O.T.P. / ओ. टी. पी. (Story On Cyber Crime)

 

     मुंबई के कांदिवली इलाके में स्थित एक अपार्टमेंट की पाँचवी मंजिल के एक फ्लैट में रहने वाली मिसेज दीवान के घर पर उनकी ही बिल्डिंग में रहने वाली महिलाओं की किट्टी पार्टी चल रही है, सभी महिलायें सजधज कर आयी हैं, क्योंकि ये ही तो वो स्थान है जहाँ महिलाओं द्वारा अपनी साड़ी, सूट एवं जेवरों का प्रदर्शन किया जा सकता है, और इसी प्रदर्शन का दौर उस पार्टी में अभी शुरू हुआ ही था कि अरे वाह मिसेज दीवान, क्या बात है, आपका ये सेट तो जँच रहा है आप पर पार्टी में आयी मिसेज खन्ना ने पार्टी की मेजबानी कर रही मिसेज दीवान से कहा। 

    “बिल्कुल, जँचेगा तो सही ना, मेरा बेटा जो लेकर आया है।” मिसेज दीवान ने गले में पड़े सेट को सहलाते हुए घमंड से कहा।

    “बड़ी किस्मत वाली है आप मिसेज दीवान, जो ऐसा होनहार बेटा है आपका” इसी दौरान पार्टी में आयी एक अन्य महिला मिसेज रावत बोली।

     “सच कहा आपने मिसेज रावत......वैसे कीमत क्या होगी इस सेट की मिसेज दीवान” इतने में मिसेज खन्ना ने पूछा।

      “इसका अंदाजा तो आप स्वंय लगाओ।” मिसेज दीवान हँसते हुए बोली।

      “मेरे हिसाब से 3 से साढ़े 3 लाख का होगा।” ये जवाब कुछ दूर बैठी मिसेज शर्मा की ओर से आया।

      “5 लाख” मिसेज दीवान के कहते ही,

      “5 लाख !” मिसेज शर्मा ने अचंभित होते हुए कहा।

      ‘जी बिल्कुल”

      “मुझे यकीन नहीं हो रहा।“

     “मिसेज शर्मा यकीन कर लीजिए, ये वाकई में 5 लाख का ही है।” मिसेज दीवान ने पूरे विश्वास के साथ कहा।

      “हमारी तो कीमत सुनने के बाद सुनने-समझने की शक्ति ही जा चुकी है, क्या बोले, क्या नहीं, कुछ समझ नहीं आ रहा।“ इसी दौरान मिसेज खन्ना बोली। 

    “मैं तो लालची हो रही हूँ, ऐसे ही एक सेट के लिए, सच कहूँ तो मुझे जल्द से जल्द बिल्कुल ऐसा ही एक सेट चाहिए।” इतने में मिसेज रावत ने अपनी मंशा सबके सामने रखी, जिसका जवाब काफी देर से चुप बैठी मिसेज गुप्ता ने दिया।

    “मत भूलिए मिसेज रावत ये सेट 5 लाख का है, शायद आपकी आर्थिक स्थिति से बहुत ज्यादा”

   “तो पेमेंट आप कर देना मिसेज गुप्ता।” तुरंत मिसेज रावत ने कटाक्ष किया

   “इससे अच्छा मैं अपने लिए एक ऐसा ही सेट ना खरीद लूँ।” मिसेज गुप्ता द्वारा कटाक्ष का जवाब देते ही, 

   “अब बस भी करो, आप लोग सारा वक्त इस बेकार की बहसबाज़ी में ही बर्बाद करना चाहती हो, या फिर आज की किट्टी पार्टी शुरू करें।” इतने में माहौल में आ चुकी गर्माहट को शांत करने के इरादे से मिसेज दीवान ने कहा।

   “हाँ-हाँ मिसेज दीवान आप सही कह रही है, चलो शुरू करो भई तंबोला खेलना।” इतने में मिसेज खन्ना ने कहा, और मौजूद सभी महिलायें हँसी-मज़ाक करते हुए किट्टी-पार्टी इन्जॉय करने लगी।

