Hotel Mein Khoon / होटल में खून (Story On Murder Mystery)
दिसम्बर का महीना चल रहा था, उत्तर भारत में हिमाचल प्रदेश स्थित, मनाली में ठंड का प्रकोप अपनी चरम-सीमी पर था, पिछले कुछ दिनों से बर्फ पड़ रही थी सो अलग, फिर भी वहाँ पर्यटकों की आवाजाही में कोई कमी नहीं थी, होटलों में लोगों को रुकने की जगह नहीं मिल रही थी, अगर कोई पहले से ही बुकिंग करवाकर आया हो तो भली बात है।
तारीख, 24 दिसंबर, वक्त, सुबह के आठ बज रहे
थे, “जी मेरा नाम आदित्य है, मैंने अपने नाम से दो महीने पहले आपके होटल में एक
रूम बुक करवाया था।” मनाली स्थित एक होटल के रीसेप्शन सामने खड़े हो दुबले-पतले, सामान्य
कद, साँवले रंग के, तकरीबन 38 वर्षीय आदित्य ने रीसेप्शनिस्ट से कहा।
“मैं
चेक करके बताती हूँ।” इतना कह रीसेप्शनिस्ट सामने रखे लैपटॉप के कीबोर्ड पर अपनी
उँगलियाँ चलाने लगी......”जी सर आपकी बुकिंग कन्फॉर्म है।”.
“थैंक्स” आदित्य द्वारा आभार व्यक्त करते ही,
“सर, आप अकेले है?” रीसेप्शनिस्ट ने पूछा
“नहीं, मेरी पत्नी शर्वरी भी है।” आदित्य
ने सामान्य कद-काठी, गोरे रंग वाली अपनी पत्नी का परिचय करवाते हुए कहा।
“सर आप दोनों का परिचय पत्र लगेगा।”
रीसेप्शनिस्ट के कहते ही आदित्य ने अपनी पॉकेट से दो परिचय-पत्र निकाल
रीसेप्शनिस्ट के सामने रख दिए, और फिर जरूरी औपचारिकताओं के बाद,
“सर आपका रूम नंबर 222 है, सेकंड फ्लोर पर,
होटल का डाइनिंग एरिया फर्स्ट फ्लोर पर है, ब्रेकफास्ट का समय सुबह 7.30 से 10.30
है, और डिनर का समय शाम 7.30 से 11.00 बजे तक है, इसके अलावा आपको कुछ चाहिए तो
आपके रूम में सर्विस के हिसाब से फोन नंबर की लिस्ट लगी हुई है।” रीसेप्शनिस्ट के
कहते ही,
“धन्यवाद” इतना कह आदित्य, और शर्वरी अपना
सामान ले रूम की ओर चले गए।
“क्या शानदार कमरा बुक किया है, आदित्य
तुमने” होटल के रूम में चारों तरफ निगाहें घुमाते हुए शर्वरी ने कहा।
“हम्म, हमारी किस्मत अच्छी थी जो दो महीनें
पहले ही होटल में बुकिंग करवा दी, नहीं तो अभी सड़क पर बैठे होते, चलो फिलहाल तुम
अटैचियाँ अलमारी में रख दो, बाहर बिखरा हुआ सामान अच्छा नहीं लगता।” आदित्य के
कहते ही शर्वरी ने जैसे ही अलमारी खोली,
“ये अलमारी में अटैची किसकी रखी है?” शर्वरी
के पूछते ही,
“अटैची !” आदित्य ने आश्चर्य से पूछा।
“हाँ, लगता है हमसे पहले जो रुके थे उनकी रह
गयी।” शर्वरी ने संभावना जताई।
“मैं रीसेप्शन पर फोन कर बोल देता हूँ।”
आदित्य ने कहा और फोन लगाने लगा।
कुछ देर बाद, “भैया, ये कैसे सफाई करते हो
रूम की, पता नहीं किसकी अटैची रह गयी यहाँ” इतना कह शर्वरी ने अलमारी खोल दी।
“लेकिन मैडम, कल रात को तो ये नहीं थी।” होटल स्टाफ द्वारा कहते ही,
