Rimjhim Ke Papa Ki Shaadi / रिमझिम के पापा की शादी ( Story On Family)

    रिमझिम, नाश्ता तैयार है, आ जाओ डाइनिंग टेबल पर” लगभग 38 वर्षीय गौरव के आवाज लगाते ही,

    “आ गयी पापा” एक 10 वर्षीय गोरा रंग, पतली-दुबली, कँधे तक कटे बाल वाली लड़की मुस्कुराते हुए गौरव के सामने आ खड़ी हुई। 

    “अरे वाह आज तो तुम एक ही आवाज में आ गयी।”

    “बिल्कुल, क्योंकि आज मेरी पसंद का नाश्ता जो बना है, आलू के पराँठे”

    “कभी-कभार नापसंद नाश्ता करने में भी कोई हर्ज नहीं है, रिमझिम बेटा”

    “वो सब बातें बाद में पापा, फिलहाल आप मुझे नाश्ता करने दो, नहीं तो स्कूल जाने में देर हो जाएगी।”

    ये गुफ़्तगू इंदौर स्थित एक जानी-मानी कॉलोनी के एक घर के डाइनिंग एरिया में उस घर में रहने वाले पिता गौरव, और बेटी रिमझिम के बीच हो रही थी। गौरव, और रिमझिम बस ये दोनों ही रहते थे उस घर में, क्योंकि रिमझिम की माँ राशिका का देहांत तो उसे जन्म देने कि दौरान लेबर-रूम में ही हो गया था, नियति ने कुछ ऐसा खेल खेला कि ना माँ अपनी बेटी का चेहरा देख पायी, और ना ही बेटी माँ के गले लग पायी, अचानक हुए इस हादसे ने गौरव को तोड़कर रख दिया, कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे, क्या ना करे, छोटी-सी रिमझिम को संभाले, या खुद को राशिका के जाने के सदमे से उबारे।

    इस दौरान कई रिश्तेदारों ने सुझाव दिया कि गौरव को दूसरी शादी कर लेनी चाहिए, लेकिन गौरव रिमझिम की परवरिश के मामले में किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहता था, वो राशिका की निशानी को बड़े ही नाज़ों से पालना चाहता था, क्योंकि राशिका उसके बचपन का प्यार जो थी।

    शुरुआती कुछ महीनें तो गौरव को अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ा, तत्पश्चात सब सही होने लगा, गौरव को रिमझिम की, और रिमझिम को गौरव की आदत होने लगी, वो अब एक पिता के साथ-साथ माँ का फ़र्ज़ भी निभाने लगा, कुल मिलाकर अब ये दोनों ही एक दूसरे ही दुनिया बन चुके थे।

    रिमझिम अब 10 साल की हो चुकी है, और पास ही एक स्कूल में पाँचवी क्लास में पढ़ती है, वहीं दूसरी ओर गौरव भी घर के ही पास रोजमर्रा के सामान की एक छोटी-सी दुकान चलाता है, जो कि अच्छी-खासी चल जाती है, यूँ तो वो पहले एक सरकारी दफ्तर में कार्यरत था, लेकिन ऑफिस की जिम्मेदारियों के चलते उसे रिमझिम की देखभाल करने में परेशानी हो रही थी, इसलिए काफी सोच-विचार करने के बाद गौरव ने ऑफिस में इस्तीफा दे, घर के ही पास खुद की एक छोटी-सी दुकान खोल ली, शुरुआती कुछ साल तो ग्राहकी काफी कम रही, लेकिन बाद में गौरव की दुकान काफी अच्छी चल पड़ी।   

    सुबह उठने से लेकर, रात को सोने तक गौरव की दिनचर्या रिमझिम के हिसाब से ही चलती है और ऐसा होते हुए साल-दर-साल गुजरते जा रहे हैं।

 

     “हैप्पी बर्थडे टू यू, हैप्पी बर्थडे टू यू” रात बारह बजे, गौरव हाथ में केक लिए रिमझिम को उसके जन्मदिन की बधाई दे रहा था।

