Kya Yahi Jeevan Hai / क्या यही जीवन है ( Story On Family)
होंठों पर एक सुकून भरी मुस्कान लिए अपने झुर्रियों भरें हाथों से cast iron की कढ़ाई में लड्डुओं के लिए बेसन भूनते हुए ना जाने क्या सोचते हुए सुगना बार बार ‘पगला-पगला’ कह पड़ती, ‘क्या हुआ जी, क्या सोच रही हो?“ इतने में वहीं पास बैठे सुगना के पति प्रताप ने पूछा। “कुछ नहीं शरद का बचपन आँखों के आगे आ गया जी” “हम्म, तुम सही कह रही हो, अब तो उसके बचपन की यादें ही शेष है, जो कि ना जाने कब फुर्र से उड़ गया, और साथ ले गया हमारे शरद को हमसे दूर” इतना कह प्रताप भावुक हो गये। “बात तो सही है आपकी शरद के पापा, बचपन में बच्चों को हमारी दरकार तो रहती है, लेकिन जैसे ही बड़े होते है खुद-ब-खुद ही दूरियाँ बन जाती हैं।“ “हाँ लेकिन पूरे पाँच साल बाद तुम्हारा लाड़ला अमेरिका से आ रहा है शरद की माँ, इसलिए खुशियाँ मनाओ, और भूल जाओ पिछला सब” प्रताप ने चहकते हुए जैसे ही कहा, “हाँ-हाँ अब तो हमारे पोते भी बड़े हो गए होंगे पूरे तीन साल के......आप जानते है तीन साल पहले जब शरद ने बताया था कि अम्मा जुड़वा बेटे हुए है तो, मैं तो घबरा ही गयी थी कि बहु दो-दो बच्चों को कैसे संभालेगी, लेकि...