया। " राहुल तुम तो अपनी बीवी की तरफ़ से निश्चिंत हो लेकिन मैं अपने पति का क्या करूँ , कैसे हटाऊँ उसे अपने रास्ते से , वो तो मेरी हर बात पर नज़र रखता हैं , ये तो मैं ही जानती हूँ की तुमसे कैसे मिलने आती हूँ उससे छुपकर" " शिवानी तुम उसका मर्डर कर दो , सारी मुसीबत...