     “धन्यवाद, शुक्रिया, थैंक्स, मेरे प्यारे पापा” और जवाब में रिमझिम शुक्रिया अदा करते हुए गौरव के गले जा लगी।

      “आज तुम पूरे 25 साल की हो चुकी हो, अब तुम्हारी शादी की चिंता करनी पड़ेगी।” इतने में गौरव ने कहा।

      “ओहो पापा, फिर वो ही शादी की बात, मुझे नहीं करनी शादी, मुझे नहीं जाना आपको छोड़कर, जैसी ज़िंदगी चल रही है, वो ही अच्छी है, कोई और नहीं चाहिए मुझे इसमे” बनावटी नाराजगी ज़ाहिर करते हुए जैसे ही रिमझिम ने कहा,

      “ओके, ओके, अब नहीं करेंगे इस टॉपिक पर बात, लेकिन ये तो बताओ कि क्या कार्यक्रम है आज का, कहाँ पार्टी चाहिए तुम्हें?”

      “पापा, अब मैं खुद कमाने लगी हो, एक सफल इंजीनियर बन चुकी हूँ, एक आई. टी. कंपनी में जॉब करने लगी हूँ, तो पार्टी तो मेरी तरफ़ से बनती है, लेकिन तोहफ़ा आपसे ही लूँगी।” रिमझिम ने कहा।

      “तो फिर कहाँ पर दे रही हो अपने जन्मदिन की पार्टी?” गौरव ने उत्सुकतावश पूछा।  

      “सब्र करो मि. गौरव सब पता चलेगा, लेकिन पहले शाम तो होने दो।” जैसे ही रिमझिम ने कहा,

     “ओह गॉड, फिर से सरप्राइज़, ओके देखते है आज मेरी बेटी मेरे लिए किस प्रकार की सरप्राइज़ पार्टी दे रही है, वैसे कायदे से पार्टी तो मुझे देनी चाहिए, अपनी बिटिया के जन्मदिन के उपलक्ष्य में, लेकिन दे तुम रही हो।”

    “ओहो पापा, हम दोनों अलग है क्या, चलो वो सब छोड़ो शाम को 7 बजे तैयार हो जाना, चलेंगे पार्टी इन्जॉय करने।” और इतना कहते ही रिमझिम प्यार से गौरव को चूम वहाँ से भाग खड़ी हुई।

    “शैतान, अब ये तो बताती जाओ कि तोहफ़े में क्या चाहिए?” भागती हुई रिमझिम से गौरव ने मुस्कुराते हुए जैसे ही पूछा,

    “शाम को पार्टी में ही बताऊँगी, फिलहाल सब्र करो।” इतना कह रिमझिम गुनगुनाती हुई वहाँ से चली गयी।

   

    शाम को तकरीबन सात, सवा सात बजे, “हैलो” इंदौर के एक रेस्टोरेंट में एक लगभग 50 वर्षीय सामान्य कद-काठी वाली महिला ने कदम रखते ही सामने खड़ी रिमझिम से कहा।

    “हैलो” रिमझिम के जवाब देते ही,

    “कैसी हो रिमझिम”

    “मैं अच्छी हूँ, और आप?”

    “मैं भी” उस महिला के जवाब देते ही,

    “आंटी, ये मेरे पापा मि. गौरव है, और पापा ये वांशिक आंटी” रिमझिम ने दोनों का परिचय करवाते हुए कहा।

    “नमस्ते” और फिर दोनों ने ही एक-दूसरे का मुस्कुराते हुए अभिवादन किया।

    “ओह समझा, ये तुम्हारी ऑफिस कलीग है, और आज तुमने इन्हे भी अपने जन्मदिन पर आमंत्रित किया है, अब ये भी बता दो कि और किस-किस बुलाया है तुमने।” गौरव ने उत्साहित होते हुए पूछा।

