Naukrani (Story On Servant)



हमने तो कर विश्वास, सौंपा था तुझे जिगर का टुकड़ा

फिर भी क्यों बेरहम तूने, दे दिया हमें दर्द इतना

 

सुबह उठ कर तैयार होना, नाश्ता बनाना, घर की साफ़-सफाई और छ: महीने की जूही के भी तो सारे काम करने पड़ते थे सोनिया को, इसके अलावा ऑफिस जाते वक़्त जूही को क्रेच में छोड़ना और घर आते वक़्त साथ लेकर आना, पूरा दिन कैसे भागमभाग में गुज़र जाता पता ही नहीं चलता था, मनीष भी तो समय नहीं निकाल पाता था, सुबह जल्दी ऑफिस के लिए निकलना और शाम को आते हुए अक्सर नौ-साढ़े नौ बज जाया करते थे, शरीर में इतनी ताक़त भी नहीं बचती थी कि दो पल बैठकर जूही के साथ खेल ले, सोनिया भी उससे ज्यादा कुछ नहीं कहती थी, अगर कोई मज़बूरी हो तभी मदद माँगती थी, लेकिन ऐसा कब तक चलता इसलिए सोनिया ने सोचा क्यों ना एक नौकरानी रख ले जो कि घर के सारे काम भी करेंगी और दिन में जूही की देखभाल भी, यही बात सोच उसने अख़बार में इश्तहार दे दिया।

     कुछ दिनों बाद...

"सोनिया, देखो तुमसे कोई मिलने आया हैं" ऑफिस के लिए निकलते वक़्त मनीष ने आवाज़ लगाकर कहा,

"क्या काम हैं?" गोद में जूही को लिए सोनिया ने सामने खड़ी महिला से पूछा,

"आपने नौकरानी के लिए अख़बार में इश्तहार दिया था।"

"हाँ-हाँ याद आया,क्या नाम हैं तुम्हारा?"

"गौरी"

"क्या-क्या काम कर लेती हो?"

"जी, घर के सारे काम कर लेती हूँ।"

"और बच्चे को सँभालने का काम कर लेती हो?"

"तज़ुर्बा तो नहीं हैं पर कर लूँगी।"

"तुम्हारे बच्चे नहीं हैं?"

"मेरी तो अभी शादी ही नहीं हुई हैं।"

"ओह माफ़ करना मुझे लगा"

"कोई बात नहीं, बचपन में ही माता- पिता के गुज़र जाने के बाद भाई-बहनों की देखभाल में कब उम्र ढल गयी पता ही नहीं चला"

"महीने के कितने लोगी"

"दस हज़ार"

"क्या ! दस हज़ार, यह तो बहुत ज्यादा हैं।"

"नहीं मेमसाब घर के सारे काम , बच्चे की देखभाल इतना तो बनता हैं।"

"नहीं-नहीं पाँच हज़ार में करना हैं तो करो वरना मैं किसी और से बात कर लूँगी।"

"अच्छा ठीक हैं आठ हज़ार में कर लूँगी, लेकिन इससे एक पैसा कम नहीं करुँगी" सोनिया गौरी के ऐसा कहते ही कुछ सोचने लगी। 

"ठीक हैं तुम अपना पहचान-पत्र व फोटो कल लेकर आ जाना"

"जी, नमस्ते" ऐसा कह गौरी वापिस चली गयी।

 

शाम को, "मनीष मैने कल से एक नौकरानी रखी हैं, उम्मीद करती हूँ तुम्हे कोई ऐतराज़ नहीं होगा।"

"नहीं सोनिया मुझे कोई ऐतराज़ नहीं हैं लेकिन ज़माना बहुत ख़राब हैं जिसको भी रखो सोचसमझ कर रखना"

"हाँ तुम सही कह रहे हो, मैं इस बात का पूरा ध्यान रखूँगी।"

 

अगले दिन सुबह, "नमस्ते मेमसाब, ये लीजिए मेरा पहचान-पत्र और फोटो" गौरी ने दरवाज़ा खुला देख अन्दर आते हुए कहा,

"आ गई तुम? इनसे मिलो यह मेरे पति हैं मनीष, और मनीष ये गौरी हैं आज से ही अपने घर में काम करेंगी।"

"ठीक हैं" ऐसा बोल मनीष बिना गौरी की ओर देखे काम के लिए निकल गया, सोनिया भी गौरी को घर के काम समझाने लगी,

"गौरी मैने आज ऑफिस से छुट्टी ली हैं, जिससे कि तुम्हे कोई परेशानी ना हो"

"मेमसाब आप चली जाइए मैं संभाल लूँगी"

"कोई बात नहीं कल से चली जाऊँगी" पूरा दिन गौरी से बातों में उसके परिवार को जानने में, और गौरी एवं जूही की दोस्ती करवाने में कैसे बीत गया पता ही नहीं चला।

 

शाम को मनीष के घर आने के बाद, "मनीष मैने गौरी को काम पर रख लिया हैं।"

"यह गौरी कौन हैं?"

