Nadani (Story On Immaturity)



नादानी की हैं बच्चों ने पर ख़तावार हैं हम

 अब ये ख़ता ना हो किसी से ध्यान रखना तुम


"रानोंओ रानोंना जाने कहाँ चली गई सुबह-सुबहकाकी तुमने देखा हैं कहीं रानों को?" "अरी क्यों मज़ाक कर रहीं हैं मुझ अंधी के साथकुछ तो शर्म कर"

"काकी मेरा वो मतलब नहीं थामैं तो पूछ रही थी कि रानों आपके पास आयी थी क्या?" "नहींअगर आती तो तेरे पूछने से पहले ही बता देतीमुझे तो लगता हैं खेत में चली गयी होगी अपने बापू के पासवहीं जाकर देख ले"

"अरे कहाँ काकीरानों के बापू तो खुद घर पर बैठे हैंरात को थोड़ा बुखार हो गया था।"

"हाय रामइतनी बड़ी बात और तू मुझे अब बता रही हैंसही बात हैं अपने-पराए में फ़र्क तो होता ही हैं।"

"बस करो काकीकुछ नहीं हुआ हैंअब बिल्कुल ठीक हैं वोंएक तो मैं रानों के लिए परेशान हो रही हूँ और तुम आलतू-फ़ालतू बातें किए जा रही हो।" ऐसा कहते ही गौरा दनदनाते हुए वहाँ से चली गई।

"सुनिए जीमुझे तो कहीं भी नहीं मिल रही हैं रानोंआप ही कहीं से ढूँढ़कर लाइए।"

"कुछ देर रुक जाआ जाएगी थोड़ी देर में" रमेश ने बड़ी ही बेपरवाही से जवाब दियाजिसे देख गौरा को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा।

"अगर तुम्हारी औलाद होती तब भी इतनी ही बेपरवाही से बैठे रहते क्या?"

"चुपकरआज तो बोल दी यह बात आज के बाद मत बोलनानहीं तो ज़ुबान खींच लूँगा तेरी" "अगर इतनी ही परवाह हैं तो ढूँढ़ने क्यों नहीं जाते उसे"

"बच्ची हैं खेल रही होगी कहीं अपनी सहेलियों के साथक्यों बात का बतंगड़ बना रही हैं।" क्या करती बेचारी गौरा मन मारकर घर के कामों में लग गयी।

गौरा की शादी बारह साल की उम्र में ही उसके घरवालों ने करवा दीअभी शादी को ढ़ाई साल ही गुज़रा था कि गौरा पेट से हो गयीउम्र कम थी इसलिए उसकी माँ उसे देखभाल के लिए अपने पास ले आयीगौरा का पति गणेश उससे बहुत प्यार करता थाइसलिए हफ्ते में एक-दो बार तो उससे मिलने अपने ससुराल पहुँच ही जाया करताजिस वजह से गौरा की बहनें उसका मज़ाक बनातीलेकिन माँ के आँखे दिखाते ही तुरन्त चुप भी बैठ जातीइसी प्रकार एक दिन जब वो गौरा से मिलकर अपने घर वापिस जा ही रहा था कि अचानक से उसकी बस का एक्सीडेंट हो गयाऔर दुर्घटनास्थल पर ही गौरा के पति गणेश की मौत हो गयीपाँच महीनें से गर्भवती गौरा अब विधवा हो चुकी थीसब इसके लिए आने वाले बच्चें को ही दोषी मान रहे थेंगौरा भी पूरी तरह से टूट चुकी थीउसका रो-रोकर बुरा हाल थाऐसे वक़्त में उसे उसके ही गाँव के एक लड़के रमेश ने संभालागौरा की सारी हक़ीक़त जानते हुए भी उसने गौरा के आगे शादी का प्रस्ताव रखाजिसे पहले तो गौरा ने ठुकरा दियाफिर घरवालों के समझाने के बाद वो शादी के लिए तैयार हो गयीअब गौरारमेश और रानों का एक छोटा-सा एवं सुखी परिवार हैंलेकिन रानों अभी तक यह नहीं जानती कि वो गौरा और रमेश की नहीं बल्कि गौरा और गणेश की बेटी हैं।

"रानों ओ रानों" की आवाज़ सुन गौरा बाहर की ओर दौड़ी, "क्या हुआक्यों चिल्ला रही हो?" "चाची रानों को भेजों ना बाहर खेलने के लिए"

"क्यारानों तुम्हारे साथ नहीं हैं....!"

"नहीं"

"हे रामकहाँ गयी मेरी बच्चीसुनिए जी.... " बदहवास सी गौरा घर के अन्दर भागी, "सुनिए जी रानों तो अपनी सहेलियों के साथ भी नहीं हैंअब जल्दी से उठिए और ढूँढ़कर लाइए मेरी बच्ची को" अब तो रमेश को भी रानों की चिंता सताने लगीवो तुरंत ही रानों को ढूँढ़ने के लिए घर से निकल पड़ा।

"अरी गौरा क्या हुआकोई परेशानी हैं क्या?"