    “पापा ये मेरी ऑफिस कलीग नहीं है।” रिमझिम के बताते ही,

    “तो फिर”

    “पापा इनसे मेरी मुलाकात मैट्रमोनीअल साइट पर हुई थी।“

    “ओह गॉड, मैं भी कितना नासमझ हूँ, लेकिन अब मैं सब समझ गया हूँ, कि तुमने मैट्रमोनीअल साइट पर इनके बेटे को पसंद किया है, और अब ये मुझसे अपने बेटे के रिश्ते की बात करने आयी है, लेकिन आपका बेटा नज़र नहीं आ रहा।” गौरव ने वंशिका के आने की अटकले लगा इधर-उधर देखते हुए पूछा।

    “पापा आप गलत समझ रहे है।” जिसका जवाब रिमझिम ने दिया।

    “मतलब ?”

    “यहाँ मेरे रिश्ते की बात नहीं हो रही, बल्कि आपके रिश्ते की बात हो रही है।” रिमझिम के कहते ही,

    “व्हाट !” इतना सुनते ही एकाएक गौरव ने आश्चर्य से उच्च स्वर में कहा।

    “पापा, प्लीज शांत हो जाइए, और यहाँ बैठिए, और आंटी आप भी बैठिए।” रिमझिम ने पास ही रखी कुर्सी की ओर इशारा करते हुए कहा।

    “रिमझिम, ये क्या बेहूदगी है, मैं कुछ नहीं समझ पा रहा हूँ साफ-साफ बताओ आखिरकार बात क्या है?” गौरव ने प्रश्नसूचक दृष्टि रिमझिम पर डालते हुए पूछा।

    “पापा, दरअसल बात ये है कि मैं एक लड़के को पसंद करती, और उससे शादी करना चाहती हूँ, लेकिन इससे पहले आपका घर बसाना चाहती हूँ।” रिमझिम के कहते ही,

    “ये क्या पागलपन है रिमझिम, और आप भी इसकी बातों में आकर यहाँ आ गयी।” गौरव ने क्रोधित होते हुए रिमझिम, और वांशिक को लताड़ा।

    “पापा, इसमे वंशिका आंटी की कोई गलती नहीं है, इन्होंने तो वो ही किया जो मैंने कहा।

   “लेकिन ये पागलपन तुमने किया ही क्यों?”

   “पापा जब से मैंने होश संभाला है, आपको सिर्फ मेरे लिए जीते देखा है, आपने मुझे माँ-पापा दोनों का प्यार दिया है, और मेरे प्रति दोनों का ही फ़र्ज़ निभाया है, खुद के लिए तो आप कभी जीये ही नहीं, और मैं जानती हूँ कि मेरे जाने के बाद आपके जीने का कोई मकसद नहीं रह जाएगा।

    इसलिए मैं चाहती हूँ कि अब आप खुद के लिए जीए, अपने वो सब अरमान पूरे करे जो मेरी वजह से नहीं कर पाए, और यही तोहफ़ा मैं आपसे आज अपने जन्मदिन पर माँग रही हूँ कि आप ये रिश्ता स्वीकार कर ले।

    मैंने वंशिका आंटी को बहुत नजदीक से जाना है, समझा है, वो आपके लिए, और आप उनके लिए परफेक्ट हो, और मैं तो इनके बारे में सब जानती हूँ, लेकिन मैं ये चाहती हूँ कि आप दोनों एक-दूसरे के बारे में आपस में बात करके जाने।” रिमझिम द्वारा अपनी बात पूरी करते ही,

    “ये कोई मूवी चल रही है, रिमझिम तुम एक बचकानी हरकत कर रही हो, मुझे किसी से कोई बात नहीं करनी, मैं जा रहा हूँ यहाँ से” इतना कहते ही गौरव जैसे ही उठकर जाने लगा।

     “पापा प्लीज, समझने की कोशिश कीजिए, अगर आप शादी नहीं करेंगे तो मैं भी नहीं करूँगी।“ रिमझिम ने गौरव का हाथ पकड़ उसे जबरदस्ती रोकते हुए कहा।

