Planning Murder Ki (Story On Extra-Marital Affairs)

दिल्ली से तक़रीबन 40 किलोमीटर की दूरी पर बसे गुरुग्राम के एक सुनसान इलाके में राहुल और शिवानी अपनी प्यार भरी बातों में मशगूल थे, "राहुल हम कब तक यूँ छुप-छुपकर मिलते रहेंगे, तुम कुछ करते क्यों नहीं" शिवानी ने राहुल के कंधे पर अपना सिर रख उसके हाथ को अपने हाथ में लेते हुए जैसे ही कहा

'मैं क्या कर सकता हूँ, जो कुछ करना हैं तुम्हे करना हैं, क्योंकि हमारे एक होने में सबसे बड़ी अड़चन तुम्हारा पति कुशल ही तो हैं।" 

"तुम्हारी बीवी रक्षा अड़चन नहीं हैं क्या?" 

"नहीं, वो बेचारी तो बहुत भोली हैं, मेरी हर बात का विश्वास कर लेती हैं, उसे तो मैं हर वक़्त बेवकूफ बनाता रहता हूँ और वो बनती रहती हैं।" राहुल ने कुटिल हँसी हँसते हुए कहा और इस हँसी में शिवानी ने भी उसका बख़ूबी साथ निभाया। 

"राहुल तुम तो अपनी बीवी की तरफ़ से निश्चिंत हो लेकिन मैं अपने पति का क्या करूँ, कैसे हटाऊँ उसे अपने रास्ते से, वो तो मेरी हर बात पर नज़र रखता हैं, ये तो मैं ही जानती हूँ की तुमसे कैसे मिलने आती हूँ उससे छुपकर" 

"शिवानी तुम उसका मर्डर कर दो, सारी मुसीबत ही ख़त्म हो जाएगी।" 

"तुम्हारा दिमाग ख़राब हैं क्या राहुल, ये क्या अनाप-शनाप बोले जा रहे हो।" 

"शिवानी, शिवानी, ज़रा ठन्डे दिमाग से सोचो हमारे पास मर्डर करने के अलावा और कोई रास्ता ही नहीं हैं।"

"राहुल तुम ये क्या बोले जा रहे हो, मुझे तो बहुत घबराहट हो रही हैं, क्या हम तलाक का रास्ता नहीं अपना सकते?" 

"अपना सकते हैं, लेकिन उसके लिए तुम्हारे पति को भी तलाक के पेपर्स पर साइन करने होंगे और मेरी बीवी को भी, और क्या वो दोनों साइन करने के लिए तैयार होंगे"

"राहुल हम उन्हे बता देंगे की हम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं, और उनसे तलाक चाहते हैं, हम बालिग हैं हमें अपनी ज़िंदगी के फ़ैसले लेने का हक हैं, लेकिन ये मर्डर....नहीं....."

"शिवानी, तुम जितना सोच रही हो उतना आसान नहीं हैं तलाक के पेपर्स पर साइन करवाना , और जब हम उन्हे ये बताएंगे की हम एक-दूसरे से प्यार करते हैं तो उस वक्त क्या हंगामा होगा तुम अंदाजा भी नहीं लगा सकती हो, मुमकिन हैं हमारा मिलन होने के बजाय हमेशा के लिए अलगाव हो जाए, और वैसे भी तलाक के प्रोसेस में काफी वक़्त चला जायेगा।" राहुल के कहते ही

"इसका मतलब तुम भी अपनी बीवी का...." 

