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Shaatir Chorni (Story On Thief)

                                 क्यों देते हैं धोखा बनकर अपने कुछ शातिर  क्यों कर देते हैं बदनाम शरीफ़ों को कुछ शातिर        "चाय , चाय , चाय गर्म , मसालेदार चाय , मेमसाब चाय" चाय वाले की आवाज़ सुन मैने अधखुली आँखों से देखा तो सामने एक चाय वाला मटमैले कपड़े पहने हाथ में चाय की केतली और ग्लास लिए खड़ा था। " नहीं चाहिए चाय" "ले लीजिये ना मेमसाब गरमागरम चाय हैं।" "कहा ना भैया नहीं चाहिए , क्यों दिमाग खराब कर रहे हो।" मेरे चाय वाले को लताड़ते ही वो मायूस होकर चला गया , मैने थोड़ा-सा सिर ऊपर कर खिड़की से झाँकते हुए स्टेशन जानने की एक असफ़ल कोशिश की और बुदबुदाने लगी , " पता नहीं कौनसा स्टेशन हैं" " बहनजी , अभी तो मुग़ल-सराय आया हैं , ट्रेन तीन घंटे लेट हैं।" सामने वाली सीट पर बैठी हुई महिला ने शायद मेरा बुदबुदाना सुन लिया था, "अभी तो ना जाने कितना और लेट होगी इस ट्रेन में यही एक दिक़्क़त हैं।" शायद वो महिला बात करने के मूड़ में थी "जी अब कर भी क्या सकते हैं" ऐसा कह मैं खिड़की से बाहर देखने लग...