“अच्छा अब
जो भी है लेकर जाओ इसे यहाँ से” शर्वरी के कहते ही स्टाफ मेम्बर ने जैसे ही अटैची उठाई,
“अरे ये तो बहुत भारी है।” उसके मुँह से निकला।
“जो भी है लेकर जाओ इसे यहाँ से” और इतना कह
स्टाफ मेंबर के रूम से बाहर जाते ही शर्वरी ने दरवाजा बंद कर लिया।
“अब थोड़ा आराम कर लो, फिर ब्रेकफास्ट के लिए
चलते हैं।” आदित्य के कहते ही,
“अरे भई, आराम तो घर पर भी हो जाता है, बल्कि
मैं तो कहती हूँ तैयार हो, कुछ खाकर घूमने निकलते हैं।” शर्वरी द्वारा अपनी इच्छा
ज़ाहिर करते ही,
“ठीक है, तो फिर हो जाओ तैयार, जब तक मैं
टी.वी. पर समाचार देख लेता हूँ।” और इतना कह आदित्य टी.वी. चला बेड पर आराम से पैर
पसारकर बैठ गया। लेकिन इतने में ही, रूम के बाहर से आवाज़े आने लगी,
“ये आवाज़े कैसी?” आदित्य अभी अपनी बात पूरी कर
ही पाया था कि, बाहर से कोई उनके कमरे का दरवाजा जोर-जोर से खटखटाने लगा।
“कौन है?” शर्वरी ने पूछा, और दरवाजा खटखटाने
के तरीके से दोनों ने घबराकर एक दूसरे की ओर देखा।
“दरवाजा खोलो, मैं होटल का मैनेजर देवदत्त
हूँ।” बाहर से आवाज आयी।
“सर बेल भी तो लगी है बाहर, आप वो भी बजा सकते
थे, ये जाहिलों की तरह से दरवाजा खटखटाने की क्या जरूरत थी।” आदित्य ने चिढ़ते हुए
कहा।
“बकवास बंद करो, पहले ये बताओ कि तुमने हमारे
होटल के स्टाफ को क्यों मारा ?”
“मारा !”
“हाँ अभी कुछ देर पहले ये स्टाफ मेम्बर
तुम्हारे रूम से एक अटैची लेकर गया था, उसमे लाश मिली है, जो कि हमारे होटल के एक
स्टाफ मेम्बर की है।” मैनेजर के कहते ही,
“अरे हमें क्या पता, हमे तो अलमारी में एक
अटैची नजर आयी, तो हमने सोचा शायद हमसे पहले जो ठहरे थे उनकी रह गयी होगी, तो हमने
आपके इस स्टाफ मेंबर को सौप दी, और इसके अलावा हम कुछ नहीं जानते।” आदित्य ने
घबराहट भरे स्वर में सामने खड़े होटल स्टाफ की ओर इशारा करते हुए कहा।
“बहाने मत बनाओ, वैसे भी अब पुलिस आती ही
होगी, सब सच उगलवा लेगी तुम दोनों से......जगदीश, सुरेश नजर रखो इन दोनों पर,
देखना भागने ना पाए।” होटल मैनेजर द्वारा वहाँ खड़े स्टाफ मेम्बर्स को निर्देश देते
ही,
“सर हम शरीफ़ लोग हैं, छुट्टियाँ बिताने मनाली
आए हैं, हमें तो उस अटैची के बारे में कुछ पता ही नहीं, और आप हमसे पहले जो ठहरे
थे उनसे भी पूछताछ कीजिए।” इसी दौरान शर्वरी ने अपनी बात रखी।
“क्या पूछताछ करूँ उन लोगों से, वो तो कल
दोपहर ही होटल छोड़कर जा चुके थे, और जिस स्टाफ मेम्बर की लाश मिली है, वो तो कल
रात तक सही-सलामत था, खैर, अब जो कुछ होगा पुलिस की मौजूदगी में होगा, इसलिए तुम
दोनों कमरे से बाहर निकलने की कोशिश भी मत करना, समझे?”