"हाँ बिल्कुल"

"तुम्हे ड़र नहीं लग रहा ऐसा सोचते हुए" 

"शिवानी जो ड़र गया सो मर गया, और हमें मारना हैं मरना नहीं" 

"राहुल मुझे आज तुमसे बहुत ड़र लग रहा हैं, लेकिन मैं तुम्हारे साथ हूँ, बोलो क्या करना होगा।" शिवानी के पूछते ही राहुल ने उसके कान में फुसफुसाकर अपने प्लान से वाकिफ़ करवा दिया।

"ये तो बहुत ख़तरनाक हैं, तुम ज़ल्लाद थे क्या पुराने जन्म में" 

"हमें कोई रिस्क नहीं लेना हैं शिवानी, अगर थोड़ी भी लापरवाही बरती और इनमे से कोई भी ज़िंदा बच गया तो मुसीबत हो जाएगी।" राहुल के कहते ही,  

"राहुल हम प्यार में कब इतना आगे बढ़ गए पता ही नहीं चला, और अब स्थिति ये हैं कि हम अपने-अपने पार्टनर्स का मर्डर की प्लानिंग कर रहे हैं।" 

"हाँ हमारी पहली मुलाकत तुम्हारी दोस्त की शादी में हुई थी, और मैं तो उस पहली ही मुलाकत में तुम्हारी ख़ूबसूरती का कायल हो गया था, और तुम्हे अपना दिल दे बैठा। " 

"वो भी उस वक़्त जब तुम्हारी बीवी तुम्हारे साथ थी, बेचारी.......लेकिन मेरे पतिदेव भी मेरे साथ ही थे उस वक़्त और मैं भी तो तुम्हे अपना दिल दे बैठी थी, दरअसल तुम्हारी मीठी-मीठी बातों में आ गयी थी मैं, पूरे पाँच साल गुजर चुके हैं इस हादसे को हुए, लेकिन इस दौरान कभी अपने फ़ैसले पर अफ़सोस नहीं हुआ मुझे, जिसमे तो मेरा पति बहुत अच्छा हैं, बहुत ख्याल रखता हैं मेरा, और प्यार भी बहुत करता हैं मुझसे" 

"यार बीवी तो मेरी भी बहुत अच्छी हैं, पूजा करती हैं मेरी वो" 

"राहुल, इन दोनों को अपने रास्ते से हटाते समय क्या हमारे हाथ नहीं कांपेंगे" 

"ज़रूर कांपेंगे, लेकिन हमें ऐसा करना होगा, इसलिए चलो अब अपने-अपने घर चलते हैं, आज बातों ही बातों में काफ़ी देर हो गयी हैं, कहीं ऐसा ना हो उनके मर्डर से पहले हमारा ही मर्डर हो जाए।" राहुल कहते ही

"हाँ चलो" और फिर दोनों गुरुग्राम में ही बसे अपने-अपने घरों की तरफ चल दिए। 

 

दो हफ्ते बाद, "भाभी, भाभी......क्या हो गया आपको, भैया, भैया देखिए ना भाभी को क्या हो गया, कोई हैंकोई तो डॉक्टर को बुलाओ, देखो क्या हो गया हैं शिवानी भाभी को" सुबह तक़रीबन सात बजे कुशल और शिवानी  के घर से उनकी कामवाली बाई अनु के चिल्लाने की आवाज़ें आने लगी। 

"क्या हुआ अनु, क्यों चिल्ला रही हो" इतने में ही पड़ोस में रहने वाली निशा ने चिल्लाकर पूछा।

"निशा भाभी देखिए ना शिवानी भाभी के पेट से कितना खून बह रहा हैं, और ये कुछ बोल भी नहीं रही हैं।" अनु की बात सुन निशा शिवानी के घर की ओर दौड़ी।"

"क्या हुआ! हे भगवान् इसे तो गोली हैं, और घर इतना बिखरा हुआ क्यों हैं, कहीं रात को इनके घर पर डाका तो नहीं पड़ा।" ऐसा कह निशा चिल्लाते हुए सभी पड़ोसियों को इकट्ठा करने लगी।

"गज़ब हो गया ये तो, शिवानी जैसी भली औरत को कौन मार सकता हैं।" शिवानी और कुशल के घर के बाहर लगी भीड़ में से एक आवाज़ आई। 

