Galat Kaun Saas Ya Bahu ? / गलत कौन सास या बहु ? (Story On Society )

   पिछले हफ्ते की बात है, मैं, और मेरी कॉलेज की दोस्त वाणी, जो कि फिलहाल मेरी  ऑफिस कलीग भी है, उसके ससुराल के ड्रॉइंग रूम में बैठ ऑफिस प्रोजेक्ट पर कुछ विचार-विमर्श कर रहे थे।

   “काजल, तू बैठ, मैं चाय-नाश्ता बना लाती हूँ।” विचार-विमर्श के दौरान वाणी बोली।

    “रहने दे” मैंने औपचारिकतावश कहा।

    “अरे, 10 मिनिट लगेंगे बनाने में, जब तक तू लैपटॉप पर PPT बनानी शुरू कर।” इतना कह वाणी रसोई में चाय बनाने चली गयी, लेकिन उसके जाते ही एक लाभग 60-65 वर्षीय महिला, कॉटन की साड़ी पहने, जिसके सिर के अधिकतर बाल सफेद थे, ड्रॉइंग-रुम में आ मेरे सामने बैठ गयी।

    “मैं वाणी की सास” उन्होंने अपना परिचय देते हुए कहा।

    “जी, नमस्ते” अपनी जगह से उठ जैसे ही मैं उनके पाँव छूने के लिए झुकी, तो उन्होंने पूछा,

    “काजल, यही नाम है ना तुम्हारा?”

    “जी आंटी जी” मैंने बड़े ही सम्मानपूर्वक तरीके से जवाब दिया।

   “हम्म, वाणी की कॉलेज की दोस्त हो, और फिलहाल उसके साथ एक ही ऑफिस में काम करती हो।” वाणी की सास ने अपनी याद्दाशत पर जोर डालते हुए कहा।

    “बिल्कुल सही पहचाना आंटी आपने” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।

    “हाँ, वैसे तुम्हारे घर पर कौन-कौन है?”

    “जी, मेरे पति, दो बेटे, और सास-ससुर” मेरे कहते ही,

    “तुम अपने सास-ससुर के कुछ काम करती हो, उनके साथ वक्त बिताती हो, या उनके साथ रिश्ता निभाने की औपचारिकता ही करती हो।” वाणी की सास ने कटाक्ष करते हुए पूछा।

    “आंटी जी जितना संभव होता है, उनके साथ वक्त बिताने की कोशिश करती हूँ, लेकिन काम की अधिकता की वजह से हर वक्त ये संभव नहीं हो पाता, और घर के काम मैं, और मेरी कामवाली मिलकर कर लेते हैं, और थोड़ा-बहुत काम तो मेरे सास-ससुर खुद भी कर लेते हैं, संक्षिप्त में कहूँ तो वो रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए किसी पर निर्भर नहीं है।” मैंने अपनी बात कही।

   “काम की अधिकता तो बहाना है, दरअसल आजकल कि बहूएं अपने सास-ससुर के पास बैठना पसंद ही नहीं करती, और कह कुछ सकते नहीं, कह दो तो मुँह फूल जाता है, और आजकल के बेटे भी तो अपनी बीवियों का ही पक्ष लेते हैं।” वाणी की सास के कहते ही,

    “आंटी जी ऐसा कुछ नहीं है, अब आप ही सोचिए ना, घर के काम, ऑफिस का काम, बच्चों का होमवर्क, इतनी सारी जिम्मेदारियों के चलते कहाँ से टाइम निकाले बात करने का” मैं अपनी बात कह ही रही थी कि इतने में वहाँ वाणी चाय, और नाश्ता लेकर आ गयी, और उसे देख मैंने राहत की साँस ली।

     “अरे मम्मी जी आप यहाँ?’ इतने में ड्रॉइंग रूम में अपनी सास की मौजूदगी से अंजान बनने का नाटक करते हुए वाणी ने पूछा।

