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नवंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

kaashi (Story On A Girl)

" काशी बेटा मैं मंदिर जा रहा हूँ , बाज़ार से कुछ मँगवाना हो तो बता दो।" दामोदर जी ने रसोई में खाना पका रही अपनी बेटी से पूछा।    " नहीं बाबा कुछ नहीं लाना , लेकिन आप थोड़ा जल्दी आ जाइएगा , अपने दोस्तों के साथ गप्पें लड़ाने मत बैठ जाना।" काशी के   कहते ही ,  " अरे पगली वो तो मेरे दोस्त मुझे ज़बरदस्ती रोक लेते हैं , वरना मैं तो सीधा घर ही आऊँ।"   ' अब रहने भी दो बाबा , सच से आप भी अच्छी तरह से वाकिफ़ हो और मैं भी" काशी ने दाल में तड़का लगाते हुए कहा।    " हाँ अब रहने भी दे , बाप हूँ तेरा और बाप की जासूसी करती हैं , चल अब आकर दरवाज़ा बंद कर ले , नहीं तो राधा की बिल्ली आ जायेगी।" और फिर काशी दरवाज़ा बन्द कर फिर से खाना बनाने बैठ गयी।    काशी , दामोदर जी की इकलौती बेटी हैं , उसकी माँ   का देहांत उसके बचपन में ही हो गया   था , जब से   घर में केवल वो और उसके बाबा   ही रहते हैं , पहले उसके बाबा उसके प्रति माँ का फ़र्ज़ निभाते थे और अब वो निभाती हैं। यूँ तो काशी अब बीस साल की होने को आई , और ज़ाहिर सी बात हैं दामोदर जी को उसके विवाह की च...

Vicharon Ka Takraav (Story On A Family)

" निशा , इस साल अक्टूबर में सोनल पूरे अठाईस साल की हो जाएगी , और तुमने अभी तक उसके लिए लड़का देखना भी शुरू नहीं किया , क्या बेटी को   ज़िन्दगी भर कुँवारा रखने का इरादा हैं तुम्हारा" निशा की सास शारदा ने आज सुबह-सुबह ही उसे ताना मार दिया , लेकिन वो भी कहाँ चुप बैठने वाली थी।   " माँजी सबसे पहली बात तो ये हैं कि सोनल मेरी अकेली की बेटी नहीं हैं , आपके बेटे की भी बेटी हैं , इसलिए आप जो ये बार-बार सोनल को लेकर मुझे ताने मारती हैं बंद कीजिए , और रही उसकी शादी की बात तो जब वो शादी के लिए तैयार होगी कर देंगे।" निशा के कहते ही ,  " अरे ये तो हद ही हो गयी , अगर लड़की पूरी ज़िन्दगी तैयार नहीं हुई तो , उसे हमेशा कुँवारा ही बैठाकर रखोगे क्या ?"  ' दादी , अगर मैं कुँवारी बैठी भी रही तो क्या फ़र्क पड़ता हैं , अरे अच्छा ख़ासा कमाती हूँ , बोझ नहीं हूँ किसी के ऊपर" इतने में ही वहाँ सोनल आ गयी।   " गज़ब जुबान चलती हैं दोनों ही माँ बेटियों की , मेरे तो बेटे की किस्मत ही फूटी निकली।"   " माँजी , इसमें जुबान चलाने वाली क्या बात हैं , जो सच्चाई हैं वो ही तो कही ...