Shaadi Mein Dhokha (Story On Fraud In Marriage)
सजाए थे ख्वाब संग तेरे जिंदगी गुजारने के देख तेरी बेवफ़ाई हर पल आंसू बहा रहे हैं हम " सुधा तुम अपना काम करके आज जल्दी घर वापिस चली जाना, और हाँ शाम का खाना बनाने के लिए आने की ज़रूरत नहीं हैं , कुछ खाने का मन होगा तो मैं खुद ही बना लूँगी।" " क्या हुआ मेमसाब मुझसे कोई गलती हुई हैं क्या ?" " अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं हैं, बस आज मैं अकेली रहना चाहती हूँ , थोड़ा-सा सिर में दर्द हैं तो आराम भी कर लूँगी।" " मेमसाब मैं आपके सिर में तेल की मालिश कर देती हूँ।" " नहीं सुधा तुम जाकर अपना काम करो , मैं ठीक हूँ।" सुधा ने भी तेल लगाने की ज्यादा ज़िद नहीं की और अपने काम में लग गयी। शालिनी भी उदास और गुमसुम-सी अपने कमरे में जाकर लेट गई, वो आज का ही तो दिन था जब शालिनी की दुनिया ही उजड़ गयी थी , कैसे भूल सकती हैं वो इस दिन को , खुशियाँ भी इसी दिन नसीब हुई और ख़ुशियों को ग्रहण भी इसी दिन लगा , आज इस ग्रहण को लगे पूरे बीस साल हो चुके थे। " आशा , अरी ओ आशा , कहाँ चली गयी? देख तेरे लिए खुशखबरी लाई हूँ ।" " आई मौसी , बोलो क्या...