Aakash Aur Jhanvi (Story On Family Issues)


"आकाश, तुमने आज फिर अपने कपड़े पलंग पर यूँ ही ड़ाल दिए हैं, अब इन्हे खूँटी पर कौन ड़ालेगा।" जाह्नवी ने लगभग चिल्लाते हुए अपने पति आकाश से कहा। 

"कौन ड़ालेगा से तुम्हारा क्या मतलब हैं जाह्नवी, तुम ही ड़ालोगी।" आकाश द्वारा दिए गए जवाब से जाह्नवी का गुस्सा और बढ़ गया। 

"तुमने क्या मुझे अपना नौकर समझा हैं।" 

"ये तुम कह रही हो मैं नहीं, मैं तो तुम्हे अपनी बीवी ही समझता हूँ, और हर बीवी का फ़र्ज़ हैं अपने पति के काम ख़ुशी-ख़ुशी करना।" 

"और पति के क्या फ़र्ज़ हैं, ज़रा बताने का कष्ट करेंगें आप मिस्टर आकाश" जाह्नवी के पूछते ही

"अपनी पत्नी से सेवा करवाना, और उसके हाथों से बने स्वादिष्ट खाने का हर रोज़ लुफ़्त उठाना।" 

"वाह पति देव कितने महान विचार हैं आपके......अब बकवास बंद करो अपनी, और चुपचाप इन कपड़ों को खूँटी पर टांगों।"

"तमीज़ से बात करो जाह्नवी मैं पति हूँ तुम्हारा" आकाश के कहते ही

"पति हो तो पति जैसे ही रहा करो, अपने दादागिरी मत दिखाया करो।" 

"दिखाऊँगा दादागिरी, बोलो क्या कर लोगी तुम मेरा" 

"धक्के मारकर इस घर से निकाल दूँगी।" 

"मुझे मेरे ही घर से निकालेगी तू, तेरी इतनी हिम्मत" 

"आकाश, शायद तुम भूल रहे हैं, ये घर हम दोनों के ही नाम पर हैं, इसलिए इस पर जितना हक़ तुम्हारा हैं उतना मेरा भी" 

"ओह तो धमकी दे रही हैं तू मुझे" 

"तमीज़ से बात करो आकाश, पत्नी हूँ मैं तुम्हारी कोई नौकर नहीं" छोटी-छोटी बातों पर इस प्रकार के झगड़े आकाश और जाह्नवी में लगभग हर रोज़ ही होते, वजह कोई भी झुकने को तैयार नहीं था, जाह्नवी को लगता घर उसकी कमाई से चलता हैं और आकाश को लगता उसकी कमाई से, क्योकि दोनों की ही कमाई ऊपरवाले की कृपा से अच्छी-खासी थी, लेकिन यही बात इनके झगड़े का कारण बनती, जिसका की इनके बच्चों आठ साल के गर्व और पाँच साल की सिया पर पड़ता, वो बेचारे तो जब भी ये दोनों झगड़ते घर के एक कोने में दुबककर बैठ जाते और कभी-कभी तो रोने भी लगते लेकिन अपनी ही लड़ाई में मशगूल आकाश और जाह्नवी का ध्यान कभी अपने बच्चों की तरफ जाता ही नहीं। लेकिन एक दिन झगड़ा इतना बढ़ गया कि नौबत तलाक तक आ गयी, हुआ यूँ कि रोज़ ही तरह से आकाश ऑफिस से घर आया और कपड़े बदल खाना खाने बैठ गया, लेकिन सब्जी में नमक कुछ ज्यादा हो गया था, जिसकी शिकायत आकाश ने जाह्नवी से की, लेकिन बेहद थकी हुई होने की वजह से जाह्नवी ने भी उसे दो बातें सुना दी। "आकाश, तुम्हे नौकरों के हाथ से बना खाना पसन्द आता नहीं और अगर मैं बनाती हूँ तो चार कमियाँ निकालते हो, तुम अपना खाना खुद क्यों नहीं बना लेते।"  बस फिर क्या था झगड़ा और बढ़ गया, वजह बहुत ही छोटी-सी थी लेकिन यही छोटी-सी वजह अब एक विकराल रूप ले चुकी थी और बात तलाक तक पहुँच गयी, और घबराहट में गर्व के फोन करने पर दो दिन बाद ही आकाश के माता-पिता आ गए। 