 

    पार्टी खत्म होने बाद जहाँ सभी महिलायें अपने-अपने घर पहुँच घर के काम-काज में व्यस्त हो गयी, वहीं दूसरी ओर मिसेज रावत के दिमाग में लगातार वैसा ही एक सेट खरीदने का ख्याल चल रहा था। और इसी के तहत उन्होंने ऑनलाइन आर्टफिशल सेट देखने शुरू कर दिए, क्योंकि एक सरकारी दफ्तर में काम करने वाले अपने पति मि. रावत द्वारा असली सोने का सेट दिलवाना तो उन्हे नामुमकिन लग रहा था।

    “अरे ये क्या, ये तो बेहद ही सुंदर सेट है, मिसेज दीवान के सेट से भी सुंदर, और बिल्कुल असली लग रहा है, और कीमत भी वाजिब है इसकी तो, केवल दस हजार का ही तो है, ये तो मैं खरीद ही सकती हूँ, और इसके बारे में रावत जी को बताने की भी जरूरत नहीं, और इसका पेमेंट भी मैं अपने पास रखे पैसों से ही करूँगी, क्योंकि इतनी बचत तो मैंने की ही है, अगर ऑनलाइन पेमेंट किया तो मि. रावत को पता चल जाएगा, और फिर ये फिजूलखर्ची ना करने का का भाषण देने लगेंगे, लेकिन इस ऑनलाइन साइट का नाम पहले कभी सुना नहीं, कोई बात नहीं शायद ये कोई नई साइट खुली है, वैसे मुझे इससे क्या, मुझे तो मेरा मनपसंद सेट मिल गया, अब फटाफट इसे ऑर्डर कर देती हूँ, वैसे भी इसकी डिलीवरी एक हफ्ते बाद होने वाली है।” ऐसा ख्याल आते ही मिसेज रावत के होंठों पर मुस्कान आ गयी, और उन्होंने साइट की बिना कोई जानकारी निकाले तुरंत वो सेट ऑनलाइन ऑर्डर कर दिया।

 

    अगले दिन, “क्या रक्षा रावत यहीं रहती है?” मिसेज रावत के फ्लैट का खुला हुआ दरवाजा देख बाहर खड़े डिलीवरी बॉय ने पूछा।

   “हाँ, मैं ही हूँ मिसेज रक्षा रावत”

   “आपके लिए पार्सल है, ओ.टी.पी. लगेगा।” डिलीवरी बॉय के कहते ही,

   “पार्सल ! मैंने तो कुछ ऑर्डर नहीं किया।”

   “आपने ज्वेलरी ऑर्डर की थी?” डिलीवरी बॉय द्वारा पूछते ही,

   “हाँ लेकिन वो तो एक हफ्ते बाद आने वाली थी।” मिसेज रावत ने कहा।

   “हाँ आपकी बात सही है, लेकिन मुझे आज इस इलाके के तीन-चार पार्सल डिलीवर करने थे, तो आपका भी ले आया, अब आप फटाफट ओ. टी. पी. दे दीजिए।

   “ओ.टी.पी. तो नहीं आया मेरे मोबाईल पर” मिसेज रावत ने मोबाईल पर ओ.टी.पी. ढूँढते हुए कहा।

   “आप अपना फोन मुझे दीजिए, मैं चेक करता हूँ, आपने पेमेंट के लिए कैश ऑन डिलीवरी का ऑप्शन सिलेक्ट किया था, तो आप इतने में पेमेंट के लिए कैश ले आइए।” मिसेज रावत डिलीवरी बॉय के हाथ से आर्टफिशल सेट का बॉक्स अपने हाथों में लेने के लिए इस हद तक उत्साहित थी कि उन्होंने बिना वक्त गवायें तुरंत अपना मोबाईल डिलीवरी बॉय के हाथ में थमा दिया, और खुद पैसे लेने अपने रूम में चली गयी।