     “हाँ, सोचा तेरी सहेली से मिल लूँ, तू तो मिलवाएगी नहीं” वाणी की सास ने ताना कसा।

     “अच्छा, चाय पियेंगी आप?” वाणी ने बात बदलते हुए पूछा।

     “नहीं, चलती हूँ मैं तो, करो तुम अपने ऑफिस का काम” और इतना कह वाणी की सास वापिस चली गयी।

    “मेरी सास तुझसे मेरी क्या बुराई कर रही थी, और उन्होंने ये अक्ल नहीं लगाई कि तू मेरी दोस्त है, और सबकुछ मुझे बता देगी” अपनी सास के जाते ही वाणी ने कठोर शब्दों में धीमे से मुझसे पूछा।

    “वो बुराई नहीं कर रहीं थी, बल्कि पूरे सास समाज की ओर से इस बात से नाराज थी कि आजकल की बहुएँ अपने सास-ससुर के साथ बैठकर दो बातें करने का वक्त नहीं निकाल पाती हैं।’ मेरे कहते ही,

    “रग-रग से वाकिफ़ हूँ इस औरत की, हर किसी से मेरी बुराई ही तो करती है।” मुँह बनाते हुए वाणी ने कहा।

    “वैसे मुझे तो उनकी बातों से ऐसा नहीं लगा, लेकिन जब तुझे पता है कि वो तेरी बुराई करती हैं, और क्या करती हैं, तो सुधर क्यों नहीं जाती, क्यों मौका देती है उन्हे तेरे बारें में लोगों को बुरा-भला कहने का” मेरे कहते ही,

    “काजल, यूँ तो मुझसे जितना बन पड़ता है, मैं अपने सास-ससुर की सेवा करती हूँ, लेकिन फिर भी वो मेरे कामों से, मेरी सेवा से संतुष्ट नहीं हो पाती, और हर आने-जाने वाले से मेरी बुराई करती रहती है, तो तू ही बता कि क्या करूँ?’ वाणी ने मेरी ओर प्रश्नसूचक दृष्टि डालते हुए पूछा।

     “शायद तुझे थोड़ी और मेहनत करनी होगी, नहीं तो तेरी सास पूरे समाज में तुझे विलेन बना देगी।” मैंने जैसे ही सामने रखी चाय का कप उठाते हुए मज़ाकिया लहजें में कहा।

     वाणी हँसते हुए, “विलेन ! ....अच्छा सुन, जब मैं शादी होकर आयी थी तो उन दिनों हमारे यहाँ कोई नौकर नहीं होने की वजह से, मेरी सास मुझसे घर के सारे काम करवाती थी, और जरा-सी भी मदद नहीं करवाती थी, और कई बार ज्यादा काम होने के चक्कर में मुझे पूरा-पूरा दिन भूखा रहना पड़ता था, और इतना सबकुछ होने के बाद भी जरा-सी गलती होने पर मेरे माँ-बाप तक को गाली दे देती थी, और फिर मैं ऑफिस भी तो जाती थी, और इसी दौरान मैंने दो-दो बच्चों को जन्म दिया, और जब मेरी पहली संतान के रूप में आरुषि का जन्म हुआ तो, मेरी सास ने तूने तो बेटी पैदा की है, ये कह-कहकर मेरा जीना हराम कर दिया था, मेरी पहली डिलीवरी थी वो, अरे उन दिनों मेरा ध्यान रखना, मेरे साथ बैठकर दो बातें करना तो दूर, बल्कि दिन-रात मुझे ताने मारती थी, और उस वक्त तो मेरा पति भी mammas boy था, उनके लिए उनकी माँ ही सही थी, उन दिनों मेरी ज़िंदगी में, मेरी सास ने शिददत से एक विलेन की भूमिका निभाई थी, उस वक्त कहाँ गया था ये समाज।” वाणी के कहते ही,

