Shakki Patni (Story On Suspicious wife)
आसमान पर गहरे काले बादल छाने लगे , और बादलों की गड़गड़ाहट एवं बिजली के कड़कने के साथ ही हल्की बूँदा-बाँदी शुरू गयी , जिसे धुआँधार बारिश में तब्दीलन होनें में कुछ ही सेकेंड लगे। " हे भगवान , इस बारिश को भी अभी आना था , अब मैं इतना सारा सामान लेकर घर तक कैसे जाऊँगी।" खुद से ही बात करती हुई तानिया अपने आस-पास रिक्शा ढूँढने लगी , लेकिन उसे जब दूर-दूर तक रिक्शा नहीं दिखाई दिया तो पैदल ही घर के लिए निकल पड़ी। घर पहुँचकर जैसे ही तान्या घर का ताला खोलने लगी अचानक से उसके पति करण ने अन्दर से दरवाज़ा खोल दिया और यूँ एकाएक करण को अपने सामने देख तान्या चौंक गयी। " करण तुम इस वक़्त घर पर....!" " हाँ तान्या , लेकिन तुम्हे कितनी बार कहाँ हैं कि जब भी घर से बाहर निकलों गाडी ले जाया करो , और तुम हो की पैदल ही चल पड़ती हो , अब भीग गयी ना बारिश में , चलो अब फ़टाफ़ट नहा लो , देखो तुम्हारे कपड़ो पर कीचड़ लग गया हैं।" " वो सब तो ठीक हैं करण , लेकिन तुम आज जल्दी घर कैसे आ गए ?" " अरे वो आज एक मीटिंग थी , जल्दी खत्म हो गयी तो घर भी जल्दी आ गया , अब बातों में ...