“सर, हम तो अभी कुछ देर पहले ही आए हैं, हो
सकता है रात को कुछ हुआ हो।” आदित्य के कहते ही,
“बकवास बंद करो।” और इतना कह मैनेजर पुलिस का
इंतजार करता हुआ लॉबी में इधर-उधर चक्कर लगाने लगा।
कुछ देर बाद, “मैं इन्स्पेक्टर गौतम, अभी
कुछ देर पहले आपके होटल से कॉल आया था, माजरा क्या है?” आते ही पुलिस इन्स्पेक्टर
ने अपना परिचय देते हुए पूछा,
“सर, इस कमरे में हमारे होटल स्टाफ मेम्बर
तरुण की लाश मिली है।” होटल के मैनेजर ने कहा।
"लाश !" इन्स्पेक्टर गौतम ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा।
“सर मैं कुछ कहना चाहता हूँ, प्लीज” इस दौरान
आदित्य ने इन्स्पेक्टर गौतम से आग्रह करते हुए कहा।
“हम्म, कहो, क्या कहना है?” और फिर आदित्य
ने, आदित्य, और शर्वरी के होटल में आने से लेकर, अटैची में लाश होने की बात पता
लगने तक की सारी कहानी कह सुनाई।
“मैं कैसे विश्वास कर लूँ कि तुमने अभी जो
कुछ भी कहा है, वो सब सच है।” इन्स्पेक्टर गौतम द्वारा पूछते ही,
“सर, आप नीचे रीसेप्शन पर जाकर हमारा चेक–इन
टाइम देख सकते है, और वैसे भी सर हम शरीफ़ लोग हैं, इन झमेलों से हमारा कोई लेना
देना नहीं।”
“हम्म, मैनेजर साहब, फिलहाल होटल के पूरे
स्टाफ, एवं होटल में ठहरे हुए सभी गेस्ट्स को एक जगह इकट्ठा होने के लिए बोलिए,
सभी से पूछताछ की जाएगी......और हवलदार सूरज, होटल के सभी गेट्स बंद कर दो, कोई
बाहर नहीं जाने पाए, और हाँ फोरेंसिक टीम को भी इत्तला कर दो, जिससे कि वो भी अपने
काम पर लग जाए।
“जी सर” मैनेजर देवदत्त और हवलदार सूरज ने एक
साथ कहा, और फिर कुछ ही देर में सब होटल में बने एक हाल में इकट्ठे हो गए।
“क्या हो रहा है यहाँ? एकत्रित भीड़ में से एक
आवाज आयी।
“क्यों एकट्ठा किया है सबको, कुछ बता क्यों
नहीं रहे?” ये एक अन्य आवाज थी।
“यहाँ ये पुलिस क्यों आयी हुई है?” किसी ने
पूछा
“कुछ कांड हो गया क्या यहाँ?” किसी के कहते
ही,
“हमें तो घूमने के लिए निकलना था, देर हो जाएगी।”
ये स्वर किसी महिला का था।
“शांत
हो जाइए आप सब” इतने में इन्स्पेक्टर गौतम ने अपनी रौबदार आवाज में लगभग चिल्लाते
हुए कहा।
“सर
हम सब को यहाँ क्यों इकट्ठा किया है?” हाल में खड़े लोगों में से एक ने पूछा।
“इस
होटल के एक रूम में, यही पर काम करने वाले एक कर्मचारी की लाश मिली है, उसी संदर्भ
में पूछताछ के लिए आप सबको यहाँ इकट्ठा किया है, और कुछ ही देर में हमारी फोरेंसिक टीम आने वाली है, वो आपके फिंगर-प्रिंटस लेगी प्लीज उनका सहयोग कीजिएगा।”
इन्स्पेक्टर गौतम के कहते ही,
“लाश
!”
“ये
कैसे हुआ?”
