Sundarata (Article On Real Beauty)
कोई क्या कहेगा इसी चिंता में हम वो नहीं कर पाते जो करना चाहते हैं , और इसी वजह से अपने अनुसार जी नहीं पाते , लेकिन कभी ये नहीं सोचते की जिन लोगों के कुछ कहने से हमें इतना फ़र्क पड़ रहा हैं उन्होंने हमें नोटिस किया भी हैं या नहीं , या फिर उनके पास हमारे लिए वक़्त हैं भी या नहीं , लेकिन इसके बिल्कुल विपरीत कुछ लोग खुद को पूरी तरह से नज़रंदाज़ करते हुए ये सोचते की हम ऐसा क्या करे जिससे की सामने वाले व्यक्ति के होठों पर एक मुस्कान आ जाये। वैसे तो ये अच्छी बात हैं कि कोई हमारी वजह से खुश हो , क्योंकि किसी को ख़ुश करना एक कला हैं , और ये हुनर हर किसी में नहीं होता , या फिर ये कह लीजिए की किसी को गैरों की ख़ुशियों से कोई मतलब नहीं होता तो किसी को अपनों की ही ख़ुशियों की परवाह नहीं होती , बेहद ही अजीब हैं ये पहेली जिन बातों के लिए दूसरों की परवाह होनी चाहिए उनके लिए तो होती नहीं , लेकिन जिन बातों के लिए नहीं होनी चाहिए उन बातों के लिए होती हैं। मैं जानती हूँ की ऊपर लिखी हुई बात बेहद ही confusing हैं , लेकि...