"अरे बाबा, जो सुबह आयी थी, आठ हज़ार महीने के लेगी"

"ओह मैं तो भूल ही गया था, देखो सोनिया घर का सारा क़ीमती सामान संभाल कर रखना और मैं तो कहता हूँ हमें घर में कैमरे लगवा लेनें चाहिए जिससे की पता रहे कि वो हमारे पीछे से क्या कर रही हैं।"

"विचार तो अच्छा हैं, कैमरे के डर से वो ना तो कोई ग़लत काम कर पाएगी ना ही जूही के साथ कोई दुर्व्यवहार"

"ठीक हैं मैं जल्द ही कैमरे लगवाने की कोशिश करता हूँ।"

 

अगले दिन से रोज़ सुबह गौरी का आना पूरा दिन काम करना और शाम को वापिस चले जाना जैसे की दिनचर्या-सी बन गयी थी, शाम को जब सोनिया लैपटॉप पर देखती कि पूरा दिन घर पर क्या हुआ हैं तो गौरी के काम की कायल हो जाती, जूही का तो वो इस कदर ध्यान रखती जैसे कि वही उसकी माँ हो, अब तो सोनिया पूरी तरह बेफ़िक्र हो चुकी थी, इसी प्रकार कब छ; महीने गुज़र गए पता  ही नहीं चला।

"मनीष, जूही का जन्मदिन आने वाला हैं, क्यों ना हम उस दिन पार्टी रखें, वैसे भी हमारी बिटिया का पहला जन्मदिन हैं।"

"बिल्कुल रखेंगे, मैं तो कहता हूँ हमे अभी से तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए" मनीष ने सुबह की चाय पीते हुए कहा,

"ठीक हैं मैं आज ही मेहमानों की लिस्ट बनाती हूँ और तुम भी कैटरिंग वाले से बात कर लेना" "हाँ ठीक हैं, फिलहाल तो मुझे ऑफिस जाने में देर हो रही हैं" ऐसा कहते ही मनीष तैयार होने के लिए अपने कमरे में चला गया।

 

शाम को "रानी बिटिया का जन्मदिन धूमधाम से मनायेंगे, मस्ती करेंगे" सोनिया जूही के साथ लाड़ लड़ाते हुए बोल रही थी,

"मेमसाब इस मँहगाई के ज़माने में इतना खर्चा करने की क्या ज़रुरत हैं, जो क़रीब के रिश्तेदार हैं उनको ही बुला लेना"

"गौरी तुम चिन्ता मत करो मनीष के पास बहुत पैसा हैं अगर उसमे से कुछ खर्च हो जाएगा तो कुछ फ़र्क नहीं पड़ेगा" सोनिया ने यह बात कह तो दी लेकिन उसको अंदाज़ा भी नहीं था कि उसको कितना बड़ा खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता हैं।

"मनीष मैने सभी मेहमानों को निमंत्रण भेज दिया हैं, तुमने कैटरिंग वाले से बात की?"

"हाँ, वो वक़्त पर आ जाएगा" दो दिन बाद ही जूही का जन्मदिन था, ऐसा लग रहा था मानो जन्मदिन नहीं बल्कि किसी की शादी हो।

"गौरी, परसो जूही का जन्मदिन हैं सुबह जल्दी आ जाना और रात को जाने में देर हो सकती हैं सो यहीं रुक जाना।"

"जी मेमसाब, कल तो आप दोनों छुट्टी पर हैं ना , क्योंकि जन्मदिन की तैयारियाँ भी तो करनी होगी ?" गौरी ने पूछा,

"अरे नहीं, ऑफिस में बहुत काम हैं इसलिए जाना पड़ेगा, सोचा तो था छुट्टी लेने का पर संभव ही नहीं हैं।"

"और साहब?"

