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अप्रैल, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Naa Janne Kyo (Story On Family Relations Issues)

आज सुबह से ही मौसम बेहद ही सुहावना हैं, आसमान में हर तरफ घनघोर बादल छाए हुए हैं, जो कि बीच-बीच में गरजकर अपनी उपस्थिति का आभास करा रहे हैं, उनकी गर्जन सुन ऐसा प्रतीत होता हैं कि निश्चित ही आज जमकर बारिश होगी, लेकिन फिलहाल तो बारिश का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं हैं, शायद आज ये बादल सिर्फ गरजने के लिए एकत्रित हुए हैं बरसने के लिए नहीं। चाय का कप हाथ में थामे, बालकनी में अपने मनपसंद बीन बैग पर बैठी तन्वी अभी ये सब सोच ही रही थी कि अचानक से उसके मोबाईल की घंटी बज उठी, और जैसे ही उसकी नजर मोबाईल पर गयी उसकी मुँह से एकाएक ही निकल गया, "ओह शिट, इस मुसीबत का फोन भी अभी आना था क्या, सारा मूड़ खराब कर दिया, क्या करूँ उठाऊँ या नहीं, रहने देती हूँ, कह दूँगी की फोन साइलन्ट पर था रिंग सुनाई नहीं दी" और तन्वी फोन को नजरंदाज कर सुहावने मौसम का आनंद लेने लगी। फोन तन्वी की भाभी आँचल का था जिसे वो बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी, और जितनी नफरत तन्वी आँचल से करती थी उससे कई ज्यादा आँचल तन्वी से करती थी, फिर भी दोनों बेमन से दुनिया दिखावे के लिए ये रिश्ता निभा रहे थे। तन्वी के द्वारा आँचल से नफरत करने...

Khushi (Article On Happiness)

ख़ुशी , ख़ुशी क्या हैं ये समझना थोड़ा मुश्किल हैं , क्योंकि हर किसी की नज़र में इसकी एक अलग ही परिभाषा हैं , कोई किसी को कुछ देकर ख़ुश होता हैं , तो कोई किसी से कुछ   पाकर , कोई किसी के होठों पे मुस्कान देखकर ख़ुश होता हैं , तो कोई किसी की आँखों में आँसू देखकर , कोई बड़े से बँगले में रहकर ढ़ेरों भोग विलास की चीज़े ख़रीदकर ख़ुशी महसूस करता हैं , तो कोई दो वक़्त की सूखी रोटी खाकर भी ख़ुश रहता हैं , कोई   दुनिया की सैर करके ख़ुशी महसूस करता हैं , तो कोई एक ही जगह रहकर   सिर्फ अपने परिवार के साथ समय गुजारकर ख़ुश रहता हैं , किसी को अकेलपन में ही ख़ुशी मिलती हैं , तो कोई भीड़ में ख़ुशी ढूँढ़ता हैं , किसी को काम करके ख़ुशी मिलती हैं , तो कोई आराम करके खुश रहता हैं , कोई बेजुबां जानवरों और पक्षियों के साथ खेलकर , उन्हें देखकर खुश होता हैं , तो कोई उन्हें सताकर ख़ुश होता हैं , किसी को खुली हवा में साँस लेना ख़ुशी देता हैं , तो कोई बंद दरवाज़ों के पीछे ख़ुशी महसूस करता हैं। कुल मिलाकर हर इंसान   के द्वारा ख़ुशी महसूस करने का एक अलग ही दृष्टिकोण हैं , ये अलग बात हैं की वो दॄष्टिकोण उचित भी हो सकता हैं ...