Bahu Ka Kanyadaan (Story On widow marriage)
जयपुर के शास्त्री नगर कॉलोनी में बने के एक घर में आज सुबह से ही काफी चहल-पहल हो रही हैं , क्योंकि उस घर की बेटी जूही को देखने लड़केवाले जो आ रहे हैं ' जूही बेटा तैयार हुई या नहीं , लड़के वाले आते ही होंगे। ' शारदा ने जैसे ही अपनी बेटी को आवाज़ लगाई। ' बस कुछ देर और मम्मी ' जूही के कहते ही , ' कुछ देर और , कुछ देर और करते-करते पूरी दो घंटे से तैयार हो रही हैं तू ' शारदा गुस्से से चिल्लाने लगी , इतने में ही ऋचा कुछ पूछने आ गयी। ' मम्मी जी , आलू और प्याज के पकोड़ों के साथ गोभी के पकोड़े भी बना लूँ ?' ' हाँ बना ले , और धनिए की चटनी बनी या नहीं ' ' बन गयी मम्मी जी ' इतना कहते ही ऋचा रसोई की ओर वापिस जाने लगी। ऋचा शारदा के बेटे अभिनव की विधवा हैं , तक़रीबन दो साल पहले एक सड़क दुर्घटना में अभिनव की मृत्यु होने के बाद ऋचा यही अपने ससुराल में अपने सास-ससुर व नन्द जूही के साथ रह रही हैं , शारदा और उसके पति निर्मल जी भी उसे अब अपनी बेटी ही मानते हैं। ' हे भगवान् इतनी देर हो गयी लेकिन अभी तक जूही के पापा रसगुल्ले और काजू कतली लेकर वापिस न...