Sundarata (Article On Real Beauty)


कोई क्या कहेगा इसी चिंता में हम वो नहीं कर पाते जो करना चाहते हैं, और इसी वजह से अपने अनुसार जी नहीं पाते, लेकिन कभी ये नहीं सोचते की जिन लोगों के कुछ कहने से हमें इतना फ़र्क पड़ रहा हैं उन्होंने हमें नोटिस किया भी हैं या नहीं, या फिर उनके पास हमारे लिए वक़्त हैं भी या नहीं, लेकिन इसके बिल्कुल विपरीत कुछ लोग खुद को पूरी तरह से नज़रंदाज़ करते हुए ये सोचते की हम ऐसा क्या करे जिससे की सामने वाले व्यक्ति के होठों पर एक मुस्कान आ जाये। वैसे तो ये अच्छी बात हैं कि कोई हमारी वजह से खुश हो, क्योंकि किसी को ख़ुश करना एक कला हैं, और ये हुनर हर किसी में नहीं होता, या फिर ये कह लीजिए की किसी को गैरों की ख़ुशियों से कोई मतलब नहीं होता तो किसी को अपनों की ही ख़ुशियों की परवाह नहीं होती, बेहद ही अजीब हैं ये पहेली जिन बातों के लिए दूसरों की परवाह होनी चाहिए उनके लिए तो होती नहीं, लेकिन जिन बातों के लिए नहीं होनी चाहिए उन बातों के लिए होती हैं। मैं जानती हूँ की ऊपर लिखी हुई बात बेहद ही confusing हैं, लेकिन सच हैं। बहुत ही थोड़ा-सा अंतर है दोनों बातों में पहली बात के अनुसार हम कैसे लग रहे हैं, हमारे द्वारा धारण किए गए वस्त्र हम पर जँच रहे ,हैं या नहीं, या फिर कोई हमारे बारें में क्या सोचेगा ये सभी बातें हमारे ज़ेहन में हर वक़्त घूमती रहती हैं, यानि की हमारी बाहरी सुंदरता पर लोगों की राय बेहद ही महत्त्वपूर्ण हैं, लेकिन कभी हमारे ज़ेहन में ये नहीं आता की किसी होठों पे एक मुस्कान लाने के लिए हमें क्या करना चाहिए, किसी भी शख़्स में लोगों को हँसाने की कला होना एक तरह से उसके लिए ईश्वर का दिया हुआ तोहफ़ा हैं। 

 

एक दिन मैं अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ पार्टी में गयी, काफी धूमधाम से पार्टी का आयोज़न किया गया था, यूँ तो उसमें अधिकतर लोग मध्यमवर्गीय थे, लेकिन कुछ उच्चवर्गीय लोगों को भी आमंत्रित किया गया था, उनमे से एक महिला भी थी जो कि बार-बार अपने पहनावे का दिखावा कर मध्यमवर्गीय महिलाओं को नीचा दिखाने की कोशिश कर रही थी, और ये  बात उन महिलाओं को बुरी तरह से आहत कर रही थी, वो मन ही मन अपनी तुलना उस उच्चवर्गीय महिला से करने लगी, जो की उनके घरों में होने वाले कलेश का संकेत दे रहा था। लेकिन इसी दौरान वहाँ एक मध्यमवर्गीय महिला आई, जिसने बेहद ही साधरण वस्त्र पहने हुए थे, उसकी वेशभूषा देखकर लगता ही नहीं था कि वो एक पार्टी में आई हुई हैं, उच्चवर्गीय लोग उसकी ओर हिकारत भरी नज़रों से देखने लगे, लेकिन इन सब बातों से उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था, वो तो अपनी ही धुन में सवार गुनगुनाती हुई उस पार्टी के आतिथ्य की ओर जाने लगी और पूरे विश्वास के साथ उनसे मिली एवं उन्होंने भी पूरी गर्मजोशी से उसका स्वागत किया। उसका विश्वास से भरा चेहरा देख वहाँ खड़े सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए। उन्हें लगा इतनी बड़ी पार्टी में कोई यूँ ही साधारण से वस्त्रों में कैसे आ सकता हैं, और वो भी इतने विश्वास के साथ, वो महिला उस पार्टी में आये हुए सभी मेहमानों के लिए चर्चा का विषय बन चुकी थी, पार्टी हाल में हर तरफ तीन-तीन, चार-चार लोगों के ग्रुप बन गए, लेकिन बातों का मुद्दा एक ही था और वो था वो महिला। 

 

कुछ देर बाद वो महिला सामने सजे स्टेज की ओर जाने लगी, और अगले  ही पल से उसने कुछ ऐसे मज़ाकिया किस्से सुनाने शुरू किये की वहाँ खड़ा प्रत्येक सदस्य उसके इस हुनर का कायल हो गया, वो किस्से सुनाती जा रही थी और पार्टी में आये मेहमान मन्त्र्मुग्ध होकर सुनते जा रहे थेइस दौरान शायद ही किसी का ध्यान उसके पहनावे पर गया। उन कुछ मिनटों में ये बात तो साबित हो चुकी थी की आपकी ऊपरी सुंदरता पर आंतरिक सुंदरता जल्द ही हावी  हो जाती हैं, बस इंसान को खुद की आंतरिक सुंदरता पर विश्वास होना चाहिए। 

 

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