"जाह्नवी बेटा, तुम तो समझदार हो तुम ही आकाश से सॉरी बोल दो।" 

"मम्मी जी, बेटा तो आपका भी समझदार होगा, यही बात आप उससे क्यों नहीं कहती।" जाह्नवी ने अपनी सास विभा का दो टूक जवाब दिया 

"जाह्नवी तमीज से बात करो मेरी माँ से" इतने में ही वहाँ पास ही खड़े आकाश ने जाह्नवी को लताड़ दिया।

"आकाश बेटा, शान्ति से बात करो, हम दोनों यहाँ तुम्हारी सुलह करवाने आए हैं।" विभा के कहते ही

"मम्मी, अब बात सुलह से नहीं बनेगी, अब तो तलाक ही होगा, क्योंकि जाह्नवी जैसी बीवी के साथ मैं नहीं रह सकता।" 

"तो मैं कौनसा तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ।" जाह्नवी के कहते ही

"अब बस भी करो तुम दोनों, कम से कम एक बार तो अपने बच्चों के बारे में सोच लो, कि तुम्हारे इन झगड़ों की वजह से उनके दिमाग पर क्या असर होता होगा।" इतने में ही काफी देर से चुपचाप बैठे आकाश के पापा पदम् कुमार ने कहा। 

"लेकिन पापा" आकाश के कहते ही

"चुप, बिल्कुल चुप अब कोई कुछ नहीं बोलेगा, जो मैं बोलूँगा बस वो ही सुनेगा.....आकाश, जाह्नवी तुम्हे इल्म भी हैं कि तुम्हारे ये झगडे तुम्हारे बच्चों की ज़िन्दगी बर्बाद कर रहें हैं, जानते हो जब गर्व ने मुझे फोन किया तो वो कितना घबराया हुआ था......मेरे बच्चों थोड़ा शांति से बैठकर सोचो, और सुलह कर लो, और आगे ज़िन्दगी में लड़-झगड़कर नहीं बल्कि प्यार से रहना सीखो, तुम जो भी करते हो उसका सीधा असर तुम्हारे बच्चों पर पड़ता हैं, इसलिए प्लीज् अपने बच्चों के लिए ही सही मिलजुलकर रहना सीख लो।" 

"पापा जी, आप जो कह रहे हैं मैं सब समझती हूँ, लेकिन आपका बेटा नहीं समझता और मेरे बर्दाश्त करने की भी एक सीमा हैं।" और फिर एक-एक ना जाने कितने ही किस्से जाह्नवी ने अपने सास-ससुर को सुना ड़ाले जो कि इन दोनों के झगड़ों की वजह बने, और जिन्हे सुन पदम् कुमार एक ही नतीजे पर पहुँचे, और वो ये था कि जाह्नवी और आकाश की बराबर की कमाई होने की वजह से आकाश का ईगो हर्ट होना। मुद्दा बहुत ही नाज़ुक था, लेकिन इसका हल निकालना भी ज़रूरी था और बस इसी वजह से पदम् कुमार ने कुछ सोचते हुए एक योजना बनाई, जिसमे अपनी बेटी यानि की आकाश की बहन गुंजन और उसके पति अमित को भी शामिल कर लिया, और उन्हें सभी बातों से अवगत करवा दिया, गुंजन भी उसी शहर में रहती थी, और अच्छा-ख़ासा कमा भी लेती थी, और किस्मत से उसकी शादी भी एक अच्छे घराने और सुलझे हुए विचारों वाले व्यक्ति अमित के साथ हुई दोनों की ज़िन्दगी शांति से गुजर रही थी। 

कुछ दिनों बाद, "भैया, भाभी" गुंजन रोते हुए आई आकाश के गले से जा लगी।" 

"गुंजन क्या हुआ, क्यों रो रही हैं, और तू अकेली आई हैं क्या, अमित नहीं आया साथ" 

"भैया अब मुझे उस आदमी के साथ नहीं रहना।" 

