Valentine Day In Old Age Home ( Story On Valentine''s Day)
”अमोल जी आज मौसम कितना सुहावना है ना, जी चाहता है की समय यही रुक जाए, और मैं यूँ ही इस मौसम का आनंद लेती रहूँ।“ वृद्धाश्रम के बगीचे में बैठी 55 वर्षीय सुधा ने जैसे ही वहीं के एक साथी 60 वर्षीय अमोल जी से कहा, “अकेली-अकेली लुत्फ उठाना चाहती हो इस खूबसूरत मौसम का” “अरे नहीं नहीं मेरा वो मतलब नहीं था, आप भी लीजिए ना इस मनभावन मौसम के मजे” “सो तो लूँगा ही, लेकिन तुम साथ रहोगी तो ज्यादा अच्छा लगेगा।“ अमोल जी ने कुछ इस अंदाज में कहा कि सुधा जी के गाल शर्म से लाल हो गए। “वाह क्या बात है, सच में सुधा जी आप शरमाते हुए बेहद ही खूबसूरत लगती है, वैसे तो इस उम्र में आपकी सुंदरता हर वक्त गजब ढाती है, लेकिन शर्माना तो मेरी जान ले लेता है।“ “अमोल जी आप अपनी हद पार कर रहे है, मैं आपकी शिकायत कर सकती हूँ।“ “हाँ तो करिए ना, रोका किसने है, इस बहाने कुछ लम्हों के लिए ही सही आपकी जुबां पे मेरा नाम तो आएगा।“ अमोल जी का सुधा जी को छेड़ना जारी था। “आप नहीं मानेंगे, मैं ही चली जाती हूँ यहाँ से” और इतना कह सुधा जी जैसे ही उठकर अपनी वृद्धाश्रम की महिला साथियों के पास जा बैठी, तो एक महिला...