"उसके पास तो मुझसे भी ज्यादा काम हैं।"

"अच्छा मेमसाब अब मैं चलती हूँ कल वक़्त पर आ जाऊँगी" गौरी के जाने के बाद सोनिया भी बाकी काम ख़त्म करने में लग गयी।

 

अगले दिन की शुरुआत भी बाकी दिनों जैसे ही हुई, और शाम को सोनिया भी उसी वक़्त घर आयी जैसे की प्रतिदिन आती थी लेकिन जैसे ही घर के सामने पहुँची चौंक गयी, "यह घर का दरवाज़ा क्यों खुला हुआ हैं ! गौरी, गौरी" सोनिया घर में इधर-उधर घुमते हुए आवाज़े लगाने लगी,

"क्या हुआ सोनिया?" मनीष ने घर में घुसते हुए पूछा,

"मनीष गौरी कही नज़र नहीं आ रही हैं और जूही भी नहीं हैं, घर का दरवाज़ा भी खुला हुआ था" सोनिया के स्वर में घबराहट थी,

"तुम गौरी को फ़ोन लगाओ"

"लगा रही हूँ स्विच-ऑफ आ रहा हैं, मुझे तो बहुत चिन्ता हो रही हैं।" सोनिया ने कहा,

"ऐसा करते हैं पास में जो पार्क हैं वहाँ चलकर देखते हैं।"

"लेकिन मनीष गौरी इतनी लापरवाह कैसे हो सकती हैं, घर खुला छोड़ कर ही चली गयी।" "एक बार मिल जाने दो फिर बात करते हैं।" लेकिन गौरी और जूही दोनों ही पार्क में कही नहीं मिले, आस-पास लोगों से भी पूछताछ की लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ,

"मनीष मुझे तो बहुत घबराहट हो रही हैं अब हमें बिना देर किए पुलिस में इत्तला कर देनी चाहिए।" इतने में ही सोनिया के फ़ोन की घंटी बजने लगती हैं, "अरे यह तो गौरी का फ़ोन हैं" ऐसा कहते ही सोनिया ने तुरन्त फ़ोन उठा लिया, "हैलो, गौरी कहाँ हो तुम, हमे चिन्ता हो रही हैं और जूही तो ठीक हैं ना?"

"मेमसाब पहले आप मेरी बात ध्यान से सुनिए, अगर आपको अपनी बेटी सही-सलामत चाहिए तो दस लाख रुपए तैयार रखना"

"क्या ! तुम्हारा दिमाग ख़राब हो गया हैं।"

"मेरा दिमाग तो ठिकाने पर ही हैं गलती तो आपकी हैं जो किसी गैर पर इतना विश्वास कर लिया, अब अपने पैसे वाले पति से कहो पैसो का इंतज़ाम करे और पुलिस को फ़ोन करने की कोशिश की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा" ऐसा कह गौरी ने फ़ोन रख दिया,

"क्या हुआ सोनिया गौरी क्या कह रही थी?" मनीष ने घबराई हुए सोनिया से पूछा,

"मनीष उसने हमारी जूही का अपहरण कर लिया हैं।"

"क्या?"

"हाँ और वो अब दस लाख रुपए माँग रही हैं।"

"मैं अभी पुलिस को फ़ोन करता हूँ" ऐसा कह मनीष पुलिस को फ़ोन लगाने लगा,

"नहीं अगर हमने पुलिस को इत्तला की तो वो जूही को नुकसान पहुँचा सकती हैं।" सोनिया ने मनीष के हाथों से मोबाइल छीनते हुए कहा,

"लेकिन अब हम करें क्या?"

"तुम दस लाख रुपयों का इंतज़ाम करो"

"सोनिया इस वक़्त रुपयों का इंतज़ाम नहीं हो पाएगा" मनीष अपना सिर पकड़ कर बैठ गया, "हे भगवान किस मनहूस घड़ी में मैने उसको काम पर रखने का फ़ैसला लिया था।"

"सोनिया अब पछताने से क्या होगा  मैने तो पहले ही कहा था सोच-समझ कर काम पर रखना"

"रखा तो सोच-समझ कर ही था लेकिन शायद मेरे अतिविश्वास का उसने फ़ायदा उठा लिया" सोनिया अपना सिर पकड़ कर बैठ गई।

ऐसे में मनीष ने अपने दोस्त अर्जुन की मदद लेना ही बेहतर समझा और उसने तुरंत ही उसे फोन लगा दिया, "हैलो अर्जुन"

"मनीष कैसा है यार तू, सब ठीक तो हैं ना"

"नहीं यार कुछ भी ठीक नहीं हैं, तू इसी वक्त मेरे घर आ जा" और कुछ समय पश्चात ही अर्जुन मनीष के घर आ गया,

"क्या बात है दोस्त सब खैरियत तो हैं" अर्जुन के पूछते ही मनीष ने विस्तारपूर्वक सबकुछ बता दिया

"मुझे लगता हैं कि हमें पुलिस की मदद लेनी चाहिए"

"नहीं भैया अगर उसने मेरी जूही के साथ कुछ कर दिया तो"

"नहीं भाभी आप बिल्कुल भी मत घबराइए पुलिस ऐसे लोगों को काबू में करना जानती हैं, हमें उन पर विश्वास रखना चाहिए।" ऐसा बोल मनीष व अर्जुन पुलिस स्टेशन के लिए रवाना हो गए,