     “वाणी, मेरा वो मतलब नहीं था” मैंने अपने शब्दों पर अफसोस जताते हुए कहा।

     “तेरी गलती नहीं है काजल, ये दुनिया ही ऐसी है, अगर सास अपनी बहु के साथ कुछ बुरा करे तो पूरा समाज, रिश्तेदार सब अंधे, और बहरे हो जाते हैं, उनका दिमाग काम करना बंद कर देता है, और अगर बहु अपने सास-ससुर को थोड़ा टाइम भी ना दे, उनके साथ बैठकर दो बातें भी ना करे, उन्हे खाना देने में थोड़ी-सी देर भी हों जाए तो, सब कहेंगे, हाय-हाय....देखो कैसी बहु है, भूखा मार रही है अपने बूढ़े सास-ससुर को, काजल, मैं सच कह रही हूँ, ऑफिस, घर, और बच्चों की पूरी जिम्मेदारी संभालते हुए मैं हर वक्त अपने सास-ससुर की सेवा में हाजिर रहती हूँ, हाँ ये सच है कि आजकल उनके साथ बैठकर बातें नहीं कर पाती, क्योंकि व्यस्त दिनचर्या के चलते मेरे पास उनसे बातें करने का टाइम ही नहीं होता है, और वो मेरी मजबूरी को समझने के बजाय बाहर वालों के सामने मेरी बुराई करने बैठ जाती है तो मेरा मन भी खराब हो जाता है।” वाणी के कहते ही,

     “वाणी, तेरी बात बिल्कुल सही है, ये कहानी तो हर घर की है, मैं भी तुझे अपने घर का एक किस्सा सुनाती हूँ, एक बार मैं रोटियाँ बना रही थी, उसी दौरान मेरा मोबाईल बज उठा, बॉस का फोन था, उस वक्त चल रहे प्रोजेक्ट पर उन्हे कोई जरूरी बात करनी थी, जिसके लिए मुझे लैपटॉप की जरूरत थी, तो गैस बन्द कर मैं अपने कमरे में चली गयी, और मेरी बदकिस्मती देखो, उसी वक्त मेरी सास रसोई में आ गयी, वहाँ उन्होंने केवल कुछ ही रोटियाँ बनी देखी तो बड़बड़ाने लगी, और जब तक मेरी बॉस के साथ बात खत्म हुई, तब तक तो मेरी सास अपनी बहन, और भाभी से ये कह चुकी थी कि हमारी बहु तो अपने परिवार की रोटी सेंक कर अपने कमरे में चली जाती है, इनकी (ससुर) और मेरी रोटी तो मुझे ही सेंकनी पड़ती है। अब तू सोच ये सब सुनकर मुझे कैसा लगा होगा, और अगले दिन तक तो ये बात पूरे मोहल्ले में फैल चुकी थी, अरे, वो ये भी तो सोच सकती थी ना कि हो सकता है बहु ने मेरी (सास), और अपने ससुर की रोटियाँ बनाकर रख दी हो, बाकी की रोटियाँ बाद में सेंकेगी, और पास बैठकर दो बातें नहीं करने की शिकायत तो मेरी सास को भी रहती है।” मेरे कहते ही,

      “सच मैं बहुत अजीब है, हमारी सास कुछ गलत करे तो वो गलत नहीं है, और अगर हम कुछ गलत करें तो वो पाप है।” वाणी ने व्यंग्यात्मक हँसी हँसते हुए कहा।

      “और अब उनकी गलतियों को ये कहकर नजरंदाज करना पड़ता है, कि अब उनसे क्या कहना, बुजुर्ग है वो तो, यानि कि पहले तो वो हमारी सास थी इसलिए हम भी हावी थी, और अब सास के साथ-साथ वो बुजुर्ग भी है, इसलिए हावी हैं, और दोनों ही मौकों पर हम उनसे कम होने की वजह से कुछ भी नहीं कर पाते, फिर भी गलत हम ही कहलाते हैं।” मेरे इतना कहते ही मैं, और वाणी ठहाका मार कर हँस पड़ें, शायद खुद की बेबसी पर........


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