Mera Khaas Dost / मेरा खास दोस्त (Story On Friendship)
जयपुर एयरपोर्ट पर आज सामान्य से ज्यादा भीड़ है, जिसका कारण है, वहाँ मौजूद लोगों में से अधिकतर अपने परिवारजनों के साथ दिवाली का त्यौहार मनाने के बाद, अपने-अपने काम पर वापिस जा रहे हैं, और मैं भी तो अपनी बीवी बच्चों के साथ, मम्मी-पापा के पास दीवाली मनाने आया था, और आज मुंबई वापिस जा रहा हूँ, यूँ तो मैं, और मेरा परिवार नियम से हर दिवाली मनाने जयपुर आता ही है, लेकिन इस साल की दिवाली कुछ खास लगी, वैसे तो कुछ खास नहीं था, सबकुछ सामान्य ही था, फिर भी मन बेवजह बेहद प्रसन्न था, और अभी भी ऐसा लग रहा है जैसे कि कुछ बहुत अच्छा होने वाला है। अपनी प्रसन्नता का जिक्र कुछ देर पहले जब मैने अपनी 38 वर्षीय पत्नी राधिका से किया तो बोली, तुम्हारी छुट्टियाँ खत्म, अब कल से ऑफिस जाना है, शायद यही अच्छा होने वाला हो, यकीनन मज़ाक कर रही थी वो, लेकिन उसकी बात सुनकर मुझे हँसी आ गयी, क्योंकि एक हफ्ते की छुट्टियों के बाद किसको ऑफिस जाना अच्छा लगता है, हाँ ये अलग बात है कि मैं 40 वर्ष का हो चुका था, और नौकरी करते हुए 15 साल गुजर चुके है, फिर भी ऑफिस जाने के नाम पर अभी ...