Ho Gaya Milan (A Sad Love Story)


“हैलो सानियाकैसी हो?”

“हैलो कुशलमैं ठीक हूँतुम बताओतुम कैसे हो?”

“अच्छा हूँवैसे आज ऑफिस के बाद क्या प्रोग्राम हैं तुम्हारा

“कुछ खास नहींलेकिन तुम क्यों पूछ रहे हो”

“क्या तुम मेरे साथ कॉफी पीने चलोगी?”

“कॉफी.... नहीं वो घर पर कुछ काम हैं।“ सानिया ने कुशल को टालते हुए कहा।

“लेकिन अभी तो तुमने कहा कि कुछ काम नहीं हैंफिर ये अचानक से क्या काम याद आ गया।“

“वो.... बस यूँ ही थोडा सा कुछ काम थाफिर कभी चलते हैं कॉफी परसॉरी आज नहीं हो पायेगा।“ सानिया ने कुछ हिचकिचाते हुए कहा और बिना कुशल की प्रतिक्रिया देखे वहाँ से भाग गयी।

सानियातुम्हे क्या लगता हैं कि मैं कुछ समझता नहींजानता हूँ तुम क्यों मुझसे दूर भागती होइसलिए ना कि अगर किसी ने मुझे तुम्हारे साथ देख लिया तो तुम्हारी बदनामी हो जाएगीलोग कहेंगे कि देखो कैसी लडकी हैं लडकों के साथ घुमती-फिरती हैलेकिन तुम बिल्कुल भी फिक्र मत करोतुम्हारी इज़्ज़त पर कभी भी आंच नहीं आने दूँगाक्योकि बहुत प्यार करता हूँ मैं तुमसेऔर जब तक तुम अपनी खुशी से मेरी नहीं हो जाओगी मैं तुम्हारा इंतज़ार करुँगा” कुशल मन ही मन बडबडाता हुआ और मुस्कुराता हुआ अपनी डेस्क पर चला गया।

दो साल पहले की ही तो बात हैं जब सानिया ने अपनी नई-नई नौकरी मुम्बई की एक प्राईवेट कम्पनी में जोईन की थीऑफिस में पहला कदम रखते ही सामने ही बैठे कुशल की नज़र उस पर पडीऔर पहली ही नजर में ज़नाब सानिया की खूबसूरती के कायल हो गए। और फिर तब से उसकी कोशिश ज़ारी हैं सानिया के साथ एक दिन डेट पर जाने की, लेकिन सफलता हैं कि मिल ही नहीं रहीलेकिन कुशल भी हिम्मत हारने वालों में से नहीं हैं।

कुछ दिनों बाद एक बार फिर“हाय सानियाआज तुम्हारा ये सलवार-सूट तुम पर काफी जँच रहा हैंकहाँ से खरीदा?”

“धन्यवादकांदिवली में एक दुकान हैं वही से”

“ओह नाईसवैसे सुना हैं कि अपने ऑफिस के पास एक साऊथ-इंडियन रेस्टोरेंट खुला हैंक्यों ना वहाँ लंच के लिए चलेतुम्हारे नये सूट का सेलिबिरेशन भी हो जायेगा।“

“सूट का सेलिबिरेशन.....! भला वो कौन करता हैं?” सानिया ने कुशल की ओर आश्चर्य से देखते हुए पूछा।“

“मैंऔर कौन”

“कुशल तुम भी नाअच्छा ठीक हैं, आज मैं चल सकती हूँ तुम्हारे साथ लंच परलेकिन मैं सोच रही हूँ कि क्यों ना नेहल को भी साथ ले ले।“ सानिया कुशल के साथ अकेली जाने में हिचकिचाहट महसूस कर रही थी इसलिए अपने साथ काम करने वाली क्लीग नेहल को साथ लेकर चलने की इच्छा ज़ाहिर की

“नेहल.....लेकिन क्यों !केवल हम दोनों नहीं चल सकते क्या?”

