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मई, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Aise Bhi Dost Hote Hain ! / ऐसे भी दोस्त होते हैं ! (Story On Friendship)

      जून के महीनें का पहला हफ्ता चल रहा था, गर्मी इतनी तेज पड़ रही थी कि सहन ना हो, घर से बाहर निकलो तो लू के थपेड़े बदन झुलसा देते, इस भीषण गर्मी के प्रकोप से बचने के लिए जयपुर शहर के शास्त्री नगर इलाके में किराए के घर में रहने वाली पल्लवी सुबह ही नाश्ता, और अपने पति जतिन जो कि एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर की पोस्ट पर कार्यरत है, का टिफ़िन लगाने के साथ-साथ दोपहर तक के रसोई के सारे काम निपटा अपने कमरे में पेंटिंग करने बैठ जाती। जतिन और पल्लवी ने घरवालों की मर्जी के खिलाफ जाकर घर से भागकर अन्तरजातीय शादी की थी, जिस वजह से दोनों के ही परिवारवालों ने इनसे नाता तोड़ लिया।     पल्लवी, जयपुर के एक प्राइवेट स्कूल में आर्ट टीचर है, फिलहाल स्कूल में समर-वैकैशन चलने की वजह से वो घर पर ही रहती, और अपना मनपसंद काम पेंटिंग कर वक्त गुजारती, जतिन, और पल्लवी के कोई औलाद नहीं होने की वजह से दोनों पति-पत्नी का नौकरी से बचा हुआ वक्त या तो खुद के लिए, या फिर एक दूसरे के लिए होता, बच्चा नहीं होने का कारण दोनों ही अक्सर निजी बताते।     दोनों ही पति-पत्नी की ज़िंदगी की गाड़ी ...

Galat Kaun Saas Ya Bahu ? / गलत कौन सास या बहु ? (Story On Society )

    पिछले हफ्ते की बात है, मैं, और मेरी कॉलेज की दोस्त वाणी, जो कि फिलहाल मेरी   ऑफिस कलीग भी है, उसके ससुराल के ड्रॉइंग रूम में बैठ ऑफिस प्रोजेक्ट पर कुछ विचार-विमर्श कर रहे थे।     “काजल, तू बैठ, मैं चाय-नाश्ता बना लाती हूँ।” विचार-विमर्श के दौरान वाणी बोली।      “रहने दे” मैंने औपचारिकतावश कहा।      “अरे, 10 मिनिट लगेंगे बनाने में, जब तक तू लैपटॉप पर PPT बनानी शुरू कर।” इतना कह वाणी रसोई में चाय बनाने चली गयी, लेकिन उसके जाते ही एक लाभग 60-65 वर्षीय महिला, कॉटन की साड़ी पहने, जिसके सिर के अधिकतर बाल सफेद थे, ड्रॉइंग-रुम में आ मेरे सामने बैठ गयी।      “मैं वाणी की सास” उन्होंने अपना परिचय देते हुए कहा।      “जी, नमस्ते” अपनी जगह से उठ जैसे ही मैं उनके पाँव छूने के लिए झुकी, तो उन्होंने पूछा,     “काजल, यही नाम है ना तुम्हारा?”     “जी आंटी जी” मैंने बड़े ही सम्मानपूर्वक तरीके से जवाब दिया।     “हम्म, वाणी की कॉलेज की दोस्त हो, और फिलहाल उसके साथ ए...

Swaal Astitv Ka / सवाल अस्तित्व का ( Story On Women)

         इंदौर की एक जानी-मानी कॉलोनी में बने एक बँगलें में आज काफी चहल-पहल है, कारण उस घर के मालिक 55 वर्षीय गौतम जी, एवं उनकी पत्नी 50 वर्षीय कुमकुम, की बेटी अंजना आज शादी के बाद पहली बार पगफेरे की रस्म के लिए आ रही है, जिसकी शादी दो दिन पहले इंदौर के ही एक परिवार में उस घर के मालिक अजित सिंह जी के बड़े बेटे प्रणव के साथ सम्पन्न हुई थी, जो कि एक प्राइवेट बैंक में ऑफिसर के पद पर कार्यरत है।                  “वंदना, आरती की थाली तैयार की, या नहीं?” कुमकुम ने अपनी बहु से आवाज लगाकर पूछा।      “कर रही हूँ मम्मी जी”     “हम्म, थोड़ा जल्दी करो, कपिल, अंजना को लेकर आता ही होगा।” कपिल, कुमकुम का बड़ा बेटा, एवं वंदना का पति है।     कुछ देर बाद, “मम्मी....” इतने में बाहर से 25 वर्षीय सामान्य कद-काठी, गोरे रंग के स्वामित्व वाली अंजना की आवाज आयी।     “रुक, रुक बाहर दरवाज़ें पर ही खड़ी रह, पहले तेरी आरती उतारूँगी, उसके बाद अंदर आना।” इतने में कुमकुम ने अंजना को दरवाजे पर रोकते ह...