"काकीरानों पता नहीं कहाँ चली गयीमुझे तो बहुत चिंता हो रही हैं।"

"कहीं वो राम बचन के बेटे के साथ......." कहते- कहते काकी एकदम से चुप हो गयी।

"ज़ुबान संभाल कर बात करों काकीयह क्या बोल रही हो।"

"संभाला तुमने होता गौरा अपनी बेटी कोकाकी पर क्यों चिल्ला रही होमाना की काकी अंधी हैंलेकिन हम तो देख सकते हैंअरे मैंने खुद रानों को कई बार राम बचन के लड़के के साथ बतियाते हुए देखा हैं।" गौरा के पड़ोस में रहने वाली शान्ति के कहते ही,

"चुपकर शान्तिखबरदार जो अब एक शब्द भी आगे बोलाबच्चें है वोदो घड़ी साथ खेल-बोल लिए तो क्या फर्क पड़ गया।"

"अरे मेरे चुप होने से सच्चाई नहीं बदल जाएगीसब जानते है उन दोनों का कुछ चल रहा हैं।" "अरे बतियाता तो तेरा पति भी रुक्मणि के साथ तो क्या उसका भी चक्कर चल रहा हैंऔर तू भी तो बतियातीं हैं कई बार मेरे पति के साथतो तेरा भी चक्कर चल रहा हैं क्या?"

"गौरा यह क्या अनाप-शनाप बके जा रही हैं।" शान्ति ने जैसे ही गौरा के ऊपर चिल्लाते हुए कहा,

"चिल्लाऊँ नहीं तो क्या करूँतू बेवजह इल्ज़ाम जो लगा रही हैं मेरी बेटी पर"

"गौरा समझने की कोशिश करलड़के-लड़की साथ में घूमे-फिरे बात करें ठीक हैंलेकिन उन्हें मर्यादा पता होनी चाहिएऔर यह बात हम माँ-बापों को ही समझानी होती हैंपहले तो हम उन्हें सही-गलत कुछ समझाते नहीं फिर अपना सिर पीटते फिरते हैं।" लेकिन उस समय गौरा को शान्ति द्वारा कहा गया एक-एक शब्द तीर की तरह से चुभ रहा था

"गौरागौरा" इतने में ही रमेश घबराता हुआ वहाँ आ गया।

"क्या हुआमिली रानों" गौरा के पूछते ही

"नहींलेकिन गाँव के कई लोगो ने उसे सुबह राम बचन के लड़के शंकर के साथ देखा हैं।"

"हाँ तो शंकर से पूछों की वो कहाँ हैं।"

"शंकर भी तो लापता हैं।"

"मुझे तो लगता हैं दोनों भाग गए।" शान्ति के बीच में बोलते ही,

"अब एक शब्द और नहीं शान्तिनहीं तो मेरे हाथों तेरा ख़ून हो जायेगा।"

"अपने घर की इज़्ज़त तो संभाल ले पहलेखून बाद में कर लेना।" शान्ति गौरा के ऊपर ताना कसती हुई अपने घर के अन्दर वापिस चली गयी।

"सुनिए जी मुझे तो बहुत चिंता हो रही हैंना जाने कहाँ चली गयी अपनी बेटी" इतने में ही पीछे से आवाज़ आयी,

"माँ-बापू" गौरा ने जैसे ही मुड़कर देखा तो दुल्हन के वेश में सजी-धजी रानों शंकर के साथ खड़ी थी,

"येये क्या हैं रानों" गौरा ने जैसे ही घबराते हुए पूछा,

"मैंने शादी कर ली माँ"

"शादी……!" गौरा द्वारा आश्चर्य से पूछते ही,  

"ज़रूर इस शंकर ने ही भड़काया होगा हमारी बेटी को" ऐसा कहते ही रमेश शंकर का कॉलर पकड़ने उसकी ओर दौड़ा,

"रुको बापूक्या हो गया अगर हमने शादी कर ली तोआप ही तो कहते थे कि एक दिन मेरी शादी कर दोगे।"

"लेकिन बेटा शादी के लिए अभी तू बहुत छोटी हैंअरे ग्यारह साल की उम्र में भी कोई शादी करता हैं।"

"तो फिर कब करते हैं?" रानों ने बहुत ही मासूमियत से पूछा,

"बेटा शादी के वक़्त लड़की की उम्र अठारह साल एवं लड़के की उम्र इक्कीस साल होनी चाहिए।" "लेकिन बापू यह बात तो किसी ने हमें पहले बताई ही नहीं"

"हाँ यह तो मुझे भी नहीं पता था।" बीच में शंकर बोला,

"सत्यनाशअरे इन बच्चों ने तो बाल विवाह कर लिया हैंयूँ तो मेरी शादी भी नौ साल की उम्र में ही हो गयी थीलेकिन आजकल तो ज़माना कितना बदल गया हैंलेकिन इसमें बच्चों की क्या ग़लती माँ-बाप को समझाना चाहिए था।" वहाँ बैठी काकी कुछ ना कुछ बड़बड़ाए जा रही थीऔर इतना सबकुछ देखसुन क्या करते बेचारे रमेश और गौरा किसको दोष देते खुद कोऔर कर भी क्या सकते थे देखा जाए तो गुनहगार वो ही थेकोई ओर नहीं। 


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