“हे
भगवान, ये कैसे होटल में रुक गए हम”
“मुझे
तो बहुत डर लग रहा है।” लाश के बारे में सुन हाल में खड़े लोगों के बीच खुसर-फुसर
शुरू हो गयी।
“प्लीज शांत हो जाइए आप सब, और जो कुछ भी पूछा जाए, उसका सोच-समझकर जवाब
दीजिए।” और फिर कुछ पुलिसकर्मियों ने वहाँ मौजूद लोगों से तरुण की फोटो दिखा
पूछताछ शुरू कर दी, जिसका नतीजा ये निकला कि जिन लोगों ने भी उसे देखा था,
उन्होंने उसे आखिरी बार रात 10-11 बजे के दौरान ही देखा था, उसके बाद नहीं।
“हम्म, अब ये तो तय है कि तरुण का खून रात को
ही हो गया था, लेकिन ये सब किया किसने, ये अभी भी एक सवाल बना हुआ है, मैनेजर
साहब, क्या तरुण का किसी से कोई झगड़ा चल रहा था।” इन्स्पेक्टर गौतम ने पूछा।
“जी, जी मेरे हिसाब से तो नहीं।”
“आप सबका क्या कहना है इस बारे में” अगले ही
पल इन्स्पेक्टर गौतम ने अन्य स्टाफ मेंबर्स की ओर मुखातिब होते हुए पूछा।
“नहीं सर, वो तो बहुत ही नेक-दिल, शरीफ़ इंसान
था।” एक स्टाफ मेम्बर ने कहा।
“सर हम तो विश्वास ही नहीं कर पा रहे कि किसी
ने उसे मारा है।” अन्य स्टाफ मेम्बर द्वारा कहते ही,
“सर” इतने में फोरेंसिक टीम के एक सदस्य ने
इंस्पेक्टर गौतम से कहा।
“हाँ, बोलो” इन्स्पेक्टर ने
कहा,
“सर फिंगर प्रिंटस की रिपोर्ट आ चुकी है।” और
फिर अगले कुछ मिनिटों तक उन दोनों के बीच कुछ गंभीर बात होती रही।
कुछ
देर बाद, “मैनेजर देवदत्त साहब, मैं काफी देर से देख रहा हूँ कि आपके माथे पर
बार-बार पसीना आ रहा है।” इन्स्पेक्टर गौतम ने फोरेंसिक टीम के सदस्य से बातचीत
खत्मकर, होटल मैनेजर पूछा,
“हाँ सर, वो गर्मी बहुत है ना...”
“गर्मी !”
“जी, वो मेरा मतलब है, सर्दी...नहीं वो
गर्मी, पसीना” कहते-कहते मैनेजर की जुबान हकलाने लगा।
“बहादुर सिंह, गिरफ्तार करलो इस मैनेजर को”
“लेकिन सर मुझे क्यों?” मैनेजर ने काँपती
आवाज में जैसे ही पूछा,
“क्योंकि असली गुनाहगार तुम ही हो, अब बताओ
सब कुछ विस्तार से” पुलिसकर्मी द्वारा कहते ही,
“नहीं सर मैंने कुछ नहीं किया।” मैनेजर ने गिड़गिड़ाते
हुए कहा।
“फोरेंसिक रिपोर्ट आ चुकी है, अब बताओ क्या
हुआ था।” इन्स्पेक्टर गौतम ने धमकाते हुए कहा।
“मुझे माफ कर दीजिए सर, आगे से ऐसा नहीं
होगा।”
“शट-अप, बताओ सबकुछ या फिर टॉर्चर करेंगे
जब ही बताओगे।”
“नहीं, नहीं सब बताता हूँ” और फिर मैनेजर ने
जो कुछ भी बताया उसके मुताबिक कल रात जिस कमरे में अटैची मिली, उसी कमरे की
साफ-सफाई को लेकर तरुण की मैनेजर से झड़प हो गयी, और झड़प इतनी बढ़ गयी कि गुस्से में
मैनेजर ने उसके पेट में चाकू मार दिया, और सबसे नजरें चुरा स्टोर रूंम से एक अटैची
ला लाश उसमें डाल अलमारी में रख दी।
“वाह, क्या बात है, जरा-सी झड़प होने पर तुम
सामने वाले की हत्या भी कर सकते हो।” इन्स्पेक्टर गौतम के कहते ही,
“ये तो बहुत ही खतरनाक आदमी है, खून खुद ने किया,
और इल्जाम हमारे ऊपर लगा रहा था।” इतने में
वहाँ खड़ी शर्वरी बोली।
“दरअसल इसने दिमाग ही नहीं लगाया कि आप लोगों का चेक-इन टाइम कंप्युटर में फ़ीड हो चुका है, और फोरेंसिक टीम द्वारा कत्ल का सही समय पता लगाया जा सकता है।" इन्स्पेक्टर गौतम के कहते ही,
“सर मैनेजर साहब का गुस्सा बहुत तेज है, गुस्से में वो सुधबुध खो बैठते है, वो किसी का खून भी कर सकते है।” इतने में वहाँ खड़ी रीसेप्शनिस्ट ने कहा।
“इतना गुस्सा कि किसी का खून कर दो, ये पागलपन की निशानी है, इसको तो अब हम सही राह पर लायेंगे, ले चलो इसे” और फिर पुलिस टीम मैनेजर देवदत्त को गिरफ्तार करके ले गयी, और जो कुछ हुआ उसकी दहशत के चलते अगले चंद घंटों में उस होटल में ठहरे सभी गेस्ट्स धीरे-धीरे होटल खाली करके चले गए।
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