   “हो गया, ये लीजिए आपका पार्सल” और ओ.टी.पी मिलते ही डिलीवरी बॉय पेमेंट ले, पार्सल मिसेज रावत को थमा चला गया।

   “ओह गॉड, आ गया मेरा सेट, अब मैं इसको असली सेट बताकर सबके सामने डींगें हाँकूँगी, मिसेज दीवान का सेट 5 लाख का था ना, मैं इसे 8 लाख का बताऊँगी, दिखा दूँगी मिसेज गुप्ता को कि मेरी आर्थिक स्थिति क्या है।” अभी मिसेज रावत खयाली पुलाव पकाते हुए पार्सल खोलने की तैयारी कर ही रही थी कि इतने में उनके मोबाईल की रिंग बज उठी, फोन मि. रावत का था,

    “हेलों रक्षा”

    “हाँ जी बोल रही हूँ।“

    “कहाँ हो तुम?”

    “जी घर पर”

    “और तुम्हारा फोन कहाँ है?’

    “मेरे हाथ में”

    “अभी थोड़ी देर पहले तुमने अपना फोन किसी को दिया था?” मि. रावत के मुँह से ये सवाल सुन मिसेज रावत घबरा गयी, वो मि. रावत को कतई नहीं बताना चाहती थी कि उन्होंने ऑनलाइन सेट मँगवाया है, और ओ.टी.पी. के लिए फोन डिलीवरी बॉय को दिया था।

    “नहीं, बिल्कुल नहीं, क्यों क्या हुआ?” मिसेज रावत के कहते ही,

    “तो क्या तुमने किसी अनजाने लिंक पर क्लिक किया था।”

    “अरे बाबा ऐसा कुछ नहीं हुआ है, अब आप बतायेंगे भी कि हुआ क्या है, या यूँ ही सवाल पूछते रहेंगे।” मिसेज रावत ने अपने पति के सवालों से परेशान हो खीजते हुए पूछा।

    “तुम्हारे अकाउंट से अभी 50,000 रु निकल गए हैं।“ अकाउंट से पैसे निकलने की बात सुन मिसेज रावत के पैरों तले जमीन खिसक गयी।

    “हो सकता है आपको कुछ गलतफहमी हुई हो।” मिसेज रावत डरते-डरते बस इतना ही कह पायी थी कि...

    ‘मैं अभी घर आ रहा हूँ, देखते है क्या हुआ है।” और इतना कह मि. रावत ने तुरंत फोन रख दिया, लेकिन दूसरी ओर मिसेज रावत की हालत काफी खराब हो चुकी थी, क्या करे, क्या ना करे, कुछ समझ नहीं पा रही थी।

   ”हे प्रभु, ये क्या हो गया, क्या वो कंपनी कोई फ्रॉड थी, हे भगवान इस रक्षा की रक्षा करो।” मिसेज रावत अपनी गलती पर पछताते हुए लगातार भगवान का नाम जपने लगी।

 

   कुछ देर बाद मि. रावत दनदनाते हुए घर में घुसे और, “रक्षा सच सच बताओ कि आखिरकार तुमने क्या कांड किया है।”

    “मैंने कुछ गलत नहीं किया।”

   “मैं जानता हूँ रक्षा तुमने कुछ गलत नहीं किया होगा, लेकिन गलती अनजाने में भी तो हो सकती है, मेरा मतलब है गलती से किसी के हाथ में फोन दे दिया हो, या फिर किसी पब्लिक प्लेस पर रख कर भूल गयी हो, या फिर अनजाने में किसी लिंक पर क्लिक कर दिया हो, ऐसा कुछ भी हुआ हो तो याद करके मुझे बताओ।” मि. रावत तो अपनी बात एक साँस में कह गए, लेकिन दूसरी ओर मिसेज रावत की साँसे अटक गयी, क्या कहे, क्या ना कहे, इसी असमंजस में वो कुछ देर तो चुपचाप बगले झाँकती रही, फिर...”