“केवल हम दोनों.....अच्छा ठीक हैंचलते हैं।“ सानिया ने कुछ सोचते हुए कहालेकिन उसका जवाब सुन कुशल का दिल खुश हो गयाये खुशी उसे पूरे दो साल तीन महीनें और बीस दिन बाद मिली हैंवैसे अगर सम्भव होता तो महाश्य सैकेण्डों तक का हिसाब रख डालते लेकिन अफसोस ऐसा हो नहीं पाया। 

 

कुछ देर बाद लंच पर“क्या लोगीवैसे सुना हैं यहाँ का डोसा बहुत अच्छा हैं।“

“ओ.के. चलेगा डोसावैसे मुझे इडली ज्यादा पसंद हैं।“

“हाँ तो दोनों ही ले लेते हैंमैं भी तो आपकी पसंद का स्वाद चख कर देखूँ।“

“जी ज़रूर” और फिर सानिया उस रेस्टोरेंट को चारों ओर से देख उसका मुआयना करने लगीऔर कुशल सानिया को देखने लगाऔर अपनी पहली सफलता पर मन ही मन मुस्कुराने लगा। इसी दौरान खाना भी आ गयादोनों ने इधर-उधर की बातें करत हुए खाना एंजोय कियाऔर उस दौरान कुशल ने सानिया के बारें में बहुत कुछ जान भी लियाउसकी पसंद-नापसंदउसका परिवारकाफी कुछ उसके अतीत के बारें में भीकुल मिलाकर आज की मुलाकात ने कुशल व सानिया के बीच कुछ हद तक नज़दीकियाँ ला दीऔर इस मुलाकात के बाद सानिया भी कुशल के साथ कॉम्फर्टेबल महसूस करने लगीफिर उसके बाद तो किसी ना किसी बहाने इन दोनों का एक-दूसरे के साथ वक़्त गुजारने का सिलसिला बढता ही गयाऔर इन मुलाकातों के सिलसिलें ने सानिया के दिल में भी कुशल के लिए प्यार जगा दियालेकिन इस प्यार का इज़हार किसी की भी ओर से नहीं हुआ थालेकिन फिर एक दिन,

 

“हाय कुशलमुझे आज कुछ ज़रूरी सामान की शॉपिंग करनी हैंक्या तुम मेरे साथ ऑफिस के बाद मार्केट चलोगे?”

“क्यों नहींबंदा हर वक़्त हाज़िर हैं आपकी सेवा में” कुशल ने कुछ इस ढंग से कहा कि सानिया हँसे बिना नहीं रह सकीऔर फिर कुछ मस्ती-मज़ाक की बातें करते हुए दोनों अपनी-अपनी डेस्क पर जाकर बैठ गयेलेकिन अब आलम कुछ ऐसा हो चुका हैं कि इन दोनों का ही मन काम में नहीं लगताजब देखो तब एक दूसरे के बारें में ही सोचते रहते हैंऔर अकेले-अकेले मुस्कुराते रहते हैंवैसे कुशल का हाल तो पहले भी ऐसा ही थालेकिन अब कुछ ज्यादा हो गया हैं।

 

शाम को ऑफिस के बाद दोनों शॉपिंग के लिए जैसे ही मार्केट में पहुँचे सानिया कुछ असहज़ महसूस करने लगीकुछ देर तक तो उसने इस बात का अहसास कुशल को नहीं होनें दियाफिर अचानक से सानिया बेहोश होकर गिर गयी। “सानियासानिया क्या हुआ हैं तुम्हेहेल्पहेल्प प्लीज़ हेल्पकोई तो मदद करो हमारीमेरी दोस्त बेहोश हो गयी हैंइसे अस्पताल लेकर जाना हैं।“ परेशान हाल कुशल वहाँ जमा भीड से मदद की गुहार लगा रहा थाइतने में ही किसी नेक बंदे ने उसकी मदद की और सानिया को अस्पताल पहुँचा दियाकुछ ही देर में वहाँ कुशल के खबर देने पर सानिया के परिवारवालें भी पहुँच गएडॉक्टर्स ने चेक-अप किया और कुछ टेस्ट भी किएऔर सानिया को होश आने के बाद घर वापिस ये कहकर भेज दिया कि टेस्ट की रिपोर्ट आने पर वापिस बुला लिया जायेगाउसके बाद टेस्ट की रिपोर्ट आने तक कुशल हो या सानिया या फिर सानिया के परिवारवालें सभी के चेहरे पर चिंता की लकीरें बनी रहींलेकिन जब कुछ दिनों बाद सानिया की टेस्ट रिपोर्ट आई तो सबके पैरों तले ज़मीन खिसक गयीक्योकि उसे ब्लड-कैंसर थाउसे अस्पताल में भर्ती कर लिया गयासानिया की बीमारी की बात जान कुशल तो अपने होश-हवास ही खो बैठाउसके आँसू थे कि रूकने का नाम ही नहीं ले रहे। फिर भी वो थोडी हिम्मत दिखाता हुआ सानिया का पास अस्पताल में मिलने चला गयालेकिन सानिया को देख अपने आँसू ही नहीं रोक पाया और फूट-फूटकर रो पडा।

