Kaatil Lutera (Story on Brigandage)
"अंजलि मैं ऑफिस के लिए निकल रहा हूँ, दरवाज़ा अच्छे से बंद कर लेना, और हाँ किसी भी अन्जान व्यक्ति के लिए दरवाज़ा मत खोल देना, अगर कोई भी बात हो तो मुझे कॉल करना।" राहुल ऑफिस जाते हुए अपनी पत्नी अंजलि को रोज़ाना ही ये बातें कहता।
"राहुल, राहुल तुम भी हद करते हो, मैं कोई छोटी बच्ची हूँ क्या जो रोजाना ही इतनी सारी बातें समझाते हो।" अंजलि के कहते ही,
"अंजलि इसमें छोटी बच्ची वाली क्या बात हैं, अरे भई
ज़माना बहुत ख़राब हैं, सुना हैं आजकल दोपहर में कुछ अन्जान लोग आकर घर में अकेली रह रही लेडीज से धोखे से दरक़ाज़ा
खुलवा लेते हैं और फिर उन्हें लूट लेते हैं।"
"हाँ सुना तो मैंने भी हैं, और तुम फ़िक्र मत करो मैं
पूरी तरह से एहतियात बरतती हूँ।"
"चलो अच्छी बात हैं, अच्छा अब मैं निकलता हूँ,
बातों ही बातों में कहीं मेरी बस ना निकल जाए।"
"कितनी बार कहा हैं तुम्हे एक गाड़ी खरीद लो, अरे भई
इतना अच्छा-ख़ासा कमा लेते हो एक गाड़ी खरीदने में पता नहीं तुम्हे क्या आपत्ति हैं,
तुम्हारी वजह से मुझे भी बसों में धक्के खाने पड़ते हैं।" अंजलि
ने जैसे शिकायती भरे लहज़े में कहा,
"अभी मैं निकलता हूँ, ये सब बातें शाम को करेंगे,
बाय" और राहुल ऑफिस के लिए निकल गया एवं उसके जाने के बाद अंजलि भी घर के निपटाने लगी।
तक़रीबन एक घंटे बाद, "अंजलि
जल्दी से दरवाज़ा खोलो" ये आवाज़ राहुल की थी, वो बुरी
तरह से दरवाज़ा पीट रहा था।
"राहुल...! तुम इस वक़्त घर पर कैसे, सब ठीक तो हैं,
और ये तुम्हारे चेहरे पर कपड़ा कैसा?" अंजलि
अचानक से राहुल को देख घबरा गयी।
"मेरा एक्सीडेंट हुआ हैं, नाक से खून बह रहा हैं,
अब जल्दी से दरवाज़ा खोलो।" राहुल ने जैसे ही झुंझलाते हुए कहा अंजलि ने तुरन्त ही दरवाज़ा खोल दिया।
"ख़बरदार जो शोर मचाने की कोशिश की, घर में जो भी
क़ीमती सामान हैं जल्दी से मेरे हवाले कर दो।"
"कौन, कौन हो तुम और मेरे राहुल की आवाज़ में कैसे बात
कर रहे थे, मुझे लगा की राहुल आया हैं, हे भगवान् ...बचाओ, बचाओ" अंजलि उस अन्जान
व्यक्ति को देख बुरी तरह से घबरा गयी।
"किससे गुहार लगा रही हैं बचाने की, कोई नहीं आएगा
तुझे बचाने, अब चुपचाप जो भो तेरे पास हैं हमारे हवाले कर
दे।"
"देखिए भाई साहब, हमारे पास कुछ नहीं हैं।"
अंजलि उस अंजान व्यक्ति के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गयी।
"अभी कुछ देर पहले अपने पति से क्या कह रही थी की राहुल हमारे पास क्या कमी
हैं एक गाड़ी क्यों नहीं ख़रीद लेते, और अब तेरे पास कुछ नहीं
हैं, चुपचाप निकालती हैं या मैं अपने तरीक़े से
निकलवाऊँ।"
"आप ये जो कुछ भी कर रहे हैं, वो ठीक नहीं हैं।"
"क्या ठीक हैं और क्या गलत इसका फैसला मैं कर लूँगा, तू
जो भी कीमती सामान हैं फटाफट बाहर निकाल, और शुरुआत कर अपनी
इस गले की चैन से, उतार जल्दी से नहीं तो ज़बरदस्ती उतरवाना
भी आता हैं मुझे" अन्जान व्यक्ति के चिल्लाते ही,
"ये चैन मेरी माँ ने दी थी कम से कम इसे तो छोड़ दीजिए"
"अपनी माँ से कहना एक और चैन बनवा देगी, अब फ़ालतू
टाइम खोटी मत कर और जल्दी से सारा कैश और ज़ेवर मेरे सामने लाकर रख दे।" और
फिर ना चाहते हुए भी अंजलि कमरें में अलमारी में से पैसे और ज़ेवर निकालने चली गयी।