 

"इंस्पेक्टर साहब, मेरी कामवाली बाई ने मेरी बेटी का अपहरण कर लिया है, आप उसे बचा लीजिए" मनीष ने घबराते हुए कहा,

"बैठो और पूरी बात बताओं क्या हुआ हैं" इंस्पेक्टर के पूछने पर मनीष ने सबकुछ बता दिया, "आपने पुलिस पर विश्वास किया हैं, फ़िक्र मत कीजिए हम पूरी कोशिश करेंगे आपकी बेटी को सही-सलामत वापिस लाने की"

"धन्यवाद इंस्पेक्टर साहब"

"अगर आपके पास अपनी बेटी की कोई फोटो हो तो हमें दें दें और कामवाली का पहचान पत्र तो आप पहले ही दे चुके हैं।"

"जी" ऐसा कह मनीष ने जूही का फोटो पुलिस स्टेशन में दे दिया और खुद इस उम्मीद के साथ घर वापिस आ गया कि पुलिस सबकुछ सम्भाल लेगी और मनीष की उम्मीद रंग लाई, पुलिस की समझदारी से अब गौरी पुलिस हिरासत में थी और जूही अपने मम्मी-पापा के पास, "इंस्पेक्टर साहब आपका यह अहसान में जिन्दगीभर नहीं भूलूंगी" सोनिया ने इंस्पेक्टर के सामने हाथ जोड़ते हुए कहा,

"इसमें धन्यवाद किस बात का, जनता की सेवा करना तो हमारा फ़र्ज़ है बल्कि हमें तो खुशी है कि आपने हमारा विश्वास किया" कुछ औपचारिक बातों के पश्चात मनीष, सोनिया, जूही और अर्जुन घर के लिए रवाना हो गए ।

 "क्या हुआ सोनिया क्या सोच रही हो?" मनीष ने काफ़ी देर से शान्त बैठी सोनिया से पूछा, "मनीष मैंने एक फैसला लिया है, मैं अब नौकरी छोड़ दूँगी"

"पहले घर चलते हैं फिर आराम से बैठकर बात करेंगे" इसके बाद काफी देर तक गाड़ी में ख़ामोशी छायी रही लेकिन ऐसा लग रहा था मानो सब ही के मन में कुछ ना कुछ चल रहा है, कुछ ही देर में मनीष का घर आ गया,

"अच्छा यार अब मैं चलता हूँ तू भाभी और जूही को सम्भाल" अर्जुन के कहते ही मनीष ने उसे अपने गले से लगा लिया,

"धन्यवाद यार तूने मेरा साथ दिया तेरा यह अहसान मैं कभी नहीं भूलूँग"

"पागल मत बन तेरे लिए तो मेरी जान भी हाजिर है दोस्त" ऐसा कह अर्जुन अपने घर के लिए रवाना हो गया और मनीष भी अन्दर सोनिया व जूही के पास आ गया और जूही को गोद में उठा प्यार करने लगा,

"मनीष मुझे तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि गौरी ने हमें इतना बड़ा धोखा दिया है।" "सोनिया मुझे माफ़ कर दो, अगर मैने परिवार की ज़िम्मेदारी समझी होती तो ऐसा कुछ नहीं होता।"

"इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं हैं मनीष"

"घर के काम और जूही की परवरिश सिर्फ तुम्हारी ही  ज़िम्मेदारी नहीं हैं मुझे भी इसमें तुम्हारा साथ देना चाहिए था, सोनिया मैं आज तुम से वादा करता हूँ कि घर और बाहर की ज़िम्मेदारियो को निभाने की पूरी-पूरी कोशिश करूँगा।"

"अब बस भी करो तुमने तो अपनी बातों से मुझे भावुक कर दिया" मनीष भी सोनिया की ओर देख मुस्कुराने लगा ।

"हें भगवान हम तो बातों में यही भूल गए जूही के जन्मदिन के लिए मेहमान आते ही होंगे।" सोनिया ने सामने दीवार पर टंगी घड़ी पर नज़र ड़ालते हुए कहा,

"अरे मै तो तुम्हे बताना ही भूल गया, मैने अर्जुन से फ़ोन करवा कर सभी मेहमानों को आने से मना कर दिया था।"

"लेकिन अब पार्टी का क्या होगा?"

"पार्टी वो तो होगी, जिसमे केवल हम और हमारी बेटी ही होंगे, क्यों जूही बेटा सही कहा ना पापा ने" मनीष ने जूही को चूमते हुए कहा, और फिर सोनिया व मनीष दोनों ही गाने लगे, "हैप्पी बर्थडे टू जूही"

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