Aise Bhi Dost Hote Hain ! / ऐसे भी दोस्त होते हैं ! (Story On Friendship)
जून के महीनें का पहला हफ्ता चल रहा था, गर्मी इतनी तेज पड़ रही थी कि सहन ना हो, घर से बाहर निकलो तो लू के थपेड़े बदन झुलसा देते, इस भीषण गर्मी के प्रकोप से बचने के लिए जयपुर शहर के शास्त्री नगर इलाके में किराए के घर में रहने वाली पल्लवी सुबह ही नाश्ता, और अपने पति जतिन जो कि एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर की पोस्ट पर कार्यरत है, का टिफ़िन लगाने के साथ-साथ दोपहर तक के रसोई के सारे काम निपटा अपने कमरे में पेंटिंग करने बैठ जाती। जतिन और पल्लवी ने घरवालों की मर्जी के खिलाफ जाकर घर से भागकर अन्तरजातीय शादी की थी, जिस वजह से दोनों के ही परिवारवालों ने इनसे नाता तोड़ लिया। पल्लवी, जयपुर के एक प्राइवेट स्कूल में आर्ट टीचर है, फिलहाल स्कूल में समर-वैकैशन चलने की वजह से वो घर पर ही रहती, और अपना मनपसंद काम पेंटिंग कर वक्त गुजारती, जतिन, और पल्लवी के कोई औलाद नहीं होने की वजह से दोनों पति-पत्नी का नौकरी से बचा हुआ वक्त या तो खुद के लिए, या फिर एक दूसरे के लिए होता, बच्चा नहीं होने का कारण दोनों ही अक्सर निजी बताते। दोनों ही पति-पत्नी की ज़िंदगी की गाड़ी ...