दरअसल वो मौका देख रही थी कि कैसे उस व्यक्ति की आँखों में धूल झोंकते हुए राहुल
को फोन लगाये लेकिन मौका ही नहीं मिल पा रहा था, फिर एकाएक
अंजलि के दिमाग में ना जाने क्या आया अचानक से बाथरूम में जाकर वहाँ दरवाज़ा अन्दर
से बंद कर लिया और बाथरूम की खिड़की से बचाओ, बचाओ चिल्लाने लगी जो की घर की पिछली
गली की तरफ खुलती थी। अंजलि की आवाज़ गली में चलते किसी राहगीर ने तो सुनी नहीं लेकिन घर लूटने आये उस अन्जान व्यक्ति
ने ज़रूर अंजलि की आवाज़ सुन गुस्से में आकर बाथरूम का दरवाज़ा तोड़ दिया और एकाएक ही अपनी जेब से चाकू निकाल अंजलि पर हमला कर
दिया, और हमले की वजह से अंजलि वहीं गिर पड़ी।
शाम को, "अरे ये क्या
अंजलि ने घर दरवाज़ा क्यों खुला छोड़ दिया, और कहती हैं मैं सब
समझती हूँ, कमाल करती हैं, अंजलि,
अंजलि अरे कहाँ हो भई और ये घर का दरवाज़ा क्यों खुला था।"
राहुल अंजलि को आवाज़ें लगाता हुआ बैडरूम तक चला गया लेकिन अंजलि का कोई अता-पता
नहीं चला लेकिन अचानक से राहुल की नज़रें बाथरूम के अधखुले दरवाज़े की ओर पड़ी और उसे
अन्दर ज़मीन पर पड़ी अंजलि नज़र आ गयी, जिसे देख राहुल बाथरूम
की ओर दौड़ा।
"अंजलि, अंजलि...... क्या हो गया हैं तुम्हे! अरे ये
क्या तुम्हारे पेट से तो खून बह रहा हैं...ये तुम्हे चोट कैसे लगी, तुम कुछ बोलती क्यों नहीं, अंजलि, अंजलि....... तुम मुझे सुन रही हो ना, प्लीज कोई
हेल्प करो हमारी, मेरी पत्नी घायल हो गयी हैं......डॉक्टर,
डॉक्टर, मुझे जल्द से जल्द अंजलि को डॉक्टर के
पास ले जाना होगा, टैक्सी, टैक्सी
नहीं एम्बुलेंस बुलाता हूँ।" और राहुल एम्बुलेंस बुलाने के लिए
फोन करने लगा और कुछ ही देर उसके घर के बाहर एम्बुलेंस आकर खड़ी हो गयी और फिर
राहुल जल्द ही अंजलि को लेकर अस्पताल पहुँच गया।
कुछ देर बाद, "मिस्टर
राहुल"
"जी, जी डॉक्टर साहब, अब कैसी
हैं मेरी बीवी?"
"मिस्टर राहुल आपकी पत्नी के पेट में किसी ने चाक़ू मारा हैं, ये पुलिस केस हैं, हमें अभी पुलिस को बुलाना
होगा।"
"चाकू! लेकिन ये कैसे हो सकता हैं, नहीं ज़रूर आपको
कोई ग़लतफ़हमी हुई हैं....इसका मतलब आज हमारा घर कोई लूटने आया था, नहीं ऐसा नहीं हो सकता, लेकिन मेरी पत्नी कैसी हैं
डॉक्टर?'
"उनकी हालत बहुत खराब हैं, बचने की बहुत कम उम्मीद
हैं।"
"नहीं, ऐसा नहीं हो सकता, कह
दीजिए की मेरी अंजलि जल्द ही ठीक हो जाएगी।" और राहुल थम से वहाँ रखी कुर्सी पर गिर गया।
कुछ ही देर में वहाँ पुलिस पहुँच गयी, पुलिस द्वारा राहुल से पूछताछ की गयी, लेकिन उसे
जितना मालूम था उसने बता दिया, अंजलि के बेहोशी
में होने वजह से ज्यादा कुछ पता नहीं चल पाया, राहुल के घर का मुआयना किया जाएगा ये कहकर पुलिस अपने साथ राहुल को उसके
घर ले गयी, लेकिन वहाँ भी कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला, जिससे पता
लगाया जा सके कि वहाँ आखिरकार हुआ क्या था, शायद वो लुटेरा
बहुत ही शातिर था, या फिर अंजलि
को चाक़ू मारने के बाद बिना कुछ लूटे घबराकर भाग गया,
जो भी कुछ हुआ हो फिलहाल अंजलि ज़िन्दगी और मौत के बीच जूझ रही हैं,
नतीजा पता नहीं क्या होगा, नतीजा कुछ भी हो वो
लुटेरा तो आज़ाद हैं लोगों को लूटने के लिए।
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