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मार्च, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Holi Ke Rang, pariwar ke sang (Story On Family Holi)

वैसे तो होली का त्यौहार हर साल ही आता हैं , लेकिन इस बार मोहिनी के घर पर हो रही तैयारियाँ देख कर ऐसा लग रहा हैं जैसे की कुछ ख़ास बात हैं , जी हाँ ख़ास बात तो होगी ही ना आज मोहिनी की बड़ी बहू शिप्रा की पहली होली जो है , शिप्रा को मोहिनी ने पहली बार दो साल पहले अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ शादी में देखा था , बस तभी से फैसला कर चुकी थी की अगर अपने घर की बहू बनाएगी तो केवल शिप्रा को , अच्छी बात तो यह थी कि उसके बड़े बेटे विशाल को भी शिप्रा अच्छी लगी थी , लेकिन शिप्रा का परिवार शादी उसकी पढ़ाई ख़त्म होने के बाद ही करना चाहता था , और अभी उसकी पढ़ाई ख़त्म होने में दो साल का वक़्त बाकी था इसलिए मोहिनी और उसके परिवार को इंतज़ार करना पड़ा , मगर आज तो मोहिनी की ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था , यह होली का त्यौहार ढेरों खुशियाँ जो साथ लाया था। ' शिप्रा बेटा , आज तुम्हारी शादी को एक महीना पूरा हो गया है , और आज होली भी हैं , मैं तुम्हे कुछ उपहार देना चाहती हूँ , लेकिन तुम्हारी पसन्द का , बोलो क्या चाहिए तुम्हे ?' मोहिनी के पूछते ही , " माँ मुझे अभी तो कुछ नहीं चाहिए , लेकिन आप वादा कीजिए कि मैं आपस...

Maa Ka Dil (Story On A Family)

शाम के तक़रीबन पाँच बजे थे , मैं ऑफिस से लौट अपने लिए एक कप चाय बना अभी बालकनी में आकर बैठी ही थी की , अचानक से मेरे फोन की   घंटी बज उठी , फ़ोन मेरे बेटे अर्जुन का था , जो दो साल पहले ही मुंबई की   एक मल्टी-नेशनल कंपनी में एच. आर. ट्रेनी के पद पर नियुक्त हुआ था , अर्जुन का दिल्ली के एक बिज़नेस कॉलेज से   एम. बी. ए. करने के   बाद मुंबई की इस मल्टी-नेशनल कंपनी में प्लेस्मेंट हुआ था , फिलहाल वो वहाँ   एग्ज़ीक्यूटिव का कार्यभार संभाल रहा हैं। ' हैलो , अर्जुन '  मेरे कहते ही ,  ' हैलो मम्मी , प्रणाम , कैसी हैं आप '  ' बेटा मैं ठीक हूँ , तू बता कैसा हैं ?'  ' अच्छा हूँ , आपको कुछ बताना था। ' अर्जुन के कहते ही ,  ' हाँ बोल ना बेटा , क्या बात हैं। '  ' मम्मी , दरअसल बात ये हैं कि...... ' कहते-कहते अर्जुन रुक गया।   ' क्या हुआ बेटा , कोई परेशानी हैं क्या , मैं आऊँ वहाँ ?'  ' नहीं मम्मी , ऐसी कोई बात नहीं हैं , वो....मैंने शादी कर ली हैं। ' अर्जुन के कहते ही ,  ' क्या! क्या कहा तूने , शादी कर ली हैं , अरे बेटा मज़ाक करने के लिए तुझ...

Aurat Ki Mazboori ( Story On Domestic Abuse)

' आंटी , आंटी , मेरी माँ को बचा लीजिए , नहीं तो वो मर जाएगी ' दरवाज़ा खुला देख तक़रीबन बारह-तेरह साल की एक लड़की मेरे घर में घुसती चली गयी।   ' अरे , अरे कौन हो तुम , और ऐसे कैसे घर में घुसती चली जा रही हो। ' मैंने उसे रोकने की कोशिश करते हुए जैसे ही कहा ,  ' आंटी मैं मणि '  ' मणि , कौन मणि मैं नहीं जानती किसी मणि को ' मेरे कहते ही ,  ' आंटी मैं आपके घर पर काम करने वाली लता की बेटी मणि '  ' मणि तुम! ये क्या हाल बना रखा तुमने , ये फटी हुई फ्रॉक , टूटी चप्पल , बिखरे हुए बाल। ' मैंने अपनी कामवाली लता   की बेटी को पहचानने की   कोशिश करते हुए कहा।   ' आंटी मेरे बारे मैं बाद में बात करेंगे , पहले आप फटाफट गाड़ी निकालो , मम्मी को अस्पताल लेकर चलना हैं , नहीं तो वो   मर जाएगी। ' कहते-कहते मणि रोने लगी।   ' लेकिन हुआ क्या हैं। ' मणि मुझे अनसुना कर मेरा हाथ पकड़ ज़बरदस्ती गाड़ी की और ले गयी , और मैं भी ज्यादा कुछ ना पूछते हुए गाड़ी की चाबी उठा और जल्दी से घर को लॉक कर उसके साथ चल पड़ी , लेकिन जैसे ही हम लता के घर पहुँचे तो मैं ...