      “रिमझिम, ये कैसी जिद है......ठीक है मुझे उस लड़के से मिलवाओ जिसे तुम पसंद करती हो, मैं उससे घर-जमाई बनने की रीक्वेस्ट करूँगा, फिर तो तुम्हें मेरी चिंता नहीं होगी ना?” गौरव के पूछते ही,

       “वो बात हो चुकी है पापा, वो घर-जमाई ही रहेगा, लेकिन फिर भी आपको शादी तो करनी ही पड़ेगी।”

       “मैं 53 साल का हो चुका हूँ, इस उम्र में शादी करूँगा, मज़ाक बनायेंगे लोग मेरा।“ गौरव ने हँसते हुए कहा।

       “लोग क्या कहते है, इससे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता, और आपको भी नहीं पड़ना चाहिए।” रिमझिम के कहते ही,

       “रिमझिम बेटा, ये कैसी जिद है।”

       “जिद तो जिद सही, अब वादा कीजिए कि जब तक आप वंशिका आंटी से बात नहीं कर लेते, एक-दूसरे को अच्छे से जान-समझ नहीं लेते, कोई फ़ैसला नहीं करेंगे, उसके बाद जो भी आप दोनों का जवाब होगा मुझे मंजूर है।” रिमझिम के कहते ही,

       “वैसे तो मुझे तुम्हारी ये बात बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रही, फिर भी तुम्हारी खुशी के लिए मैं ये करूँगा।” गौरव के कहते ही,

       “और आप?” रिमझिम ने वंशिका पर प्रश्नसूचक दृष्टि डालते हुए पूछा।

       “मैं भी” वंशिका ने धीमे से जवाब दिया।

       “बहुत अच्छे” दोनों ओर से रजामंदी मिलते ही रिमझिम ने चहकते हुए कहा।

       उसके बाद तकरीबन छ: महीने तक गौरव, और वंशिका की मुलाकते होती रही, जिनके दौरान ये पता चला कि वंशिका दिल्ली से आयी है, और वो एक विधवा है, शादी के 2 महीने बाद ही उसके पति की एक दुर्घटना में मौत हो गयी थी, अपशुगनी मान कर ससुरालवालों ने घर से निकाल दिया, मायके में माँ-बाप थे नहीं, भाई-भाभी थे जिन्होंने स्वीकार नहीं किया, जहाँ-जहाँ सहारा मिलने की उम्मीद थी, वो सब दरवाजे वंशिका के लिए बंद हो चुके थे, नतीजन कुल मिलाकर वंशिका ने दिल्ली छोड़ इंदौर बसने का इरादा किया, और फिर यहाँ आकर एक टीचर की नौकरी कर ली, बस तब से ही वो सारे-नाते-रिश्तेदारों से संबंध तोड़कर इंदौर में सुकून की ज़िंदगी जी रही है।

       गुजरते वक्त के साथ गौरव अब वंशिका का पसंद करने लगा था, कहीं ना कहीं जिसका कारण था वंशिका का साहसी होना, और वंशिका भी गौरव को चाहने ली थी, लेकिन अब मुश्किल ये थी कि ये बात रिमझिम को कैसे बताई जाए, क्योंकि दोनों ही उससे बात करने में संकोच महसूस कर रहे थे, लेकिन रिमझिम सब समझती थी, इसलिए कुछ ही दिनों बाद उसने एक अच्छा-सा मुहूर्त निकलवा अपने पापा की शादी करवा डाली, और कुछ दिनों बाद रिमझिम की शादी भी उसके पसंद के लड़के से हो गयी। जो कि अब एक घर जमाई बनकर गौरव के घर पर ही रहने लगा था, परिवार में दो और लोगों के आगमन से मानों अब दुनियाभर की खुशियाँ गौरव की चोखट पर आ चुकी थी।


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