Aakash Aur Jhanvi (Story On Family Issues)
" आकाश , तुमने आज फिर अपने कपड़े पलंग पर यूँ ही ड़ाल दिए हैं , अब इन्हे खूँटी पर कौन ड़ालेगा।" जाह्नवी ने लगभग चिल्लाते हुए अपने पति आकाश से कहा। " कौन ड़ालेगा से तुम्हारा क्या मतलब हैं जाह्नवी , तुम ही ड़ालोगी।" आकाश द्वारा दिए गए जवाब से जाह्नवी का गुस्सा और बढ़ गया। " तुमने क्या मुझे अपना नौकर समझा हैं।" " ये तुम कह रही हो मैं नहीं , मैं तो तुम्हे अपनी बीवी ही समझता हूँ , और हर बीवी का फ़र्ज़ हैं अपने पति के काम ख़ुशी-ख़ुशी करना।" " और पति के क्या फ़र्ज़ हैं , ज़रा बताने का कष्ट करेंगें आप मिस्टर आकाश" जाह्नवी के पूछते ही , " अपनी पत्नी से सेवा करवाना , और उसके हाथों से बने स्वादिष्ट खाने का हर रोज़ लुफ़्त उठाना।" " वाह पति देव कितने महान विचार हैं आपके......अब बकवास बंद करो अपनी , और चुपचाप इन कपड़ों को खूँटी पर टांगों।" " तमीज़ से बात करो जाह्नवी मैं पति हूँ तुम्हारा" आकाश के कहते ही , " पति हो तो पति जैसे ही रहा करो , अपने दादागिरी मत दिखाया करो।" " दिखाऊँगा दादागिरी , बोलो क्या कर लोग...