“कुशलमैं तुमसे कुछ माँगू तो मना तो नहीं करोगे ना?” सानिया ने उम्मीद भरी नज़रों से कुशल की ओर देखा।

“हाँ...हाँ बोलो सानियाक्या चाहिए तुम्हेमैं तुम्हारे लिए अपनी जान भी दे सकता हूँ।“

“शादी करोगे मुझसे”

“शादी.....!” कुशल सानिया की ओर आश्चर्य से देखने लगा।

“हाँ कुशलमुझे तुमसे प्यार हो गया हैंबस कभी कहने की हिम्मत नहीं हुई…..अगर तुम मुझसे शादी नहीं करना चाहते तो कोई ज़बरदस्ती नहीं हैं।“

“आई. लव. यू. सानियामैं तो तुम्हे तीन साल पहले ही अपना बना चुका थाबस कभी कहने की हिम्मत नहीं हुईलेकिन यहाँ इस ढँग से कहना पडेगा ये कभी नहीं सोचा थाखैर कोई बात नहीं अब तुम फटाफट ठीक होकर घर आ जाओ जब तक मैं तुम्हारे और अपने घर वालों से भी बात कर लेता हूँफिर धूम-धाम से तुम्हे शादी करके अपने घर ले जाऊँगा।“

“ठीक...! तुम्हे क्या लगता हैं मैं ठीक हो जाऊँगी।“

“हाँ क्यों नहींमेरा प्यार तुम्हे कहीं जाने ही नहीं देगामेरा बस चलेगा तो खुदा से भी वापिस माँग लाऊँगा तुम्हे”

“लेकिन मुझे नहीं लगता कि मैं ज़िंदगी भर तुम्हारा साथ नहीं निभा पाऊँगीमैं अब कभी ठीक हो पाऊँगी कुशल।”

“नहीं सानिया तुम्हे ठीक होना होगा मेरे लिएअपने प्यार के लिए और खुदा भी इतना निर्दयी नहीं हो सकता कि दो प्यार करने वालों को जुदा कर दे।“ कुशल ने सानिया का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा और दोनों की आँखों से आँसू बहने लगे।

धीरे-धीरे इन दोनों के प्यार के चर्चे ऑफिस में भी फैल गएऔर फिर सभी इन दोनों के मिलन की ऊपरवाले से दुआ करने लगेसबकी दुआ काम भी आईऔर वक़्त पर इलाज़ हो जाने की वजह से एवं कुशल के प्यार की वजह से सानिया ठीक भी होनें लगीऔर जल्द ही वो वक़्त भी आ गया जब इन दोनों की शादी होनी थीइलाज़ की वजह से सानिया बहुत कमज़ोर हो चुकी थीइसलिए फैसला लिया गया कि शादी कोर्ट में ही की जायेगीकुछ गवाहो की मौज़ूदगी में और बडों के आशिर्वाद से इन दोनों की शादी भी हो गयीलेकिन अभी शादी करके ये दोनों घर वापिस जा ही रहे थे कि अचानक से एक तेज़ रफ्तार से आते हुए टक ने इनकी गाडी को टक्कर मार दीऔर सबकुछ वही खत्म हो गयाशायद खुदा इन दोनों प्रेमियों को साथ बुलाने के लिए ही एक किया था। 

 

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