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नवंबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Mera Ghar Konsa Hain (Story On Social Problem)

 " वैशाली , अरे भई आज दोपहर की चाय मिलेगी या नहीं" वैशाली की सास शुगना ने जैसे ही आवाज़ लगाई , वैशाली अपने सारे काम छोड़ दौड़ी चली आई।    " जी माँजी बस बनाने ही जा रही थी , साथ में गरमागरम पकोड़े भी तल लूँ क्या"   " नहीं रहने दे , तू तो बस एक कप चाय ही पिला दे" और फिर शुगना भी वैशाली के पीछे-पीछे रसोई की ओर चल पड़ी और वहीं रसोई के बाहर कुर्सी लगाकर बैठ गयी , ये उसकी लगभग रोज़ की दिनचर्या थी , अन्दर रसोई में वैशाली शाम की चाय बनाते हुए खाने की तैयारी करती रहती , और रसोई के बाहर कुर्सी पर बैठी उसकी सास उससे दुनियादारी की बातें , " अरी वैशाली , अपनी निधि भी अब पच्चीस की होने को आई , तू विक्रम से कह उसके लिए लड़के देखना शुरू करे"   " कहा था माँजी , और इन्होने अपने कुछ जान-पहचान वालों से इस बात का ज़िक्र भी किया हैं , मैंने भी अपने मायके वालों को कह दिया हैं कि निधि के लायक कोई लड़का हो तो बताये , अब देखते हैं कहाँ बात बनती हैं।"   " हम्म , बात तो तेरी सही हैं , आने दे तेरे ससुर जी को अपनी मित्र-मण्डली से मिलकर , उन्हें भी लगाती हूँ इस काम पर ...

Ho Gaya Milan (A Sad Love Story)

“हैलो सानिया ,  कैसी हो ?” “हैलो कुशल ,  मैं ठीक हूँ ,  तुम बताओ ,  तुम कैसे हो ?” “अच्छा हूँ ,  वैसे आज ऑफिस के बाद क्या प्रोग्राम हैं तुम्हारा ” “कुछ खास नहीं ,  लेकिन तुम क्यों पूछ रहे हो” “क्या तुम मेरे साथ कॉफी पीने चलोगी ?” “कॉफी.... नहीं वो घर पर कुछ काम हैं।“ सानिया ने कुशल को टालते हुए कहा। “लेकिन अभी तो तुमने कहा कि कुछ काम नहीं हैं ,  फिर ये अचानक से क्या काम याद आ गया।“ “वो.... बस यूँ ही थोडा सा कुछ काम था ,  फिर कभी चलते हैं कॉफी पर ,  सॉरी आज नहीं हो पायेगा।“ सानिया ने कुछ हिचकिचाते हुए कहा और बिना कुशल की प्रतिक्रिया देखे वहाँ से भाग गयी। “ सानिया ,  तुम्हे क्या लगता हैं कि मैं कुछ समझता नहीं ,  जानता हूँ तुम क्यों मुझसे दूर भागती हो ,  इसलिए ना कि अगर किसी ने मुझे तुम्हारे साथ देख लिया तो तुम्हारी बदनामी हो जाएगी ,  लोग कहेंगे कि देखो कैसी लडकी हैं लडकों के साथ घुमती-फिरती है ,  लेकिन तुम बिल्कुल भी फिक्र मत करो ,  तुम्हारी इज़्ज़त पर कभी भी आंच नहीं आने दूँगा ,  क्योकि बहुत प्यार करता हूँ मैं...