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Gudiya Ki Samjhdari (Story On A Brave Girl)

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Happy children’s Day नमस्कार दोस्तों ,  मेरी आज की कहानी बाल-दिवस के मौके पर   नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए हैं ,  और मैं उम्मीद करती हूँ कि बच्चों को मेरी ये कहानी ज़रूर पसन्द आएगी।    बहुत समय पहले की बात हैं ,  उत्तर-प्रदेश   के एक छोटे-से गाँव में एक परिवार रहता था ,  जिसमे घर के मुखिया केशव ,  उनकी पत्नी राधा ,  एवं उनकी एक पाँच   साल की   बेटी गुड़िया रहते थे ,  गुड़िया बहुत ही नटखट और शैतान थी ,  उसे ना जाने क्यों अपनी माँ राधा को परेशान करने में बहुत ही मज़ा आता ,  राधा जो भी कहती गुड़िया हमेशा उसका उल्टा ही करती ,  अगर राधा कहती गुड़िया पढ़ने बैठो तो गुड़िया खेलने चली जाती ,  अगर कहती गुड़िया खाना खा लो   तो वो पढ़ने बैठ जाती ,  कई बार तो राधा को गुड़िया पर इतना गुस्सा आ जाता कि वो उससे बात तक करना बंद कर देती ,  लेकिन गुड़िया भी कहाँ किसी से कम थी ,  वो भी कैसे ना कैसे अपनी माँ को मना ही लेती।    यूँ तो गुड़िया की शैतानियों से सभी गाँव वालें दुःखी थे ,  जिनके ...

Galat Fehmi (A One Sided Love Story)

ना तुम मुझे समझ सके और ना ही मैं तुम्हे अब समझी हूँ तो मुश्किल हैं यक़ीन करना     आज अस्पताल से वापिस आए हुए मुझे पूरे दस दिन हो चुके हैं ,  लेकिन घर का कोई भी सदस्य मुझसे बात तक नहीं कर रहा हैं ,  यहाँ तक की कोई मेरे कमरें में भी नहीं आ रहा हैं ,  खाना ,  पानी ,  दवाई वगैरह की ज़िम्मेदारी नौकरानी शारदा निभा रहीं हैं ,  लेकिन कभी-कभार मेरी बहन अंकिता ज़रूर मेरे कमरें में आकर मेरे हालचाल पूछ जाती ,  सबकी नाराज़गी भी वाज़िब थी ,  मैंने काम ही कुछ ऐसा   किया था ,  अपने हाथ की नस काटकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी मैंने ,  वो भी अपने प्यार के लिए ,  उस प्यार के लिए जिसका मैं कभी प्यार थी ही नहीं।   बात उस समय की हैं जब मेरी कम्प्यूटर में   बी-टेक करने के बाद बंगलौर की एक आई.टी कम्पनी में नई-नई नौकरी लगी थी ,  वैसे तो मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ ,  और मैं कभी दिल्ली से बाहर भी नहीं गयी ,  लेकिन जब पता चला की मेरा कॉलेज की ओर से प्लेस्मेंट हो गया हैं ,  और मुझे बंगलौर जाना होगा तो मेरी ख़ु...