Nisha Ka Sangharsh (Story On Women Empowerment)



                                      लड़की हूँ तो इसमें मेरा क्या कसूर

                                    शिक्षा से वंचित रख ना दो मुझे सज़ा

 

अभी निशा अठारह साल की हुई ही थी, कि उसके लिए रिश्ते आने शुरु हो गए, लड़के अच्छे परिवार से एवं पढ़े लिखे थे, तो उसके मम्मी-पापा ने उसकी शादी करने का मन बना लिया। "मम्मी मुझे अभी शादी नहीं करनी, अभी तो मेरी बारहवीं भी पूरी नहीं हुई, मुझे आगे और पढ़ना हैं।"

"अरे पढ़ाई का क्या हैं वो तो शादी के बाद भी हो जाएगी, लेकिन इतने अच्छे रिश्ते बारबार नहीं आते हैं, इनमे से यह एक लड़का हैं जो मुझे भी बहुत पसंद हैं, और तेरे पापा को भी"  निशा की मम्मी मालिनी ने उसे लड़के का फोटो दिखाते हुए कहा। 

"मम्मी लेकिन" निशा के कहते ही,

"देख बेटा, मैं तो कहती हूँ सही उम्र में शादी हो जाए तो अच्छा हैं, और वैसे भी यह रिश्ता सामने से आया हैं, ज़रूरी तो नहीं हैं कि आगे भी इतना अच्छा कोई रिश्ता आये।"

"ठीक हैं, जैसा आप लोगो को अच्छा लगे वैसा करो।" ऐसा बोल निशा अपने कमरे में चली गयी।

कुछ ही महीनों बाद निशा की शादी उसी के शहर में रहने वाले अमित के साथ करवा दी गयी, पच्चीस वर्ष का अमित एक प्राइवेट कम्पनी में मैनेजर था, वेतन भी अच्छा ख़ासा मिल ही जाता था, अमित  के परिवारवाले भी अच्छे थे, सब कुछ अच्छा होने एवं सारी खुशियाँ मिलने की वजह से अब निशा को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने का कोई अफ़सोस नहीं था, शादी के लगभग दो साल बाद निशा के एक लड़का भी होगया, सौरभ नाम रखा था उसका अमित ने, बहुत ही प्यार करता था वो उससे, सब कुछ अच्छा चल रहा था कि एक दिन अचानक कम्पनी से वापिस आते वक़्त एक सड़क दुर्घटना में अमित की मौत हो गयी।

निशा के ऊपर मानो अब मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था, एक तो उसका कम पढ़ालिखा होना, और साथ ही डेढ़ वर्षीय सौरभ की परवरिश, अमित के प्राइवेट कम्पनी में होने की वजह से घरमें अब कमाई के सारे स्रोत बंद हो चुके थे, इतना ही नहीं मुसीबत की मारी निशा के ससुराल वालों ने भी अब उसका साथ छोड़ दिया था, क्या करती बेचारी वापिस अपने मम्मी-पापा के यहाँ आ गई। वो आ तो गयी लेकिन उसके वापिस आने से उसके मम्मी-पापा कतई ख़ुश नहीं थे, क्यों कि उनकी जो भी जमा-पूंजी थी वो उसे निशा की शादी में पहले ही लगा चुके थे, अब तो बस निशा के पापा की पेंशन मात्र ही घर पर आती थी, जिससे दोनों पति-पत्नी का खर्चा चल जाए वही काफी था, ऐसे में निशा एवं सौरभ का आ जाना कंगाली में आटा गीला जैसा लग रहा था।वैसे निशा से किसी ने कुछ कहा तो नहीं, लेकिन इतना तो वो भी समझ पा रही थी कि, उसके पापा आर्थिक तौर पर इतने काबिल नहीं हैं कि उसका और सौरभ का भी बोझ उठा सके, सो उसने घर पर ही छोटे बच्चो को पढ़ाकर कमाई करने का विचार किया, और साथ ही अपनी आगे की पढ़ाई भी उसने फिर से शुरु कर दी, घर के कामों में अपनी माँ की मदद करना, सौरभ की परवरिश, आसपास के छोटे-छोटे बच्चो को पढ़ाना, एवं इस बीच जब भी समय मिले खुद पढ़ना, यही दिनचर्या बन चुकी थी अब उसकी।

सौरभ भी अब तीन साल का हो चुका था, सो निशा ने उसे पास ही के एक स्कूल में पढ़ने के लिए ड़ाल दिया, सौरभ के स्कूल जाने से निशा के खर्चे अब और बढ़ गए थे, सो उसने फैसला किया कि अब वो और ज्यादा बच्चो को पढ़ाएगी, जिससे कि थोड़ी कमाई और हो सके, इतना सब कुछ करना मुश्किल तो था,फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी, बल्कि अपनी ग्रेजुएशन भी पूरी की और साथ ही उसने अपनी आगे की पढ़ाई भी ज़ारी रखी, साल दर साल बीतते जा रहे थे, सौरभ भी बड़ा एवं समझदार हो रहा था।

"निशा, इस साल तेरा एम.ए. भी पूरा हो जाएगा, मुझे लगता हैं अब तुझे अपनी पढ़ाई बंद कर देनी चाहिए, अब तू अपना सारा ध्यान सौरभ की तरफ दे, खर्च चलने लायक तेरी कमाई तो बच्चो को पढ़ाने से हो ही जाती हैं।"

"मम्मी, तुम तो कुछ बोलो ही मत, अगर तुमने मुझे उस वक़्त पढ़ने दिया होता तो आज मेरी यह स्थिति नहीं होती।"

"लेकिन हमने तो अच्छा लड़का व अच्छा घर-परिवार ही ढूँढा था, अब होनी को कौन टाल सकता हैं।"

"मम्मी, लड़कियों को इतना लाचार भी नहीं होना चाहिए कि वो पूरी तरह से अपने होने वाले पति पर ही निर्भर रहे, और हाँ आपको जो करना था वो आपने कर लिया, अब आगे की ज़िन्दगी मैं अपने हिसाब से जीऊँगी, रही सौरभ की बात तो उसकी चिंता करने की आपको कोई ज़रुरत नहीं हैं, मैं सब संभाल लूँगी।" निशा को रुखापन देख मालिनी बिना कुछ बोले अपने कमरे में वापिस चली गई।

निशा ने आगे भी अपने संघर्ष का सफ़र ज़ारी रखा, उसने एम.ए. करने के बाद पी.एच.डी. की तैयारी शुरु कर दी, और साथ ही सौरभ की भी हर ज़रुरत का उसने ख्याल रखा, समय के साथ-साथ ज़िन्दगी का सफर मुश्किल होता जा रहा था, फिर भी निशा ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा, और एक दिन उसकी पी.एच.डी. भी पूरी हो गयी,अब निशा केवल निशा नहीं बल्कि डॉक्टर निशा हैं, और शहर के एक जाने-माने कॉलेज में प्रोफ़ेसर हैं।


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