   “सुनिए जी, मैं आपको सब बताती हूँ, बस आप नाराज़ मत होना, दरअसल हुआ ये था कि......” और फिर मिसेज रावत ने मि. रावत को किट्टी पार्टी में जो कुछ हुआ तब से लेकर, कुछ देर पहले सेट डिलीवर होने तक का सारा वृतांत विस्तारपूर्वरक सुना डाला।

   “रक्षा......” और पूरा किस्सा सुन मि. रावत इतनी जोर से क्रोधित स्वर में चिल्लाये कि मिसेज रावत काँपने लगी, और बस इतना ही कह पायी कि... 

  “सॉरी”

   “रक्षा, मैंने तुम्हारे अकाउंट में पैसे इसलिए डलवा रखे थे कि अगर कभी कोई ईमर्जन्सी आ जाए, और तुम्हारे पास कैश ना हो तो तुम उन पैसों का इस्तेमाल कर सको, लेकिन तुमने तो अपनी बेवकूफी की वजह से पूरे 50, 000 की चपत लगवा दी मुझे, और ऐसी भी क्या बेसब्री थी सेट खरीदने की, अरे तुमसे कितनी बार कहा है कि आर्थिक रूप से किसी की भी बराबरी मत किया करो, हम जैसे भी है, जो भी है अच्छे हैं।” कहते-कहते मि. रावत अपना सिर पकड़ वही पास रखे सोफ़े पर धम से बैठ गए।

   “अब क्या हो सकता है?” मिसेज़ रावत ने डरते-डरते पूछा। 

   “होना क्या है, साइबर क्राइम ब्रांच जाना होगा शिकायत दर्ज करवाने, चलो तुम भी साथ, और वो पार्सल भी साथ ले चलो।” एक लंबी गहरी साँस लेते हुए मि. रावत बोले, और फिर कुछ ही देर में दोनों पति-पत्नी साइबर क्राइम ब्रांच के लिए निकल गए।

 

   कुछ देर बाद, “मिसेज रावत क्या आपने अभी तक ये पार्सल खोलकर नहीं देखा?” मि. और मिसेज रावत द्वारा पूरा किस्सा सुनने के बाद क्राइम ब्रांच के ऑफिसर ने सामने टेबल पर रखे पार्सल को देख पूछा।

    “जी नहीं वक्त ही नहीं मिला।”

    “हम्म” और इतना कह वही ऑफिसर पार्सल खोलने लगे, लेकिन उसमे कोई सेट नहीं था, बल्कि उसमे तो छोटे-छोटे पत्थर रखे हुए थे, जिन्हे देख मिसेज रावत ने अपना सिर पकड़ते हुए कहा,

   “हे ईश्वर 50,000 नहीं, बल्कि पूरे 60,000 का चुना लगा गया धोखेबाज आदमी”

   "तो आपको क्या लगा था की वो आपको आपका मनपसंद सेट देकर गया है।" सामने बैठे ऑफिसर ने व्यंग्य कसा। 

   “अब क्या हो सकता है सर?” इतने में मि. रावत ने पूछा,

  “आपकी रिपोर्ट लिख ली गयी है, इंतजार कीजिए, गुनाहगारों का पता चलते ही आपको इत्तला कर दी जाएगी, वैसे कोई उम्मीद मत रखिएगा, क्योंकि ये लोग बहुत ही शातिर होते हैं, और लोगों की आतुरता, एवं बुद्दिहीनता का फायदा उठाते हैं, जैसे कि मिसेज रावत का फायदा उठाया।” क्राइम ब्रांच के ऑफिसर द्वारा कहते ही,

    “अब जो हो गया, सो हो गया, लेकिन आगे से ऐसी बेवकूफी ना हो इस बात का ख्याल रखेंगे, फिलहाल हम चलते हैं, हमारी मदद करने के लिए धन्यवाद।” और इतना कह मि. रावत इस उम्मीद के साथ मिसेज रावत का हाथ पकड़ लड़खड़ाते हुए कदमों से साइबर क्राइम ब्रांच से बाहर निकल गए, कि जल्द ही उन्हे इस ब्रांच से खुशखबरी मिलेगी।  

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