"अरे भाई जी ज़रूर कोई लूटने के इरादे से आया होगा, और शिवानी भाभी के ऐतराज़ करने पर उसने इनके ऊपर गोली चला दी होगी।" भीड़ में से एक आवाज़ और आई।  

"पता नहीं क्या हुआ हैं, क्यों मारा किसी ने शिवानी भाभी को, लेकिन कुशल भैया कहाँ हैं, कहीं नज़र ही नहीं आ रहे, कहीं लुटेरे उन्हें अगवा करके तो नहीं ले गए।" इतने में ही अनु ने रोते हुए कहा।  

"हमें पुलिस में इत्तला करनी चाहिए" निशा के कहते ही, वहाँ खड़े एक सज़्ज़न पुलिस को फोन करने लगे। और कुछ ही देर में पुलिस ने आते ही कार्यवाही शुरू कर दी, और साथ ही कुशल की तलाश भी। 

 

दूसरी ओर राहुल के घर पर, "राहुल तुम क्यों चले गए मुझे छोड़कर, अब मैं तुम्हारे बिना कैसे जीऊँगी।" रक्षा राहुल के मृत शरीर पर अपना सिर ज़ोर-ज़ोर से पटकते हुए बुरी तरह से रो रही थी। 

"शांत हो जाओ रक्षा, अब होनी को कौन टाल सकता हैं।" 

"लेकिन चाची मेरा राहुल तो बहुत अच्छी ड्राइविंग करता हैं, फिर ये एक्सीडेंट कैसे हो गया।" 

"रक्षा भाभी गाड़ी के ब्रेक फ़ैल थे शायद इसी वजह से भाई उसे काबू में नहीं कर पाए और......." वहाँ खड़े एक लड़के के कहते ही,

"किसने किये ब्रेक फ़ैल, अब मेरा क्या होगा" रक्षा अब पहले से भी ज्यादा रोने लगी, लेकिन वहाँ आये रिश्तेदारों ने उसे संभालते हुए राहुल का विधि-विधान से अंतिम कार्य संपन्न किया। 

 

अगले दिन, "शिवानी और राहुल दोनों ही इस दुनिया से एक साथ रुखसत हो चुके हैं, इन दोनों की प्लानिंग के मुताबिक जाना तो रक्षा और कुशल को था, लेकिन उपरवाले को शायद कुछ ओर ही मंज़ूर था, सच कहा हैं किसी ने होनी को कौन टाल सकता हैं।" हा-हा-हा किसी को भी भयभीत कर देने वाली कुटिल हँसी जैसे ही गुरुग्राम के एक सुनसान इलाके में गूँजी। 

"कुशल, कुशल मेरी जान ये उपरवाले को नहीं हमें मंज़ूर था, तब ही तो हमने उनसे पहले अपनी प्लानिंग को अंजाम दे दिया, मैंने राहुल की गाड़ी के ब्रेक फ़ैल करके और तुमने अपने घर पर गुंडे भिजवाकर, बेचारे क्या सोचते थे हमारे बारे में, और हम क्या निकले, उनको तो ये पता ही नहीं चला की उस पार्टी में इश्क़ उन्हें ही एक-दूसरे से नहीं, बल्कि हमें भी हुआ था, प्लानिंग वो ही हमें रास्ते से हटाने की नहीं, बल्कि हम भी कर रहे थे, हाँ हम सफल हुए और वो हमारे शिकार हुए।" कुशल से भी ज्यादा भयानक हँसी हँसते हुए जैसे ही रक्षा कुशल के सामने आई। 

"रक्षा मेरी जान आई. लव. यू." और ऐसा कहते ही कुशल ने रक्षा को अपने गले से लगा लिया। 

"आई. लव. यू. टू. डियर" रक्षा ने प्यार से कुशल की ओर देखते हुए जवाब दिया, और फिर दोनों इतनी ज़ोर से हँसे की उनकी खूँखार हँसी से गुरुग्राम का वो सुनसान इलाका काँप गया।

 

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