"लेकिन क्यों" 

"आप जानते हैं आजकल अमित मेरे साथ बहुत झगड़ता हैं, कहता हैं मैं अपनी नौकरी छोड़कर घर के काम करूँ, उससे मेरा नौकरी करना बर्दाश्त ही नहीं हो रहा हैं।" 

"लेकिन क्यों गुंजन इससे पहले तो दामाद जी ने तेरे नौकरी करने पर कोई ऐतराज़ नहीं किया।" 

"हाँ पापा, पता नहीं अब उसे क्या हो गया हैं, मुझे लगता हैं कि अब मेरी सैलरी बढ़ गयी हैं शायद इसलिए उसका व्यवहार बदल गया हैं।" 

"दिमाग खराब हो गया हैं उसका, उसे तो बल्कि ये सोचना चाहिए कि अगर तू भी कमाएगी तो इस महंगाई के ज़माने में घर के ख़र्चे चलाने कितने आसान हो जायेंगे, और उसे तो तुझे पर गर्व होना चाहिए की तू घर चलाने में उसका बराबर से साथ निभा रही हैं, हमें औरतों को बराबरी का हक़ देना चाहिए, और इन झगड़ों से बच्चों पर भी तो बुरा असर पड़ता हैं गुंजन, क्यों सही कहा ना मैंने पापा" आकाश पदम् कुमार की ओर देखने लगा। 

"हाँ बेटा बिल्कुल सही कहा तूने, लेकिन ये बात तेरी बहन के ऊपर ही लागू होती हैं या दुनिया की सभी औरतों पर" 

"दुनिया की सभी औरतों पर" आकाश ने धीमे से जवाब दिया और पास ही खड़ी जाह्नवी की और बढ़ गया, "मुझे माफ़ करदो जाह्नवी मैं तुम्हारा गुनाहगार हूँ।" आकाश को अपनी गलती का अहसास हो चुका था। 

"इसी बात पर एक ज़बरदस्त पार्टी हो जाए आकाश भैया" इतने में ही वहाँ अमित भी आ गया। 

"अमित तुम यहाँ, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी बहन के साथ झगड़ा करने की।" आकाश अपने सामने अमित को देख उस पर चिल्लाने लगा। 

"शांत हो जाइये भैया, अमित ने कुछ नहीं किया हैं, ये तो आपको सबक सिखाने के लिए हमने पापा के कहने पर एक छोटा-सा नाटक किया था, लेकिन आपको इतनी जल्दी अपनी गलती का अहसास हो जायेगा इस बात की उम्मीद नहीं थी।" गुंजन के कहते ही,

"ओह, तो अब मैं सब समझ गया, सही बात हैं बहुत ज़रूरी था मुझे सबक सिखाना, क्योकि दिमाग ख़राब हो गया था मेरा, जो मैं अपनी बीवी को खुद से कम आंक रहा था, आप सबका धन्यवाद मेरा परिवार टूटने से बचाने के लिए।" 

"ये क्या भैया सूखा-सूखा धन्यवाद, कम से कम एक छोटी-सी पार्टी तो बनती हैं।" अमित के कहते ही,

"हाँ भैया अमित सही कह रहा हैं, क्यों भाभी आप भी तो कुछ बोलो" गुंजन के कहते ही

"हाँ आकाश गुंजन और अमित जी सही कह रहे हैं, क्यों ना आज हम सब किसी फाइव-स्टार होटल में खाना खाने चले।" 

"चलो ठीक हैं तो फिर आज एक छोटा-सा सेलिब्रेशन हो ही जाए।" आकाश के इतना कहते कहते ही पूरा परिवार ख़ुशी से उछल पड़ा, जिसे देख आकाश व जाह्नवी दोनों की ही आँखे नम गयी और दोनों ने अपने बच्चों गर्व व सिया को गले से लगा लिया। 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

O.T.P. / ओ. टी. पी. (Story On Cyber Crime)

Galat Kaun Saas Ya Bahu ? / गलत कौन सास या बहु ? (Story On Society )

Premi Sang Katl / प्रेमी संग कत्ल ( Story On Murder)